कक्षा 12 हिंदी: पहलवान की ढोलक NCERT समाधान
यह खंड कक्षा 12 हिंदी की पुस्तक 'पहलवान की ढोलक' के लिए विस्तृत समाधान प्रस्तुत करता है। यह कहानी व्यवस्था परिवर्तन के साथ लोक-कला और कलाकारों के अप्रासंगिक हो जाने की मार्मिक व्यथा को दर्शाती है। जब पुराने राजा की जगह नया राजकुमार आता है, तो यह केवल सत्ता का परिवर्तन नहीं होता, बल्कि पुरानी व्यवस्था का पूरी तरह उलट जाना और सभ्यता के नाम पर एक नई व्यवस्था का आरोपित होना भी होता है। यह 'भारत' पर 'इंडिया' के हावी होने की समस्या को उजागर करता है, जो लुट्टन पहलवान जैसे लोक-कलाकार को हाशिए पर धकेल देता है। ऐसी परिस्थितियों में, गाँव की गरीबी पहलवानी जैसे शौक को बनाए रखना कठिन बना देती है। फिर भी, पहलवान लुट्टन ढोल की थाप में न केवल स्वयं को जीवित रखता है, बल्कि भूख और महामारी से जूझ रहे गाँव को मौत से लड़ने की प्रेरणा भी देता है। कहानी के अंत में, भूख और महामारी के रूप में आई मौत का षड्यंत्र लुट्टन की पहलवानी को समाप्त कर देता है, जिससे कई प्रश्न उठते हैं। ये समाधान छात्रों को कहानी के पात्रों, कथानक और गहरे अर्थों को समझने में मदद करते हैं, जो परीक्षा की तैयारी के लिए महत्वपूर्ण हैं।
Quick info
| Board | CBSE |
|---|---|
| Class | Class 12 |
| Subject | हिंदी |
| Session | 2026 |
| Language | Hindi |
| Type | NCERT Solutions |
| Chapter | 14. पहलवान की ढोलक |
Chapter summary
कक्षा 12 हिंदी की पुस्तक 'पहलवान की ढोलक' के ये NCERT समाधान व्यवस्था परिवर्तन के दौर में लोक-कला और कलाकारों के संघर्ष पर केंद्रित हैं। समाधान कहानी के मुख्य पात्र लुट्टन पहलवान के जीवन, उसकी कला और उसके सामने आई चुनौतियों का विश्लेषण करते हैं। यह पाठ व्यवस्था के बदलने पर कला की प्रासंगिकता और उसके स्वतंत्र मूल्य पर भी प्रश्न उठाता है। समाधान छात्रों को कहानी के सारांश, पात्रों के चरित्र-चित्रण और निहित संदेशों को समझने में सहायता करते हैं, जो परीक्षा की तैयारी के लिए आवश्यक हैं।
Learning outcomes
- व्यवस्था परिवर्तन के समाज और कला पर पड़ने वाले प्रभावों को समझना।
- लुट्टन पहलवान के चरित्र और उसके संघर्षों का विश्लेषण करना।
- लोक-कलाओं के महत्व और उनकी प्रासंगिकता पर विचार करना।
- कहानी में निहित सामाजिक और सांस्कृतिक संदेशों को पहचानना।
- लेखक फणीश्वर नाथ 'रेणु' की आंचलिक लेखन शैली से परिचित होना।
Topics covered
Paper topics
- व्यवस्था परिवर्तन और लोक-कला
- लुट्टन पहलवान का चरित्र-चित्रण
- ढोलक का प्रतीकात्मक महत्व
- सामाजिक और सांस्कृतिक संघर्ष
- फणीश्वर नाथ 'रेणु' का जीवन और साहित्य
- आंचलिकता और लोक-जीवन
- कहानी का सारांश
- कहानी का प्रतिपाद्य
Important topics
- व्यवस्था परिवर्तन का लोक-कलाकारों पर प्रभाव
- लुट्टन पहलवान का संघर्ष और उसकी ढोलक
- कहानी का केंद्रीय भाव और संदेश
- फणीश्वर नाथ 'रेणु' की लेखन शैली
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Questions and Solutions
प्रश्न 1
