CBSE Class 12 समाजशास्त्र NCERT Solutions: Chapter 2 - भारतीय समाज की जनसांख्यिकीय संरचना

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यह खंड कक्षा 12 समाजशास्त्र के लिए NCERT समाधान प्रस्तुत करता है, विशेष रूप से अध्याय 2: भारतीय समाज की जनसांख्यिकीय संरचना पर केंद्रित है। यह अध्याय जनसंख्या वृद्धि, जनसांख्यिकीय संक्रमण के सिद्धांत और भारत की जनसंख्या को आकार देने वाले प्रमुख कारकों की पड़ताल करता है। समाधानों में माल्थस के जनसंख्या सिद्धांत, जन्म दर और मृत्यु दर की अवधारणाओं और संक्रमण काल के दौरान जनसंख्या विस्फोट के कारणों का विस्तृत विवरण शामिल है। यह खंड छात्रों को जनसंख्या की गतिशीलता को समझने और भारतीय समाज पर इसके प्रभाव का विश्लेषण करने में मदद करने के लिए स्पष्टीकरण और विस्तृत उत्तर प्रदान करता है। ये समाधान परीक्षा की तैयारी और विषय की गहन समझ के लिए एक मूल्यवान संसाधन के रूप में काम करते हैं।

Quick info

BoardCBSE
ClassClass 12
Subjectसमाजशास्त्र
Session2026
LanguageHindi
TypeNCERT Solutions
Chapter2. भारतीय समाज की जनसांख्यिकीय संरचना

Chapter summary

कक्षा 12 समाजशास्त्र के अध्याय 2, 'भारतीय समाज की जनसांख्यिकीय संरचना' के लिए ये NCERT समाधान जनसंख्या वृद्धि और जनसांख्यिकीय प्रवृत्तियों के अध्ययन पर ध्यान केंद्रित करते हैं। इसमें जनसांख्यिकीय संक्रमण के सिद्धांत की व्याख्या, माल्थस के जनसंख्या सिद्धांत की चर्चा और जन्म दर तथा मृत्यु दर के बीच अंतर को स्पष्ट किया गया है। समाधान छात्रों को इन अवधारणाओं को समझने और भारतीय समाज के जनसांख्यिकीय परिदृश्य को प्रभावित करने वाले कारकों का विश्लेषण करने में सहायता करते हैं।

Learning outcomes

  • जनसांख्यिकीय संक्रमण के सिद्धांत की बुनियादी तर्क को समझना।
  • जनसंख्या विस्फोट के कारणों की पहचान करना।
  • माल्थस के जनसंख्या सिद्धांत और अकाल/महामारी की भूमिका को समझना।
  • जन्म दर और मृत्यु दर की अवधारणाओं को परिभाषित करना।
  • जन्म दर में गिरावट की धीमी गति के कारणों का विश्लेषण करना।

Topics covered

Paper topics

  • जनसांख्यिकीय संक्रमण का सिद्धांत
  • जनसंख्या वृद्धि की अवस्थाएँ
  • माल्थस का जनसंख्या सिद्धांत
  • जन्म दर
  • मृत्यु दर
  • जनसंख्या विस्फोट
  • जनसांख्यिकीय संरचना
  • सामाजिक-सांस्कृतिक कारक
  • आर्थिक विकास

Important topics

  • जनसांख्यिकीय संक्रमण का सिद्धांत
  • जनसंख्या विस्फोट के कारण
  • माल्थस का जनसंख्या सिद्धांत
  • जन्म दर और मृत्यु दर की अवधारणाएँ
  • जन्म दर में धीमी गिरावट के कारण

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Questions and Solutions

प्रश्न 1

जनसांख्यिकीय संक्रमण के सिद्धांत के बुनियादी तर्क को स्पष्ट कीजिए। संक्रमण अवधि 'जनसंख्या विस्फोट' के साथ क्यों जुड़ी है?
Solution:

जनसांख्यिकीय संक्रमण का सिद्धांत यह बताता है कि जनसंख्या वृद्धि आर्थिक विकास के विभिन्न स्तरों से जुड़ी होती है। प्रत्येक समाज विकास के दौरान जनसंख्या वृद्धि के एक निश्चित स्वरूप का अनुसरण करता है। इस सिद्धांत के अनुसार, जनसंख्या वृद्धि की तीन मुख्य अवस्थाएँ होती हैं:

  1. प्रथम अवस्था (अल्प-विकसित देश): इस अवस्था में जन्म दर और मृत्यु दर दोनों ही उच्च होती हैं। जन्म दर उच्च इसलिए होती है क्योंकि लोग छोटे परिवार के लाभों से अनभिज्ञ होते हैं और प्रजनन क्षमता को बढ़ावा देते हैं। मृत्यु दर भी उच्च होती है क्योंकि स्वास्थ्य और चिकित्सा सुविधाएँ अपर्याप्त होती हैं। परिणामस्वरूप, जनसंख्या वृद्धि दर निम्न रहती है।
  2. द्वितीयक अवस्था (विकासशील देश): इस अवस्था में जन्म दर उच्च बनी रहती है, जबकि मृत्यु दर में गिरावट आने लगती है। इसका कारण स्वास्थ्य सेवाओं, पोषण और चिकित्सा सुविधाओं में सुधार है। जन्म दर उच्च रहने के पीछे सामाजिक-सांस्कृतिक कारण, जैसे अशिक्षा और पुरुष प्रधानता, हो सकते हैं। इस अवस्था में, मृत्यु दर की तुलना में जन्म दर अधिक होने के कारण जनसंख्या में तेजी से वृद्धि होती है, जिसे 'जनसंख्या विस्फोट' कहा जाता है।
  3. तृतीयक अवस्था (विकसित देश): इस अवस्था में जन्म दर और मृत्यु दर दोनों ही निम्न हो जाती हैं। जन्म दर कम होने के कारण शिक्षा, जागरूकता, गर्भनिरोधक उपायों का प्रयोग और शहरीकरण हैं। मृत्यु दर कम होने का कारण उन्नत स्वास्थ्य सेवाएँ और जीवन स्तर में सुधार है। परिणामस्वरूप, जनसंख्या वृद्धि दर बहुत कम हो जाती है या स्थिर हो जाती है।

जनसंख्या विस्फोट का कारण: संक्रमण की अवस्था (द्वितीयक अवस्था) में जनसंख्या विस्फोट होता है क्योंकि बेहतर स्वास्थ्य सुविधाओं, पोषण और आधुनिक चिकित्सा तकनीकों के कारण मृत्यु दर में तेजी से कमी आती है, जबकि जन्म दर अभी भी उच्च बनी रहती है। जन्म दर में गिरावट धीमी होती है क्योंकि यह सामाजिक, सांस्कृतिक और व्यक्तिगत मान्यताओं से अधिक प्रभावित होती है, जिनमें परिवर्तन आने में समय लगता है।

प्रश्न 2

माल्थस का यह विश्वास क्यों था कि अकाल और महामारी जैसी विनाशकारी घटनाएँ, जो बड़े पैमाने पर मृत्यु का कारण बनती हैं, अपरिहार्य हैं?
Solution:

अंग्रेज राजनीतिक अर्थशास्त्री थॉमस रॉबर्ट माल्थस का यह विश्वास था कि अकाल और महामारी जैसी विनाशकारी घटनाएँ अपरिहार्य हैं क्योंकि वे जनसंख्या और उपलब्ध संसाधनों के बीच संतुलन बनाए रखने के लिए आवश्यक हैं। माल्थस के अनुसार:

  • जनसंख्या ज्यामितीय अनुपात (जैसे 1, 2, 4, 8, 16...) में बढ़ती है।
  • जबकि जीवन-निर्वाह के साधन, विशेष रूप से खाद्य आपूर्ति, अंकगणितीय अनुपात (जैसे 1, 2, 3, 4, 5...) में बढ़ते हैं।

इस तीव्र जनसंख्या वृद्धि और सीमित संसाधनों के बीच एक असंतुलन पैदा होता है। माल्थस का तर्क था कि इस असंतुलन को दूर करने के लिए प्रकृति 'निरोध' (Checks) लागू करती है। इन निरोधों को दो श्रेणियों में बांटा गया है:

  • निवारक निरोध (Preventive Checks): ये वे उपाय हैं जो जन्म दर को कम करते हैं, जैसे विवाह में देरी, संयम आदि। माल्थस के अनुसार, ये अक्सर प्रभावी नहीं होते।
  • विनाशकारी निरोध (Positive Checks): ये वे घटनाएँ हैं जो मृत्यु दर को बढ़ाती हैं, जैसे अकाल, महामारी, युद्ध, और प्राकृतिक आपदाएँ। माल्थस का मानना था कि जब निवारक निरोध जनसंख्या वृद्धि को पर्याप्त रूप से नियंत्रित नहीं कर पाते, तो विनाशकारी निरोध जनसंख्या को संसाधनों के स्तर तक लाने के लिए आवश्यक हो जाते हैं। इसलिए, उनके अनुसार, ये घटनाएँ जनसंख्या और आजीविका के बीच संतुलन स्थापित करने का एक प्राकृतिक और अनिवार्य तरीका हैं, भले ही वे कष्टकारी हों।

प्रश्न 3

मृत्यु दर और जन्म दर का क्या अर्थ है? कारण स्पष्ट कीजिए कि जन्म दर में गिरावट अपेक्षाकृत धीमी गति से क्यों आती है जबिक मृत्यु-दर बहुत तेजी से गिरती है।
Solution:

जनसांख्यिकी में जन्म दर और मृत्यु दर दो आधारभूत अवधारणाएँ हैं:

  1. जन्म-दर (Birth Rate): जन्म-दर से तात्पर्य एक निश्चित भौगोलिक क्षेत्र (जैसे देश, राज्य) में एक निर्धारित अवधि (आमतौर पर एक वर्ष) के दौरान प्रति हजार व्यक्तियों के पीछे जन्म लेने वाले जीवित बच्चों की संख्या से है। इसे सामान्यतः इस प्रकार व्यक्त किया जाता है: \frac{B}{P} \times 1000, जहाँ B जन्म लेने वाले बच्चों की संख्या है और P संपूर्ण जनसंख्या है। यह दर वातावरण, सामाजिक स्थितियों, विवाह की आयु, धार्मिक विश्वासों और शिक्षा जैसे कारकों से प्रभावित होती है।
  2. मृत्यु-दर (Death Rate): मृत्यु-दर से तात्पर्य एक निश्चित भौगोलिक क्षेत्र में एक निर्धारित अवधि (आमतौर पर एक वर्ष) के दौरान प्रति हजार व्यक्तियों के पीछे मरने वाले लोगों की संख्या से है। इसे सामान्यतः इस प्रकार व्यक्त किया जाता है: \frac{D}{P} \times 1000, जहाँ D मरने वाले लोगों की संख्या है और P संपूर्ण जनसंख्या है।

जन्म दर में धीमी गिरावट और मृत्यु दर में तीव्र गिरावट के कारण:

मृत्यु दर में गिरावट की गति आमतौर पर जन्म दर में गिरावट की गति की तुलना में बहुत तेज होती है। इसके मुख्य कारण निम्नलिखित हैं:

  • सार्वजनिक स्वास्थ्य और चिकित्सा प्रगति: सार्वजनिक स्वास्थ्य के उपायों, बेहतर स्वच्छता, टीकाकरण, और आधुनिक चिकित्सा तकनीकों के प्रसार से मृत्यु दर को अपेक्षाकृत तेजी से कम किया जा सकता है। इन सुधारों का प्रभाव तत्काल और व्यापक होता है, जिससे जीवन प्रत्याशा बढ़ती है और मृत्यु दर घटती है। लोग बेहतर स्वास्थ्य और लंबा जीवन चाहते हैं, इसलिए वे चिकित्सा सेवाओं का लाभ उठाते हैं।
  • सामाजिक-सांस्कृतिक जड़ें: जन्म दर का संबंध लोगों की गहरी सामाजिक, सांस्कृतिक, धार्मिक मान्यताओं, पारिवारिक मूल्यों और मनोवृत्तियों से होता है। उदाहरण के लिए, कुछ समाजों में बड़े परिवार को प्राथमिकता दी जाती है या पुत्र की चाहत अधिक होती है। इन मान्यताओं और व्यवहारों में परिवर्तन लाने में काफी समय लगता है क्योंकि ये पीढ़ी-दर-पीढ़ी हस्तांतरित होते हैं और सामाजिक संरचना का हिस्सा बन जाते हैं। इसलिए, जन्म दर में गिरावट अपेक्षाकृत धीमी गति से होती है।
  • शिक्षा और जागरूकता: शिक्षा और जागरूकता के प्रसार से जन्म दर को प्रभावित करने में समय लगता है, जबकि मृत्यु दर में सुधार के लिए आवश्यक तकनीकी और ढांचागत परिवर्तन तेजी से लागू किए जा सकते हैं।

