कक्षा 6 इतिहास: भोजन: संग्रह से उत्पादन तक - NCERT समाधान
यह पृष्ठ कक्षा 6 के इतिहास के अध्याय 3, "भोजन: संग्रह से उत्पादन तक" के लिए विस्तृत NCERT समाधान प्रस्तुत करता है। यह अध्याय प्रारंभिक मानव समाजों की यात्रा का पता लगाता है, जिसमें शिकार और भोजन संग्रह से लेकर कृषि और पशुपालन के विकास तक शामिल है। समाधानों में कुत्तों जैसे जानवरों को पालतू बनाने के कारणों, प्रारंभिक बर्तनों के उपयोग, जानवरों से प्राप्त होने वाले लाभों और कृषि के विकास के महत्व पर प्रकाश डाला गया है। इसमें प्रारंभिक मानव बस्तियों, जैसे कि चताल ह्यूक और मेहरगढ़ के पुरातात्विक साक्ष्यों पर भी चर्चा की गई है, जो मानव सभ्यता के विकास में महत्वपूर्ण मील के पत्थर दर्शाते हैं। ये समाधान छात्रों को प्रारंभिक मानव जीवन की जटिलताओं और कृषि के उद्भव के बारे में उनकी समझ को गहरा करने में मदद करते हैं, जो परीक्षा की तैयारी के लिए एक मूल्यवान संसाधन के रूप में काम करते हैं।
Quick info
| Board | CBSE |
|---|---|
| Class | Class 6 |
| Subject | हमारे अतीत |
| Session | 2026 |
| Language | Hindi |
| Type | NCERT Solutions |
| Chapter | 3. भोजन संग्रह से उत्पादन तक |
Chapter summary
कक्षा 6 के इतिहास के अध्याय 3 "भोजन: संग्रह से उत्पादन तक" के ये NCERT समाधान प्रारंभिक मानव जीवन के महत्वपूर्ण परिवर्तनों को कवर करते हैं। इसमें शिकार और संग्रह से कृषि और पशुपालन की ओर संक्रमण, जानवरों को पालतू बनाने के कारण, और प्रारंभिक औजारों और बर्तनों के उपयोग पर ध्यान केंद्रित किया गया है। समाधान चताल ह्यूक और मेहरगढ़ जैसी पुरातात्विक स्थलों की अंतर्दृष्टि प्रदान करते हैं, जो मानव सभ्यता के विकास को दर्शाते हैं।
Learning outcomes
- शिकार और भोजन संग्रह से कृषि और पशुपालन में परिवर्तन को समझना।
- प्रारंभिक मानव द्वारा जानवरों को पालतू बनाने के कारणों का विश्लेषण करना।
- कृषि के विकास के महत्व और इसके प्रभावों की व्याख्या करना।
- चताल ह्यूक और मेहरगढ़ जैसी पुरातात्विक स्थलों के महत्व को पहचानना।
- प्रारंभिक मानव जीवन से संबंधित विभिन्न गतिविधियों और उपकरणों के बारे में जानना।
Topics covered
Paper topics
- प्रारंभिक मानव जीवन
- शिकार और भोजन संग्रह
- जानवरों को पालतू बनाना
- कृषि का विकास
- प्रारंभिक औजार और बर्तन
- चताल ह्यूक पुरास्थल
- मेहरगढ़ पुरास्थल
- नवपाषाण युग
- स्त्री-पुरुषों के कार्य
- पशुपालन का महत्व
Important topics
- शिकार से कृषि की ओर संक्रमण
- जानवरों को पालतू बनाने के कारण
- कृषि के विकास का महत्व
- चताल ह्यूक और मेहरगढ़ का पुरातात्विक महत्व
- प्रारंभिक मानव समाजों में जीवन शैली
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Questions and Solutions
प्रश्न 1