सर्दी की रात में, जब मलेरिया और हैजे का प्रकोप गाँव में फैला हुआ था, वातावरण अत्यंत भयावह और निस्तब्ध था। अमावस्या की ठंडी रात में केवल आकाश के तारे ही प्रकाश का स्रोत थे। सियारों और उल्लुओं की डरावनी आवाजें कभी-कभी इस सन्नाटे को भंग कर देती थीं। किसी झोपड़ी से कराहने, कै करने या बच्चों के रोने की आवाजें सुनाई देती थीं। ठंड के कारण कुत्ते राख के ढेर पर दुबके पड़े रहते थे। शाम से लेकर सुबह तक, पूरा गाँव मानो मौत की चादर ओढ़े हुए था, जहाँ केवल मृत्यु का सन्नाटा और पीड़ा का क्रंदन ही सुनाई देता था।
प्रश्न 2
लुट्टन पहलवान जब केवल नौ वर्ष का था, तभी उसकी माँ का देहांत हो गया था। माँ के देहांत के बाद, लुट्टन का पालन-पोषण उसकी विधवा सास ने किया। उसकी सास ने ही उसे पाला-पोसा और उसकी देखभाल की, जबकि वह स्वयं गाय चराता, दूध पीता और कसरत करता था।
प्रश्न 3
गाँव के लोग लुट्टन की सास को इसलिए तंग करते थे क्योंकि लुट्टन एक पहलवान था और वह अपनी माँ के साथ होने वाले दुर्व्यवहार का बदला लेना चाहता था। संभवतः वे लुट्टन की माँ के प्रति ईर्ष्या या द्वेष रखते थे, और लुट्टन के पहलवान बनने के बाद भी वे उसे और उसकी सास को परेशान करते रहते थे, शायद उसकी बढ़ती प्रसिद्धि या शक्ति से जलते हुए।
प्रश्न 4
श्यामनगर मेले में, लुट्टन पहलवान ने 'शेर के बच्चे' के नाम से प्रसिद्ध चाँद सिंह पहलवान को चुनौती दी। लुट्टन ने यह चुनौती इसलिए दी क्योंकि वह चाँद सिंह की कुश्ती और दाँव-पेंच देखकर बहुत प्रभावित हुआ था और अपनी शक्ति तथा कौशल का प्रदर्शन करना चाहता था। चाँद सिंह अपनी श्रेष्ठता साबित करने के लिए बीच-बीच में दहाड़ता फिरता था, और लुट्टन ने उसे सीधे मुकाबले के लिए ललकारा।
प्रश्न 5
'शेर के बच्चे' के नाम से प्रसिद्ध पहलवान का असली नाम चाँद सिंह था। वह प्रसिद्ध पहलवान बादल सिंह का शिष्य था। चाँद सिंह अपनी कुश्ती की कला और शक्ति के लिए जाना जाता था और उसने कई पहलवानों को हराया था।
प्रश्न 6
राजा साहब लुट्टन की कुश्ती की कला और उसकी असाधारण प्रतिभा से प्रभावित थे। वे उसे अपनी शिकार-प्रियता और दंगल के प्रति रुचि के कारण दरबार में रखना चाहते थे। राजा साहब लुट्टन की शक्ति और कौशल को देखकर उसे अपने संरक्षण में लेना चाहते थे, संभवतः उसे अपने दंगल का हिस्सा बनाने या अपनी मनोरंजन मंडली में शामिल करने के उद्देश्य से।
प्रश्न 7
लुट्टन ने राजा साहब की आज्ञा का उल्लंघन कर चाँद सिंह से लड़ने की इजाजत इसलिए माँगी क्योंकि वह अपनी पहलवानी का जौहर दिखाना चाहता था और अपनी क्षमता को साबित करना चाहता था। राजा साहब ने उसे कुश्ती से हटने को कहा था, लेकिन लुट्टन के लिए यह केवल एक खेल नहीं था, बल्कि उसकी पहचान और आत्म-सम्मान का प्रश्न था। उसने दृढ़ता से कहा कि यदि उसे लड़ने की इजाजत नहीं मिली तो वह पत्थर पर माथा पटक कर मर जाएगा, जो उसकी अटूट इच्छाशक्ति और कला के प्रति समर्पण को दर्शाता है।
प्रश्न 8
जब लुट्टन ने 'शेर के बच्चे' यानी चाँद सिंह को चुनौती दी, तो दर्शक उसे पागल समझ रहे थे। वे यह देखकर हैरान थे कि एक नौजवान पहलवान, जो अभी किशोरावस्था में ही था, इतने अनुभवी और खूंखार पहलवान को चुनौती दे रहा है। उसकी इस साहसिकता पर दर्शकों में आश्चर्य और उत्सुकता का भाव था, और वे उसकी कुश्ती देखने के लिए अधीर हो रहे थे।
प्रश्न 9
