CBSE Class 12 Sanskrit Core NCERT Solutions: Chapter 4 दूरदृष्टिः फलप्रदा
This section provides detailed NCERT Solutions for Class 12 Sanskrit (Core) Chapter 4, 'दूरदृष्टिः फलप्रदा'. The chapter focuses on the importance of foresight and planning, illustrated through a narrative involving different groups of fish and fishermen. The solutions cover exercises that test comprehension of the story, identification of pronouns and their antecedents, and understanding who said what to whom. Students will learn to analyze the consequences of actions and the value of timely decisions. These solutions are designed to help students grasp the nuances of the Sanskrit language and the moral lessons embedded in the text, aiding in their exam preparation.
Quick info
| Board | CBSE |
|---|---|
| Class | Class 12 |
| Subject | संस्कृत कोर |
| Session | 2026 |
| Language | Hindi |
| Type | NCERT Solutions |
| Chapter | 4. दूरदृष्टिः फलप्रदा |
Chapter summary
Chapter 4, 'दूरदृष्टिः फलप्रदा' (Foresight is Fruitful), in the CBSE Class 12 Sanskrit Core syllabus, emphasizes the significance of foresight. The NCERT Solutions provided here cover exercises related to a story about fish in a pond and the threat posed by fishermen. The solutions help students understand pronoun references, identify speakers of dialogues, and comprehend the narrative's core message about the benefits of planning ahead and the dangers of inaction. This chapter is crucial for developing reading comprehension and analytical skills in Sanskrit.
Learning outcomes
- Understand the concept of foresight ('दूरदृष्टिः') and its importance.
- Analyze the narrative of the fish and fishermen to grasp the consequences of actions.
- Identify and explain the usage of pronouns in Sanskrit sentences.
- Determine the speaker and listener of dialogues within the text.
- Appreciate the moral lesson about planning for the future.
Topics covered
Paper topics
- दूरदृष्टिः (Foresight)
- कार्य-कारण संबंध (Cause and Effect)
- निर्णय लेना (Decision Making)
- संस्कृत सर्वनाम पद (Sanskrit Pronouns)
- संवाद विश्लेषण (Dialogue Analysis)
- नैतिक शिक्षा (Moral Education)
- मछुआरे और मछलियों की कहानी (Story of Fishermen and Fish)
Important topics
- दूरदृष्टि का महत्व
- सर्वनाम पदों का प्रयोग
- संवादों को समझना
- कहानी का नैतिक सार
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Questions and Solutions
प्रश्न 1
भासवर्गः कालिदासवर्गः
- (क) जलाशये कति मत्स्याः प्रतिवसन्ति स्म?
- (ख) प्रभातसमये के आगत्य मत्स्यविनाशं करिष्यन्ति?
- (ग) क्षारं जलं के पिबन्ति?
- (घ) यद्भविष्यः कीदृशं सरः त्यकुं न इच्छति?
- (ङ) कः आसीत् बहुमत्स्यः?
- (च) सुरक्षितः कथं विनश्यतिः?
- (छ) कुत्र विसर्जितः अनाथः अपि जीवति?
- (ज) यः मत्स्यः जलाशयं न त्यजति, तस्य नाम किम्?
- (झ) हृदः कैः निर्मत्स्यतां नीतः?
- (ञ) मत्स्यजीविनः जालैः कस्य आलोडनं कृतवन्तः?