प्रारंभिक मानव अपने जीवनयापन के लिए शिकार पर निर्भर था। कुत्तों की सूंघने की क्षमता बहुत तेज होती है, जिसके कारण वे दूर से ही शिकार या किसी खतरे को भांप लेते थे। इस क्षमता के कारण कुत्ते मानव को शिकार खोजने और संभावित खतरों से आगाह करने में सहायक सिद्ध हुए। संभवतः इसी कारण से, कुत्तों को सबसे पहले पालतू बनाया गया होगा, जिससे मानव को शिकार करने और अपनी सुरक्षा सुनिश्चित करने में मदद मिली।
प्रश्न 2
यह संभावना बहुत कम है कि शिकारी या भोजन-संग्रह करने वाले लोग बर्तन बनाते और उनका प्रयोग करते होंगे। इसका मुख्य कारण यह है कि वे अपना जीवनयापन भोजन की तलाश में एक स्थान से दूसरे स्थान पर घूमते हुए करते थे। इस घुमंतू जीवन शैली में, वे बहुत अधिक मात्रा में भोजन का संग्रह नहीं करते थे, और न ही उन्हें अपने साथ भारी या नाजुक बर्तन ले जाने की आवश्यकता महसूस होती थी। यदि वे कुछ भोजन इकट्ठा भी करते थे, तो संभवतः वे प्राकृतिक पात्रों जैसे पत्तों, टोकरियों या खालों का उपयोग करते होंगे।
प्रश्न 3
भोजन प्राप्त करने के अलावा, जानवरों से मानव को कई अन्य उपयोगी चीजें भी मिलती थीं। इनमें शामिल हैं:
- चमड़ा: जानवरों की खाल का उपयोग चमड़ा बनाने के लिए किया जाता था, जिससे कपड़े, जूते और अन्य वस्तुएँ बनाई जाती थीं।
- औजार: जानवरों की हड्डियों का उपयोग नुकीले औजार और हथियार बनाने के लिए किया जा सकता था।
- परिवहन और भार वहन: कुछ जानवरों का उपयोग सामान ढोने या गाड़ी खींचने के लिए किया जाता था, जिससे यात्रा और परिवहन आसान हो जाता था।
- अन्य उत्पाद: कुछ जानवर दूध भी प्रदान करते थे, जो भोजन का एक महत्वपूर्ण स्रोत था।
प्रश्न 4
आज भी जानवरों का हमारे जीवन में महत्वपूर्ण योगदान है और उनका उपयोग विभिन्न कार्यों के लिए किया जाता है:
- परिवहन और माल ढलाई: आज भी कई क्षेत्रों में जानवरों का उपयोग गाड़ी खींचने और भारी सामान ढोने के लिए किया जाता है।
- कृषि कार्य: खेतों की जुताई और अन्य कृषि कार्यों में बैलों जैसे जानवरों का उपयोग होता है।
- खाद्य उत्पाद: जानवरों से हमें दूध, मांस और अंडे जैसे महत्वपूर्ण खाद्य पदार्थ प्राप्त होते हैं।
- चमड़ा उद्योग: जानवरों की खाल से उच्च गुणवत्ता का चमड़ा प्राप्त होता है, जिसका उपयोग जूते, बैग, जैकेट आदि बनाने में होता है।
- अन्य उपयोग: कुछ जानवर ऊन (भेड़) और अन्य उत्पाद भी प्रदान करते हैं।
प्रश्न 5
प्रारंभिक मानव समाजों में, कार्यों का विभाजन अक्सर लिंग के आधार पर होता था।
पुरुषों द्वारा किए जाने वाले काम: पुरुषों का मुख्य कार्य शिकार करना, मछली पकड़ना और जानवरों के झुंडों को चराना था। वे अक्सर लंबी दूरी की यात्राएं करते थे और खतरनाक जानवरों से बचाव का कार्य भी संभालते थे।
महिलाओं द्वारा किए जाने वाले काम: महिलाओं की भूमिका मुख्य रूप से बच्चों की देखभाल, भोजन संग्रह, पौधों की पहचान और उनके उपयोग की जानकारी रखना, तथा भोजन तैयार करना (जैसे पीसना, पकाना) था। जब कृषि का विकास हुआ, तो महिलाओं ने खेतों में काम करने, बीज बोने, पौधों की देखभाल करने और फसल काटने जैसे कार्यों में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।