व्यवस्था परिवर्तन के बाद, जब राजा साहब की जगह नए राजकुमार ने ली, तो लुट्टन पहलवान की स्थिति पर गहरा नकारात्मक प्रभाव पड़ा। नए राजकुमार को पुरानी व्यवस्था और उसके कलाकारों में कोई रुचि नहीं थी। नतीजतन, लुट्टन पहलवान, जो कभी राजा के दरबार का सम्मानित पहलवान था, अब उपेक्षित हो गया। उसकी कला, जो कभी मनोरंजन और सम्मान का स्रोत थी, अब अप्रासंगिक हो गई। उसे पेट भरने के लिए भी संघर्ष करना पड़ा, और उसकी कला का मूल्य समाप्त हो गया। यह परिवर्तन 'भारत' पर 'इंडिया' के हावी होने का प्रतीक था, जहाँ पुरानी लोक-कलाओं को नई सभ्यता के नाम पर भुला दिया गया।
प्रश्न 10
भले ही गाँव मलेरिया और हैजे की महामारी से जूझ रहा था और मौत का सन्नाटा पसरा हुआ था, लुट्टन पहलवान अपनी ढोलक की आवाज़ से गाँव वालों में संजीवनी शक्ति भरता था। ढोलक की लय और संगीत मृतप्राय गाँव में जीवन का संचार करता था। यह आवाज़ लोगों को निराशा और मृत्यु के भय से लड़ने की प्रेरणा देती थी, और उन्हें जीवित रहने का साहस प्रदान करती थी।
प्रश्न 11
कहानी के अंत में, भूख और महामारी को एक अजेय षड्यंत्र के रूप में चित्रित किया गया है, जो लुट्टन पहलवान की पूरी तरह से विकसित पहलवानी को भी समाप्त कर देता है। इन्हें मौत के भयानक रूप में दिखाया गया है, जो न केवल शारीरिक रूप से कमजोर करती है बल्कि कला और जीवन के उत्साह को भी खत्म कर देती है। यह दर्शाया गया है कि किस प्रकार ये प्राकृतिक और सामाजिक विपत्तियाँ एक शक्तिशाली पहलवान को भी परास्त कर सकती हैं, और उसकी कला को भी व्यर्थ बना सकती हैं।
प्रश्न 12
'पहलवान की ढोलक' कहानी यह मार्मिक सत्य उजागर करती है कि जब व्यवस्था बदलती है, तो अक्सर लोक-कला और इसके कलाकारों का महत्व कम हो जाता है और वे अप्रासंगिक हो जाते हैं। पुरानी व्यवस्था के संरक्षक (जैसे राजा साहब) के स्थान पर नई व्यवस्था के प्रतिनिधि (जैसे राजकुमार) के आने से कला और कलाकारों की उपेक्षा होती है। यह कहानी दर्शाती है कि कैसे 'भारत' (पुरानी व्यवस्था, लोक-कला) पर 'इंडिया' (नई व्यवस्था, आधुनिकता) के हावी होने की प्रक्रिया में लुट्टन जैसे लोक-कलाकार हाशिए पर धकेल दिए जाते हैं और उनकी कला का मूल्य समाप्त हो जाता है।
प्रश्न 13
कहानी के अंत में, लुट्टन पहलवान की करुण मृत्यु और उसकी कला की विडंबनापूर्ण समाप्ति के बाद, वह हमारे सामने कई महत्वपूर्ण सवाल छोड़ जाता है। वह यह सवाल छोड़ जाता है कि क्या यह पतन पुरानी व्यवस्था की विफलता थी या नई व्यवस्था की क्रूरता? क्या कला का मूल्य केवल व्यवस्था पर निर्भर करता है, या उसका अपना कोई स्वतंत्र अस्तित्व भी है? इसके अतिरिक्त, वह यह भी प्रश्न छोड़ जाता है कि मनुष्यता की साधना और जीवन के सौंदर्य को बनाए रखने के लिए लोक-कलाओं को प्रासंगिक बनाए रखने में हमारी क्या भूमिका होनी चाहिए।
Common mistakes
- कहानी के अंतर्निहित सामाजिक और राजनीतिक व्यंग्य को समझने में चूकना।
- लुट्टन पहलवान के चरित्र की जटिलताओं को सतही तौर पर देखना।
- व्यवस्था परिवर्तन के प्रभाव को केवल व्यक्तिगत स्तर पर समझना, न कि व्यापक सामाजिक स्तर पर।
- लोक-कलाओं के महत्व को कम आंकना या केवल मनोरंजन का साधन समझना।
Revision tips
- कहानी के मुख्य पात्र लुट्टन पहलवान के जीवन के उतार-चढ़ाव पर ध्यान केंद्रित करें।
- व्यवस्था परिवर्तन के संदर्भ में कहानी के संदेश को समझने का प्रयास करें।
- ढोलक की आवाज़ के प्रतीकात्मक अर्थ पर विचार करें।
- लेखक फणीश्वर नाथ 'रेणु' की भाषा-शैली और आंचलिकता की विशेषताओं को याद करें।
Practice MCQs
Q1. सर्दी की रात में गाँव में किसका प्रकोप था?