Common mistakes

  • जनसांख्यिकीय संक्रमण की अवस्थाओं को गलत समझना।
  • माल्थस के सिद्धांत की व्याख्या में त्रुटि करना।
  • जन्म दर और मृत्यु दर के बीच अंतर को स्पष्ट न कर पाना।
  • जनसंख्या विस्फोट के कारणों को ठीक से न बता पाना।

Revision tips

  • जनसांख्यिकीय संक्रमण के सिद्धांत की तीनों अवस्थाओं को अच्छी तरह समझें।
  • माल्थस के सिद्धांत और उसके तर्कों को याद करें।
  • जन्म दर और मृत्यु दर की परिभाषाओं और उनके अंतर को स्पष्ट करें।
  • जनसंख्या विस्फोट के कारणों पर विशेष ध्यान दें।

Practice MCQs

Q1. जनसांख्यिकीय संक्रमण का सिद्धांत जनसंख्या वृद्धि को किससे जोड़ता है?

Q2. जनसांख्यिकीय संक्रमण की किस अवस्था में 'जनसंख्या विस्फोट' देखा जाता है?

Q3. थॉमस रॉबर्ट माल्थस के अनुसार, जनसंख्या वृद्धि की दर की तुलना में जीवन-निर्वाह के साधनों की वृद्धि दर कैसी होती है?

Q4. जन्म-दर को प्रति हजार व्यक्तियों पर कितने जन्मों के रूप में परिभाषित किया जाता है?

Q5. जन्म दर में गिरावट की गति मृत्यु दर की गिरावट की गति की तुलना में धीमी क्यों होती है?

Frequently asked questions

जनसांख्यिकीय संक्रमण का सिद्धांत क्या है?

यह सिद्धांत बताता है कि जनसंख्या वृद्धि आर्थिक विकास के विभिन्न स्तरों से जुड़ी होती है और प्रत्येक समाज विकास के दौरान जनसंख्या वृद्धि के एक निश्चित स्वरूप का अनुसरण करता है, जिसमें जन्म और मृत्यु दर में परिवर्तन शामिल है।

जनसंख्या विस्फोट से क्या तात्पर्य है?

जनसंख्या विस्फोट जनसांख्यिकीय संक्रमण की उस अवस्था को संदर्भित करता है जहाँ मृत्यु दर में तेजी से गिरावट आती है जबकि जन्म दर उच्च बनी रहती है, जिसके परिणामस्वरूप जनसंख्या में तीव्र वृद्धि होती है।

माल्थस के अनुसार अकाल और महामारी क्यों अपरिहार्य हैं?

माल्थस का मानना था कि जनसंख्या की वृद्धि दर जीवन-निर्वाह के साधनों की वृद्धि दर से तेज होती है। जनसंख्या को नियंत्रित करने और संतुलन बनाए रखने के लिए अकाल और महामारी जैसी विनाशकारी घटनाएँ प्राकृतिक निरोध के रूप में अपरिहार्य हैं।

जन्म दर और मृत्यु दर में क्या अंतर है?

जन्म दर एक निश्चित अवधि में प्रति हजार व्यक्तियों पर जन्म लेने वाले बच्चों की संख्या है, जबकि मृत्यु दर उसी अवधि में प्रति हजार व्यक्तियों पर मरने वालों की संख्या है।

जन्म दर में गिरावट मृत्यु दर की तुलना में धीमी क्यों होती है?

जन्म दर सामाजिक, सांस्कृतिक, धार्मिक विश्वासों और लोगों की मनोवृत्ति से गहराई से जुड़ी होती है, जिनमें परिवर्तन धीमी गति से होता है। इसके विपरीत, मृत्यु दर में सुधार सार्वजनिक स्वास्थ्य उपायों और चिकित्सा प्रगति से तेजी से किया जा सकता है।

कक्षा 12 समाजशास्त्र के लिए यह अध्याय क्यों महत्वपूर्ण है?

यह अध्याय भारतीय समाज की जनसांख्यिकीय संरचना को समझने के लिए महत्वपूर्ण है, जिसमें जनसंख्या वृद्धि के पैटर्न, जनसंख्या नियंत्रण के सिद्धांत और सामाजिक-आर्थिक कारकों के प्रभाव शामिल हैं, जो परीक्षा के दृष्टिकोण से महत्वपूर्ण हैं।

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