प्रश्न 6
हालांकि कुछ कार्यों का विभाजन लिंग के आधार पर होता था, फिर भी ऐसे कई काम थे जो स्त्री और पुरुष दोनों मिलकर करते थे। इनमें शामिल हो सकते हैं:
- झोपड़ियाँ बनाना: रहने के लिए आश्रय बनाने में दोनों का योगदान हो सकता है।
- औजार बनाना: पत्थर या हड्डियों से औजार बनाने के काम में दोनों की भागीदारी संभव थी।
- टोकरियाँ बनाना: पौधों के रेशों से टोकरियाँ बनाने का काम भी दोनों कर सकते थे।
- जानवरों की देखभाल: छोटे जानवरों या पालतू पशुओं की देखभाल में दोनों का सहयोग हो सकता था।
- दूध निकालना: पशुओं से दूध निकालने का काम भी दोनों कर सकते थे।
- बर्तन बनाना: यदि मिट्टी के बर्तन बनाने की शुरुआत हो गई थी, तो यह कार्य भी दोनों द्वारा किया जा सकता था।
प्रश्न 7
स्रोत में दिए गए स्तर 2 और स्तर 3 के संदर्भ को देखते हुए, यह निष्कर्ष निकाला जा सकता है कि स्तर 3 अधिक पुराना है। पुरातात्विक खुदाई में, नीचे की परतें (जो पहले दबी हुई थीं) आमतौर पर ऊपर की परतों की तुलना में अधिक पुरानी होती हैं। यदि स्तर 3 नीचे स्थित है और स्तर 2 उसके ऊपर है, तो स्तर 3 अधिक प्राचीन होगा।
प्रश्न 8
चूंकि कौड़ियाँ और सीपियाँ प्राकृतिक रूप से पाई जाने वाली सुंदर वस्तुएँ हैं और उस समय पहिए वाले वाहन उपलब्ध नहीं थे, इसलिए यह अनुमान लगाया जा सकता है कि इनका उपयोग मुख्य रूप से सजावटी या आभूषण के रूप में होता होगा। संभवतः इन्हें मालाओं, हारों या अन्य प्रकार के अलंकरणों को बनाने के लिए इस्तेमाल किया जाता था। ये वस्तुएँ दूर-दराज के क्षेत्रों से लाई जाती थीं, जो प्रारंभिक व्यापार या विनिमय का भी संकेत देती हैं।
प्रश्न 9
यदि मेरे पास जमीन का एक छोटा-सा टुकड़ा होता, तो मैं उसमें अपने क्षेत्र में आसानी से उगने वाली और पौष्टिक फसल, जैसे कि गेहूँ या चावल, उगाना पसंद करती।
- फसल का चुनाव: मैं ऐसी फसल चुनती जो मेरे क्षेत्र की जलवायु और मिट्टी के अनुकूल हो और जिसकी पैदावार अच्छी हो।
- बीज प्राप्त करना: बीज प्राप्त करने के लिए, मैं स्थानीय बीज भंडार या कृषि सहकारी समिति से प्रमाणित बीज खरीदती।
- बुवाई की विधि: सबसे पहले, मैं जमीन को अच्छी तरह से जोतकर समतल करती। फिर, बीजों को उचित दूरी और गहराई पर बोती, यह सुनिश्चित करते हुए कि वे मिट्टी से ढक जाएं।
- पौधों की देखभाल: पौधों की अच्छी वृद्धि के लिए, मैं नियमित रूप से सिंचाई करती, खरपतवारों को हटाती (निराई-गुड़ाई), और आवश्यकतानुसार जैविक खाद का प्रयोग करती। मैं कीटों और पक्षियों से फसलों की रक्षा के लिए भी उपाय करती।
- फसल की कटाई का समय समझना: फसल पक गई है या नहीं, यह समझने के लिए मैं पौधों के रंग और दानों की परिपक्वता पर ध्यान देती। जब फसल के दाने सुनहरे या पीले रंग के हो जाते हैं और पौधे सूखने लगते हैं, तो यह संकेत होता है कि फसल कटाई के लिए तैयार है।