Explanation: कहानी के अनुसार, सर्दी की ठंडी रात में गाँव में मलेरिया और हैजे जैसी भयंकर बीमारियों का प्रकोप फैला हुआ था, जिससे जनजीवन अस्त-व्यस्त था।
Q2. लुट्टन पहलवान को किसने पाला था?
Explanation: लुट्टन पहलवान नौ वर्ष की आयु में अनाथ हो गया था, और उसकी शादी हो चुकी थी। उसकी विधवा सास ने ही उसे पाला और उसका पालन-पोषण किया।
Q3. श्यामनगर मेले में लुट्टन ने किसे चुनौती दी थी?
Explanation: श्यामनगर मेले में दंगल देखने के दौरान, लुट्टन पहलवान ने 'शेर के बच्चे' के नाम से प्रसिद्ध चाँद सिंह को चुनौती दी थी, जो अपनी बहादुरी के लिए जाना जाता था।
Q4. राजा साहब की जगह किसने ली?
Explanation: कहानी में बताया गया है कि राजा साहब की जगह एक नए राजकुमार ने ली, जो व्यवस्था परिवर्तन का प्रतीक था और जिसने पुरानी व्यवस्था को पूरी तरह बदल दिया।
Q5. लुट्टन पहलवान की ढोलक किस स्थिति में बजती रहती थी?
Explanation: भले ही गाँव में मलेरिया और हैजे का प्रकोप था और रातें भयानक थीं, लुट्टन पहलवान की ढोलक संध्या से लेकर सुबह तक लगातार बजती रहती थी, जो गाँव वालों में जीवन का संचार करती थी।
Frequently asked questions
'पहलवान की ढोलक' कहानी किस बारे में है?
'पहलवान की ढोलक' कहानी व्यवस्था परिवर्तन के साथ लोक-कला और इसके कलाकारों के अप्रासंगिक हो जाने की व्यथा को दर्शाती है। यह लुट्टन पहलवान के जीवन और उसकी ढोलक के माध्यम से गाँव को जीवित रखने के उसके प्रयासों पर केंद्रित है।
लुट्टन पहलवान की ढोलक का क्या महत्व है?
लुट्टन पहलवान की ढोलक केवल संगीत का साधन नहीं है, बल्कि यह मृतप्राय गाँव में संजीवनी शक्ति भरने का काम करती है। यह भूख और महामारी से जूझ रहे लोगों को मौत से लड़ने की ताकत और प्रेरणा देती है।
कहानी में 'भारत' पर 'इंडिया' के छा जाने से क्या तात्पर्य है?
इसका तात्पर्य है कि पुरानी, पारंपरिक व्यवस्था (भारत) पर आधुनिक, शहरी व्यवस्था (इंडिया) का हावी हो जाना। यह बदलाव अक्सर लोक-कलाओं और कलाकारों को हाशिए पर धकेल देता है, जैसा लुट्टन पहलवान के साथ हुआ।
फणीश्वर नाथ 'रेणु' की साहित्यिक विशेषताएँ क्या हैं?
फणीश्वर नाथ 'रेणु' आंचलिक साहित्यकार के रूप में प्रसिद्ध हैं। उनकी भाषा आम बोलचाल की है, जिसमें मिश्रित शब्दावली, चित्रात्मकता और भाव-प्रवाह का सुंदर प्रयोग मिलता है। उन्होंने गाँव के लोक-जीवन और समस्याओं को अपनी रचनाओं में प्रमुखता दी।
यह NCERT समाधान छात्रों की परीक्षा की तैयारी में कैसे मदद करेंगे?
ये समाधान कहानी के सारांश, पात्रों के विश्लेषण, मुख्य संदेशों और लेखक की शैली को स्पष्ट करते हैं, जिससे छात्रों को परीक्षा में पूछे जाने वाले प्रश्नों के उत्तर देने में मदद मिलेगी।
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