कक्षा 7 हिंदी NCERT समाधान: पाठ 3 - हिमालय की बेटियाँ
यह पृष्ठ कक्षा 7 हिंदी की पुस्तक 'हिमालय की बेटियाँ' के लिए विस्तृत NCERT समाधान प्रस्तुत करता है। यह पाठ नदियों के प्रति लेखक के बदलते दृष्टिकोण की पड़ताल करता है, जहाँ वे नदियों को माँ के रूप में देखने की पारंपरिक धारणा से आगे बढ़कर उन्हें बेटियों, प्रेयसी और बहनों के रूप में भी देखते हैं। समाधानों में सिंधु और ब्रह्मपुत्र जैसी नदियों की विशिष्टताओं, काका कालेलकर द्वारा नदियों को 'लोकमाता' कहने के कारणों और हिमालय की यात्रा के दौरान लेखक द्वारा की गई प्रशंसाओं पर प्रकाश डाला गया है। यह पाठ भाषा के प्रयोग, विशेषणों और निर्जीव वस्तुओं को सजीवता प्रदान करने वाली साहित्यिक युक्तियों का भी विश्लेषण करता है। ये समाधान छात्रों को पाठ की गहरी समझ विकसित करने और परीक्षाओं के लिए प्रभावी ढंग से तैयारी करने में मदद करेंगे।
Quick info
| Board | CBSE |
|---|---|
| Class | Class 7 |
| Subject | हिंदी |
| Session | 2026 |
| Language | Hindi |
| Type | NCERT Solutions |
| Chapter | 3. हिमालय की बेटियाँ |
Chapter summary
कक्षा 7 हिंदी के पाठ 'हिमालय की बेटियाँ' के ये NCERT समाधान नदियों के प्रति लेखक के काव्यात्मक दृष्टिकोण को स्पष्ट करते हैं। समाधानों में नदियों को माँ, बेटी, प्रेयसी और बहन के रूप में देखने के विभिन्न पहलुओं पर चर्चा की गई है। सिंधु और ब्रह्मपुत्र जैसी नदियों की विशेषताओं, काका कालेलकर के 'लोकमाता' संबोधन के पीछे के तर्कों और हिमालय की यात्रा के अनुभवों का विस्तृत विश्लेषण प्रस्तुत किया गया है। इसके अतिरिक्त, भाषा के प्रयोग, विशेषणों के मिलान और साहित्यिक युक्तियों जैसे मानवीकरण पर भी ध्यान केंद्रित किया गया है।
Learning outcomes
- नदियों को माँ मानने की परंपरा और लेखक के नवीन दृष्टिकोण को समझना।
- सिंधु और ब्रह्मपुत्र नदियों की विशेषताओं का वर्णन करना।
- काका कालेलकर द्वारा नदियों को 'लोकमाता' कहने के कारणों को स्पष्ट करना।
- लेखक द्वारा हिमालय की यात्रा के अनुभवों और प्रशंसाओं को पहचानना।
- भाषा की बात के अंतर्गत तुलनात्मक प्रयोगों और मानवीकरण को समझना।
Topics covered
Paper topics
- नदियों का मानवीकरण
- नदियों के प्रति लेखक का दृष्टिकोण
- सिंधु और ब्रह्मपुत्र नदियों की विशेषताएँ
- लोकमाता की अवधारणा
- हिमालय की यात्रा के अनुभव
- साहित्यिक तुलनाएँ
- विशेषण और विशेष्य
- नदियों का प्रदूषण
Important topics
- नदियों का मानवीकरण और लेखक का दृष्टिकोण
- सिंधु और ब्रह्मपुत्र की विशेषताएँ
- काका कालेलकर का 'लोकमाता' संबोधन
- साहित्यिक तुलनाएँ और मानवीकरण
- नदियों में आए बदलाव (प्रदूषण)
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Questions and Solutions
प्रश्न 1
भारतीय संस्कृति में नदियों को माँ का दर्जा देना एक अत्यंत प्राचीन परंपरा है। माँ की तरह नदियाँ भी अपने जल से हमारा पालन-पोषण करती हैं और हमारे खेतों को सींचकर जीवनदायिनी बनती हैं। हालाँकि, लेखक नागार्जुन नदियों को केवल माँ के रूप में ही नहीं देखते, बल्कि वे उन्हें बेटी, प्रेयसी और बहन जैसे अन्य रूपों में भी देखते हैं, जो उनके प्रति एक नवीन और काव्यात्मक दृष्टिकोण को दर्शाता है।