उत्तरम्- (पहला प्रश्न कालिदासवर्ग की ओर से पूछा जाता है तथा उत्तर भासवर्ग की ओर से दिया जाता है, फिर यह क्रम बदलकर बारी-बारी से चलता है।)
कालिदासवर्गः भासवर्गः
- (ख) मत्स्यजीविनः (क) त्रय:
- (घ) पितृपैतामहिक (ग) मत्स्याः
- (च) दैवहतः (ङ) हृदः
- (ज) यद्भविष्यः (छ) वने
- (ञ) जलाशयस्य (झ) मत्स्यजीविभिः
इस प्रश्न में कक्षा के छात्रों को दो वर्गों में विभाजित किया गया है: कालिदास वर्ग और भास वर्ग। इन वर्गों के बीच एक प्रश्नोत्तर की प्रणाली स्थापित की गई है। इसके अनुसार, कालिदास वर्ग द्वारा पूछे गए प्रश्नों का उत्तर भास वर्ग देगा, और भास वर्ग द्वारा पूछे गए प्रश्नों का उत्तर कालिदास वर्ग देगा। यह व्यवस्था बारी-बारी से चलती है।
प्रश्नों और उनके उत्तरों का मिलान इस प्रकार है:
- (क) जलाशये कति मत्स्याः प्रतिवसन्ति स्म? (जलाशय में कितने मछलियाँ रहती थीं?) - उत्तर: (क) त्रय: (तीन) - यह उत्तर भास वर्ग द्वारा कालिदास वर्ग के प्रश्न का है।
- (ख) प्रभातसमये के आगत्य मत्स्यविनाशं करिष्यन्ति? (प्रभात के समय कौन आकर मछलियों का विनाश करेंगे?) - उत्तर: (ख) मत्स्यजीविनः (मछुआरे) - यह उत्तर कालिदास वर्ग द्वारा भास वर्ग के प्रश्न का है।
- (ग) क्षारं जलं के पिबन्ति? (खारा जल कौन पीते हैं?) - उत्तर: (ग) मत्स्याः (मछलियाँ) - यह उत्तर भास वर्ग द्वारा कालिदास वर्ग के प्रश्न का है।
- (घ) यद्भविष्यः कीदृशं सरः त्यकुं न इच्छति? (यद्भविष्य किस प्रकार के तालाब को छोड़ना नहीं चाहता?) - उत्तर: (घ) पितृपैतामहिक (पिता-दादा का) - यह उत्तर कालिदास वर्ग द्वारा भास वर्ग के प्रश्न का है।
- (ङ) कः आसीत् बहुमत्स्यः? (कौन सा तालाब बहुत मछलियों वाला था?) - उत्तर: (ङ) हृदः (तालाब) - यह उत्तर भास वर्ग द्वारा कालिदास वर्ग के प्रश्न का है।
- (च) सुरक्षितः कथं विनश्यतिः? (सुरक्षित व्यक्ति कैसे नष्ट होता है?) - उत्तर: (च) दैवहतः (भाग्य से) - यह उत्तर कालिदास वर्ग द्वारा भास वर्ग के प्रश्न का है।
- (छ) कुत्र विसर्जितः अनाथः अपि जीवति? (कहाँ छोड़ी गई अनाथ भी जीवित रहती है?) - उत्तर: (छ) वने (वन में) - यह उत्तर भास वर्ग द्वारा कालिदास वर्ग के प्रश्न का है।
- (ज) यः मत्स्यः जलाशयं न त्यजति, तस्य नाम किम्? (जो मछली तालाब को नहीं छोड़ती, उसका नाम क्या है?) - उत्तर: (ज) यद्भविष्यः - यह उत्तर कालिदास वर्ग द्वारा भास वर्ग के प्रश्न का है।
- (झ) हृदः कैः निर्मत्स्यतां नीतः? (तालाब को किसके द्वारा मछलियों से रहित कर दिया गया?) - उत्तर: (झ) मत्स्यजीविभिः (मछियारों द्वारा) - यह उत्तर भास वर्ग द्वारा कालिदास वर्ग के प्रश्न का है।
- (ञ) मत्स्यजीविनः जालैः कस्य आलोडनं कृतवन्तः? (मछियारों ने जालों से किसका आलोडन (मंथन/खोज) किया?) - उत्तर: (ञ) जलाशयस्य (तालाब का) - यह उत्तर कालिदास वर्ग द्वारा भास वर्ग के प्रश्न का है।
प्रश्न 2
- अस्माभिः कदाचिदिप अयं ह्नदः न अन्वेषितः। .....
- प्रत्युत्पन्नमतिः प्राह-अहो भवता सत्यम् उक्तम्। .....
- अहो श्रुतं भवद्भिः यत् मत्स्यजीविभिः कथितम्। .....
- मम अपि अभीष्टमेतत्। .....
- तस्य निश्चयं ज्ञात्वा अनागतविधाता प्रत्युत्पन्नमतिश्च ततः निष्क्रान्तौ। .....