प्रश्न 10
खेती करने वाले लोग एक ही स्थान पर लंबे समय तक इसलिए रहते थे क्योंकि कृषि एक ऐसी प्रक्रिया है जिसमें समय और निरंतरता की आवश्यकता होती है। भूमि को तैयार करने, बीज बोने, पौधों की देखभाल करने (जैसे सिंचाई, निराई-गुड़ाई) और अंत में फसल पकने तक इंतजार करने में एक लंबा समय लगता है। एक बार फसल पक जाने के बाद, उसे काटना और अनाज को सुरक्षित रखना भी आवश्यक होता है। इस पूरी प्रक्रिया के लिए एक ही स्थान पर स्थायी रूप से रहना अनिवार्य था, क्योंकि बार-बार स्थान बदलने से खेती करना संभव नहीं था। स्थायी बस्तियों से ही गांवों और शहरों का विकास संभव हुआ।
प्रश्न 11
पृष्ठ 25 की तालिका के अनुसार, यदि नेइनुओ चावल खाना चाहती है, तो उसे उन स्थानों पर जाना चाहिए जहाँ चावल के प्राचीनतम साक्ष्य मिले हैं। ये स्थान हैं:
- कोल्डिहवा: यह स्थान वर्तमान उत्तर प्रदेश में स्थित है।
- महागढ़: यह स्थान भी वर्तमान उत्तर प्रदेश में स्थित है।
इन स्थानों पर चावल की खेती के सबसे पुराने प्रमाण मिले हैं, इसलिए नेइनुओ को चावल के लिए इन्हीं स्थानों पर जाना चाहिए।
प्रश्न 12
पुरातत्त्वविदों का यह मानना कि मेहरगढ़ के लोग पहले शिकारी थे और बाद में पशुपालन उनके लिए अधिक महत्वपूर्ण हो गया, विभिन्न पुरातात्विक साक्ष्यों पर आधारित है। खुदाई में प्राप्त जानवरों की हड्डियों के विश्लेषण से पता चलता है कि शुरुआत में जंगली जानवरों (जैसे हिरण) की हड्डियाँ अधिक मिलती थीं, जो शिकार की प्रधानता को दर्शाती हैं। समय के साथ, पालतू जानवरों जैसे भेड़, बकरी और मवेशियों की हड्डियों की संख्या में वृद्धि देखी गई। इसके अतिरिक्त, मेहरगढ़ में मिले घरों के अवशेष और अनाज के भंडारण के प्रमाण भी बताते हैं कि लोग धीरे-धीरे खेती और पशुपालन पर अधिक निर्भर होने लगे थे, जिससे उन्हें एक स्थान पर स्थायी रूप से बसने में मदद मिली। यह परिवर्तन दर्शाता है कि उनका जीवन शिकारी-संग्रहकर्ता से एक उत्पादक जीवन शैली की ओर विकसित हुआ।
Common mistakes
- शिकारी-संग्रहकर्ताओं द्वारा बर्तनों के उपयोग को गलत समझना।
- कृषि के विकास के लिए आवश्यक समय और प्रयास को कम आंकना।
- जानवरों से प्राप्त होने वाले लाभों को केवल भोजन तक सीमित समझना।
- प्रारंभिक मानव समाजों में स्त्री-पुरुषों के कार्यों के बीच अंतर को स्पष्ट न कर पाना।
Revision tips
- प्रत्येक प्रश्न के उत्तर को समझने के लिए समाधान में दिए गए कारणों पर ध्यान केंद्रित करें।
- जानवरों को पालतू बनाने और कृषि के विकास से संबंधित मुख्य बिंदुओं को नोट करें।
- चताल ह्यूक और मेहरगढ़ जैसी पुरातात्विक स्थलों के बारे में जानकारी को याद करें।
- प्रारंभिक मानव जीवन की विभिन्न गतिविधियों और उनके महत्व की सूची बनाएं।
Practice MCQs
Q1. सबसे पहले कुत्तों को पालतू क्यों बनाया गया?