प्रश्न 2
सिंधु और ब्रह्मपुत्र हिमालय से निकलने वाली दो प्रमुख नदियाँ हैं। इनकी विशेषता यह है कि इन्हें ऐतिहासिक महत्व और विशालता के कारण पुल्लिंग रूप में 'नद' भी कहा जाता है। ये दोनों नदियाँ अन्य सभी नदियों के संगम का केंद्र बनती हैं। प्राकृतिक और भौगोलिक दृष्टि से भी इनका विशेष महत्व है। ऐसा माना जाता है कि ये दोनों नदियाँ दयालु हिमालय के पिघलते हुए बर्फ़ के जल से बनी हैं। इनका स्वरूप अत्यंत विशाल और मनमोहक है, जिसे देखकर सौभाग्यशाली समुद्र भी इन दो 'बेटियों' का हाथ थामने पर गर्व महसूस करता है।
प्रश्न 3
काका कालेलकर ने नदियों को 'लोकमाता' इसलिए कहा है क्योंकि वे युगों-युगों से मानव जीवन के लिए अत्यंत कल्याणकारी रही हैं। जिस प्रकार एक माँ अपने बच्चों का भरण-पोषण करती है, उसी प्रकार नदियाँ भी अपने जल से धरती को सींचकर भूमि की उर्वराशक्ति बढ़ाती हैं और मानव जीवन का पोषण करती हैं। वे पूजनीय, पवित्र और कल्याणकारी हैं। भले ही मनुष्य नदियों को दूषित करता है, फिर भी वे अपार कष्ट सहकर भी हमारा कल्याण करती रहती हैं, ठीक उसी तरह जैसे एक माँ अपने नालायक पुत्र का भी भला चाहती है। इन माँ-समान विशेषताओं के कारण ही काका कालेलकर ने उन्हें लोकमाता का दर्जा दिया है।
प्रश्न 4
हिमालय की यात्रा के दौरान लेखक ने वहाँ के प्राकृतिक सौंदर्य की मुक्त कंठ से प्रशंसा की है। उन्होंने हिमालय की अनुपम छटा, नदियों की चंचल अठखेलियाँ, बर्फ़ से ढकी हुई ऊँची-ऊँची पहाड़ियाँ, पेड़-पौधों से भरी हुई घाटियाँ और देवदार, चीड़, सरो, चिनार, सफैदा, कैल जैसे वृक्षों से सुशोभित घने जंगलों की सुंदरता का वर्णन किया है।
प्रश्न 5
यह लेख 1947 में लिखा गया था। उस समय से लेकर आज तक, हिमालय से निकलने वाली नदियों में महत्वपूर्ण बदलाव आए हैं। सबसे बड़ा बदलाव यह है कि प्रदूषण के कारण नदियों ने अपनी मूल पवित्रता और प्राकृतिक स्वरूप काफी हद तक खो दिया है। मैदानी इलाकों में पहुँचते-पहुँचते शहरों का गंदा पानी और औद्योगिक कचरा इनमें इस हद तक मिल जाता है कि इनकी स्वच्छता का नामोनिशान मिट जाता है। गंगा और यमुना जैसी पवित्र नदियाँ आज इस प्रदूषण का ज्वलंत उदाहरण हैं।
प्रश्न 6
कालिदास ने हिमालय को 'देवात्मा' इसलिए कहा है क्योंकि प्राचीन मान्यताओं के अनुसार, हिमालय को देवताओं का निवास स्थान माना जाता रहा है। यह पवित्र पर्वत श्रृंखला अपनी अलौकिक सुंदरता और शांति के कारण देवताओं के वास के योग्य है। आज भी कई लोग हिमालय को भगवान शिव का निवास स्थान मानते हैं, जो इसकी दिव्यता को और बढ़ाता है।
प्रश्न 7
उदाहरण:
- (क) संभ्रांत महिला की भाँति वे प्रतीत होती थीं।
- (ख) माँ और दादी, मौसी और मामी की गोद की तरह उनकी धारा में डुबकियाँ लगाया करता।
अन्य पाठों से ऐसे पाँच तुलनात्मक प्रयोग निकालकर कक्षा में सुनाइए और उन सुंदर प्रयोगों को कॉपी में भी लिखिए।
लेखक अपनी बात को अधिक स्पष्ट और प्रभावशाली बनाने के लिए अनेक उपमाओं और तुलनाओं का प्रयोग करते हैं। यहाँ पाठ से कुछ अन्य तुलनात्मक प्रयोग दिए गए हैं:
- सचमुच दादी माँ शापभ्रष्ट देवी-सी लगीं। (यहाँ दादी माँ की तुलना शाप से मुक्त हुई देवी से की गई है।)
- बच्चे ऐसे सुंदर जैसे सोने के सजीव खिलौने। (बच्चों की सुंदरता की तुलना सोने के सजीव खिलौनों से की गई है।)
- हरी लकीर वाले सफ़ेद गोल कंचे, बड़े आँवले जैसे। (कंचों के आकार और रंग की तुलना बड़े आँवले से की गई है।)
- बड़े मियाँ के भाषण की तूफ़ान मेल के लिए कोई निश्चित स्टेशन नहीं है सुनने वाला थककर जहाँ रोक दे वही स्टेशन मान लिया जाता है। (भाषण की अनिश्चितता की तुलना तूफ़ान मेल से की गई है।)
- संध्या को स्वप्न की भाँति गुजार देते थे। (संध्या के समय को स्वप्न के समान बिताने का वर्णन है।)
प्रश्न 8
(क) परंतु इस बार जब मैं हिमालय के कंधे पर पर चढ़ा तो वे कुछ और रूप में सामने था।
(ख) काका कालेलकर ने नदियों को लोकमाता कहा है।
पाठ से इसी तरह के और उदाहरण ढूँढिए।
निर्जीव वस्तुओं को सजीव मानकर उनका वर्णन करना, जिसे मानवीकरण अलंकार भी कहते हैं, लेखक की भाषा को अधिक सजीव और रोचक बनाता है। 'हिमालय की बेटियाँ' पाठ में ऐसे कई प्रयोग मिलते हैं:
- नदियाँ संभ्रांत महिला की भाँति प्रतीत होती थीं। (यहाँ नदियों को सजी-धजी महिला के समान बताया गया है।)
- जितना की हिमालय की गोद में बच्चियाँ बनकर ये कैसे खेला करती हैं। (नदियों को हिमालय की गोद में खेलने वाली बच्चियों के रूप में चित्रित किया गया है।)
- हिमालय को ससुर और समुद्र को दामाद कहने में कुछ झिझक नहीं होती थी। (यहाँ हिमालय और समुद्र के बीच संबंध को मानवीय रिश्ते (ससुर-दामाद) के रूप में दर्शाया गया है।)
- बूढ़ा हिमालय अपनी इन बेटियों के लिए कितना सिर धुनता होगा। (यहाँ बूढ़े हिमालय को अपनी बेटियों के लिए चिंतित दिखाया गया है, जो मानवीकरण का एक उत्कृष्ट उदाहरण है।)
प्रश्न 9
विशेषण विशेष्य
संभ्रांत वर्षा
विशेषण वे शब्द होते हैं जो संज्ञा या सर्वनाम की विशेषता बताते हैं, जबकि विशेष्य वह संज्ञा या सर्वनाम होता है जिसकी विशेषता बताई जाती है। दिए गए शब्दों का सही मिलान इस प्रकार है:
विशेषण | विशेष्य
---|---
संभ्रांत | महिला
(पाठ में 'संभ्रांत महिला की भाँति' प्रयोग हुआ है, जहाँ 'संभ्रांत' विशेषण है और 'महिला' विशेष्य है।)
अन्य संभावित मिलान (पाठ के संदर्भ में):
- बर्फ़ से ढकी | पहाड़ियाँ
- पेड़-पौधों से भरी | घाटियाँ
- घने | जंगल
- मीठी | धुन
- चंचल | नदियाँ
Common mistakes
- नदियों के प्रति लेखक के बदलते दृष्टिकोण को समझने में भ्रमित होना।
- विशेषण और विशेष्य के मिलान में त्रुटियाँ करना।
- साहित्यिक युक्तियों (जैसे मानवीकरण) के उदाहरणों को पहचानने में कठिनाई।
Revision tips
- पाठ के मुख्य विचारों को समझने के लिए समाधानों को ध्यान से पढ़ें।
- नदियों के विभिन्न रूपों (माँ, बेटी, प्रेयसी) से संबंधित उत्तरों पर विशेष ध्यान दें।
- भाषा की बात अनुभाग में दिए गए तुलनात्मक प्रयोगों और मानवीकरण के उदाहरणों का अभ्यास करें।
- विशेषण और विशेष्य के मिलान वाले प्रश्न को हल करने का अभ्यास करें।
Practice MCQs
Q1. लेखक नागार्जुन नदियों को माँ के अतिरिक्त किन रूपों में देखते हैं?