इस प्रश्न में दिए गए वाक्यों में प्रयुक्त सर्वनाम पदों को पहचानना है और यह बताना है कि वे किसके लिए प्रयुक्त हुए हैं।
- अस्माभिः - यह सर्वनाम पद 'मत्स्यजीविभ्यः' (मछियारों के लिए) के स्थान पर प्रयुक्त हुआ है। यहाँ वक्ता (संभवतः कोई मछली) मछुआरों के संदर्भ में कह रहा है कि उन्होंने कभी इस तालाब को नहीं खोजा।
- भवता - यह सर्वनाम पद 'अनागतविधात्रा' (अनागतविधाता के लिए) के स्थान पर प्रयुक्त हुआ है। प्रत्युत्पन्नमतिः यह बात अनागतविधाता से कह रहा है।
- भवद्भिः - यह सर्वनाम पद 'मत्स्यैः' (मछलियों के लिए) के स्थान पर प्रयुक्त हुआ है। यहाँ वक्ता (संभवतः प्रत्युत्पन्नमतिः या अनागतविधाता) मछलियों को संबोधित कर रहा है कि उन्होंने मछुआरों द्वारा कही गई बात सुनी है।
- मम - यह सर्वनाम पद 'प्रत्युत्पन्नमतेः' (प्रत्युत्पन्नमति के लिए) के स्थान पर प्रयुक्त हुआ है। यह प्रत्युत्पन्नमति का अपना कथन है, जहाँ वह अपनी इच्छा व्यक्त कर रहा है।
- तस्य - यह सर्वनाम पद 'यद्भविष्यस्य' (यद्भविष्य के लिए) के स्थान पर प्रयुक्त हुआ है। यहाँ वक्ता (संभवतः अनागतविधाता या प्रत्युत्पन्नमतिः) यद्भविष्य के निश्चय का उल्लेख कर रहा है।
प्रश्न 3
केन? कं प्रति?
- (क) अहो! बहुमत्स्योऽयं ह्रदः।
- (ख) तद् रात्रावपि गम्यतां निकटं सरः।
- (ग) ममापि अभीष्टमेतत्। तदन्यत्र गम्यताम् इति।
- (घ) अरक्षितं तिष्ठति दैवरक्षितम्।
- (ङ) तन्न युक्तं साम्प्रतं क्षणमप्यत्र अवस्थातुम्।
इस प्रश्न में दिए गए कथनों (उक्तियों) को किसने कहा है और किसके प्रति कहा है, यह बताना है।
केन? कं प्रति?
- (क) अहो! बहुमत्स्योऽयं ह्रदः। (अरे! यह तालाब मछलियों से भरा है।) - यह उक्ति मत्स्यजीविभिः (मछियारों ने) परस्परम् (आपस में) कही।
- (ख) तद् रात्रावपि गम्यतां निकटं सरः। (तो रात में ही निकट के तालाब में चल देना चाहिए।) - यह उक्ति अनागतविधात्रा (अनागतविधाता ने) सर्वान् मत्स्यान् प्रति (सभी मछलियों के प्रति) कही।
- (ग) ममापि अभीष्टमेतत्। तदन्यत्र गम्यताम् इति। (मेरी भी यही इच्छा है। तो कहीं और चल देना चाहिए।) - यह उक्ति यद्भविष्यः (यद्भविष्य ने) अनागतविधात्रां प्रत्युत्पन्नमतिं प्रति (अनागतविधाता और प्रत्युत्पन्नमति के प्रति) कही।
- (घ) अरक्षितं तिष्ठति दैवरक्षितम्। (जो सुरक्षित नहीं है, वह भाग्य से भी सुरक्षित रहता है - अर्थात भाग्य भी उसकी रक्षा नहीं करता।) - यह उक्ति अनागतविधात्रा (अनागतविधाता ने) यद्भविष्यं प्रति (यद्भविष्य के प्रति) कही।
- (ङ) तन्न युक्तं साम्प्रतं क्षणमप्यत्र अवस्थातुम्। (अब यहाँ एक क्षण भी रुकना उचित नहीं है।) - यह उक्ति प्रत्युत्पन्नमतिः (प्रत्युत्पन्नमति ने) यद्भविष्यं प्रति (यद्भविष्य के प्रति) कही।
Common mistakes
- Misinterpreting pronoun references.