Explanation: कुत्तों की सूंघने की क्षमता तेज होती है, वे खतरे की सूचना दे सकते थे और शिकार में भी मदद करते थे, इसलिए उन्हें सबसे पहले पालतू बनाया गया।
Q2. शिकारी-संग्रहकर्ता बर्तन क्यों नहीं बनाते थे?
Explanation: शिकारी-संग्रहकर्ता घुमंतू जीवन जीते थे और भोजन का बहुत अधिक संग्रह नहीं करते थे, इसलिए उन्हें बर्तनों की आवश्यकता महसूस नहीं होती थी।
Q3. जानवरों की खाल का उपयोग किस लिए होता था?
Explanation: जानवरों की खाल का उपयोग मुख्य रूप से चमड़ा बनाने के लिए किया जाता था, जिसका उपयोग विभिन्न वस्तुओं के निर्माण में होता था।
Q4. चताल ह्यूक नामक नवपाषाण युग का प्रसिद्ध पुरास्थल किस देश में है?
Explanation: चताल ह्यूक, जो नवपाषाण युग के सबसे प्रसिद्ध पुरास्थलों में से एक है, तुर्की में स्थित है।
Q5. मेहरगढ़ के लोग पहले मुख्य रूप से क्या करते थे?
Explanation: पुरातत्त्वविदों का मानना है कि मेहरगढ़ के लोग शुरू में मुख्य रूप से शिकार करते थे और बाद में पशुपालन उनके लिए अधिक महत्वपूर्ण हो गया।
Frequently asked questions
कक्षा 6 के इतिहास के अध्याय 3 "भोजन: संग्रह से उत्पादन तक" में मुख्य रूप से क्या सिखाया गया है?
यह अध्याय प्रारंभिक मानव के जीवन में हुए बड़े बदलावों पर केंद्रित है, जिसमें शिकार और भोजन संग्रह से कृषि और पशुपालन की ओर संक्रमण शामिल है। यह जानवरों को पालतू बनाने, औजारों के विकास और प्रारंभिक बस्तियों के बारे में भी बताता है।
जानवरों को पालतू बनाने के क्या कारण थे?
जानवरों को पालतू बनाने के मुख्य कारणों में भोजन (मांस, दूध), सुरक्षा (खतरे की सूचना), सामान ढोने और चमड़ा व अन्य सामग्री प्राप्त करना शामिल था।
कृषि का विकास मानव जीवन के लिए क्यों महत्वपूर्ण था?
कृषि के विकास से मानव को एक स्थान पर रहकर भोजन प्राप्त करने की सुविधा मिली, जिससे स्थायी बस्तियों का निर्माण हुआ और जनसंख्या वृद्धि को बढ़ावा मिला। इसने जीवन को अधिक स्थिर और व्यवस्थित बनाया।
चताल ह्यूक और मेहरगढ़ जैसी जगहों का क्या महत्व है?
चताल ह्यूक और मेहरगढ़ जैसी पुरातात्विक स्थल हमें प्रारंभिक मानव समाजों की जीवन शैली, उनके द्वारा उपयोग किए जाने वाले औजारों, कृषि पद्धतियों और व्यापार के बारे में महत्वपूर्ण जानकारी प्रदान करते हैं।
क्या ये समाधान परीक्षा की तैयारी में मदद करेंगे?
हाँ, ये समाधान प्रत्येक प्रश्न के विस्तृत उत्तर प्रदान करते हैं, जिससे छात्रों को अवधारणाओं को समझने और परीक्षा में पूछे जाने वाले प्रश्नों के उत्तर देने में मदद मिलेगी।
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