Explanation: लेखक नागार्जुन नदियों को माँ के साथ-साथ बेटी, प्रेयसी और बहन के रूपों में भी देखते हैं।
Q2. सिंधु और ब्रह्मपुत्र को 'नद' क्यों कहा गया है?
Explanation: सिंधु और ब्रह्मपुत्र को उनकी ऐतिहासिकता और महत्व के कारण पुल्लिंग रूप में 'नद' कहा गया है।
Q3. काका कालेलकर ने नदियों को 'लोकमाता' क्यों कहा है?
Explanation: नदियाँ युगों से माँ की तरह मानव जीवन का भरण-पोषण करती हैं और कल्याणकारी रही हैं, इसलिए काका कालेलकर ने उन्हें लोकमाता कहा है।
Q4. लेखक ने हिमालय की यात्रा में किसकी प्रशंसा की है?
Explanation: लेखक ने हिमालय की अनुपम छटा, नदियों की अठखेलियों, बर्फ़ से ढकी पहाड़ियों, पेड़-पौधों से भरी घाटियों और जंगलों की प्रशंसा की है।
Q5. पाठ के अनुसार, 1947 के बाद नदियों में क्या बदलाव आया है?
Explanation: 1947 के बाद, प्रदूषण के कारण हिमालय से निकलने वाली नदियों ने अपनी पवित्रता और मूल रूप काफी हद तक खो दिया है।
Frequently asked questions
कक्षा 7 हिंदी के पाठ 'हिमालय की बेटियाँ' में मुख्य रूप से क्या सिखाया गया है?
इस पाठ में नदियों के प्रति लेखक के बदलते दृष्टिकोण को सिखाया गया है, जहाँ वे नदियों को माँ के साथ-साथ बेटी, प्रेयसी और बहन के रूप में भी देखते हैं। इसमें नदियों की विशेषताओं और उनके महत्व पर भी प्रकाश डाला गया है।
लेखक नागार्जुन नदियों को किन-किन रूपों में देखते हैं?
लेखक नागार्जुन नदियों को माँ के पारंपरिक रूप के अलावा बेटी, प्रेयसी और बहन के रूपों में भी देखते हैं।
काका कालेलकर ने नदियों को 'लोकमाता' क्यों कहा है?
काका कालेलकर ने नदियों को 'लोकमाता' इसलिए कहा है क्योंकि वे युगों-युगों से मानव जीवन का भरण-पोषण करती रही हैं और कल्याणकारी रही हैं, ठीक माँ की तरह।
क्या ये समाधान परीक्षा की तैयारी में मदद करेंगे?
हाँ, ये समाधान पाठ के प्रत्येक प्रश्न के विस्तृत उत्तर प्रदान करते हैं, जिससे छात्रों को विषय की गहरी समझ विकसित करने और परीक्षा में अच्छे अंक लाने में मदद मिलेगी।
पाठ में 'भाषा की बात' अनुभाग क्या सिखाता है?
यह अनुभाग लेखक द्वारा प्रयोग की गई तुलनात्मक युक्तियों और निर्जीव वस्तुओं को सजीवता प्रदान करने वाले प्रयोगों (मानवीकरण) को समझने में मदद करता है।
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