- Incorrectly identifying the speaker or listener in dialogues.
- Failing to grasp the central theme of foresight from the story.
Revision tips
- Read the story carefully to understand the plot and characters.
- Pay close attention to the exercises on pronouns and dialogues.
- Summarize the moral of the story in your own words.
- Practice identifying the antecedents of pronouns in different sentences.
Practice MCQs
Q1. कक्षा में छात्रों को किन दो वर्गों में विभाजित किया गया था?
Explanation: पाठ के अनुसार, छात्रों को कालिदास वर्ग और भास वर्ग में विभाजित किया गया था, जहाँ वे एक-दूसरे के प्रश्नों का उत्तर देते थे।
Q2. मत्स्यजीवियों के आने पर कौन से वर्ग के प्रश्न का उत्तर दूसरे वर्ग द्वारा दिया जाता था?
Explanation: व्यवस्था ऐसी थी कि कालिदास वर्ग के प्रश्नों का उत्तर भास वर्ग देता था, और भास वर्ग के प्रश्नों का उत्तर कालिदास वर्ग देता था, बारी-बारी से।
Q3. अनागतविधाता ने मछुआरों के बारे में सुनकर क्या निर्णय लिया?
Explanation: अनागतविधाता ने खतरे को भांपकर तुरंत उस जलाशय को छोड़ने का निर्णय लिया, क्योंकि वह भविष्य के खतरों से अवगत था।
Q4. वाक्य 'अहो भवता सत्यम् उक्तम्' में 'भवता' सर्वनाम पद किसके लिए प्रयुक्त हुआ है?
Explanation: इस वाक्य में 'भवता' सर्वनाम पद 'अनागतविधाता' के लिए प्रयुक्त हुआ है, जिसे प्रत्युत्पन्नमति संबोधित कर रहा है।
Q5. 'अरक्षितं तिष्ठति दैवरक्षितम्' यह उक्ति किसने और किसके प्रति कही?
Explanation: यह उक्ति अनागतविधाता ने यद्भविष्यः के प्रति कही थी, यह समझाने के लिए कि जो अपनी रक्षा स्वयं नहीं करता, उसका भाग्य भी उसे नहीं बचाता।
Frequently asked questions
यह पाठ 'दूरदृष्टिः फलप्रदा' किस बारे में है?
यह पाठ दूरदृष्टि यानी भविष्य के बारे में सोचकर योजना बनाने के महत्व को बताता है। यह एक कहानी के माध्यम से सिखाता है कि जो आगे की सोचते हैं, वे सुरक्षित रहते हैं।
इस पाठ के समाधान छात्रों की मदद कैसे करेंगे?
ये समाधान छात्रों को पाठ की कहानी को बेहतर ढंग से समझने, संस्कृत सर्वनामों की पहचान करने और संवादों के संदर्भ को समझने में मदद करेंगे, जिससे उनकी परीक्षा की तैयारी मजबूत होगी।
पाठ में 'अनागतविधाता', 'प्रत्युत्पन्नमतिः' और 'यद्भविष्यः' कौन हैं?
ये तीन मछलियों के नाम हैं। अनागतविधाता वह है जो भविष्य के खतरे को जानता है, प्रत्युत्पन्नमतिः वह है जो तुरंत उपाय सोचता है, और यद्भविष्यः वह है जो केवल भाग्य पर निर्भर रहता है।
सर्वनाम पदों को पहचानने का अभ्यास क्यों महत्वपूर्ण है?
संस्कृत में सर्वनाम पदों को सही ढंग से पहचानने से वाक्य का अर्थ स्पष्ट होता है और यह समझने में मदद मिलती है कि कौन किसके बारे में बात कर रहा है, जो परीक्षा के लिए आवश्यक है।
क्या इस पाठ से कोई नैतिक शिक्षा मिलती है?
हाँ, इस पाठ से मुख्य नैतिक शिक्षा यह मिलती है कि हमें हमेशा भविष्य के प्रति सचेत रहना चाहिए और आने वाले खतरों से बचने के लिए समय पर योजना बनानी चाहिए।
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