कक्षा 12 राजनीति विज्ञान: अध्याय 8 क्षेत्रीय आकांक्षाएँ - NCERT समाधान

NCERT Solutions PDF Class 12 PDF

यह खंड कक्षा 12 राजनीति विज्ञान के अध्याय 8, 'क्षेत्रीय आकांक्षाएँ' के लिए व्यापक NCERT समाधान प्रस्तुत करता है। यह अध्याय भारत में क्षेत्रीयता की जटिलताओं, भाषाई पहचान के आधार पर राज्यों के गठन की प्रक्रिया, और विभिन्न क्षेत्रों की विशिष्ट आकांक्षाओं का विश्लेषण करता है। इसमें पूर्वोत्तर भारत, पंजाब और जम्मू-कश्मीर जैसे क्षेत्रों की क्षेत्रीय मांगों और उनसे जुड़े आंदोलनों पर प्रकाश डाला गया है। समाधानों में आनंदपुर साहिब प्रस्ताव, पंजाब समझौते के प्रावधान और जम्मू-कश्मीर की आंतरिक विविधताओं के कारण उत्पन्न क्षेत्रीय आकांक्षाओं जैसे महत्वपूर्ण विषयों की गहन व्याख्या शामिल है। ये समाधान छात्रों को भारत की संघीय संरचना और क्षेत्रीय आकांक्षाओं के बीच संतुलन को समझने में मदद करते हैं, जो परीक्षा की तैयारी के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण हैं।

Quick info

BoardCBSE
ClassClass 12
Subjectराजनीति विज्ञान
Session2026
LanguageHindi
TypeNCERT Solutions
Chapter8. क्षेत्रीय आकांक्षाएँ

Chapter summary

कक्षा 12 राजनीति विज्ञान के अध्याय 8, 'क्षेत्रीय आकांक्षाएँ' के ये NCERT समाधान भारत में क्षेत्रीयता के विभिन्न पहलुओं को कवर करते हैं। इसमें पूर्वोत्तर राज्यों की विशिष्ट मांगों, पंजाब में भाषाई और धार्मिक पहचान से जुड़े संघर्षों, और जम्मू-कश्मीर की आंतरिक विविधताओं के कारण उत्पन्न क्षेत्रीय आकांक्षाओं का विस्तृत विश्लेषण है। समाधान आनंदपुर साहिब प्रस्ताव और पंजाब समझौते जैसे महत्वपूर्ण ऐतिहासिक घटनाओं पर भी प्रकाश डालते हैं, जो क्षेत्रीय स्वायत्तता और केंद्र-राज्य संबंधों की जटिलताओं को समझने में सहायक हैं।

Learning outcomes

  • क्षेत्रीय आकांक्षाओं की प्रकृति और अभिव्यक्ति को समझना।
  • पूर्वोत्तर भारत, पंजाब और जम्मू-कश्मीर जैसे क्षेत्रों की विशिष्ट क्षेत्रीय मांगों का विश्लेषण करना।
  • भाषाई पहचान, सांस्कृतिक स्वायत्तता और अलगाववादी आंदोलनों के कारणों की व्याख्या करना।
  • आनंदपुर साहिब प्रस्ताव और पंजाब समझौते के मुख्य प्रावधानों और उनके प्रभावों का मूल्यांकन करना।
  • जम्मू-कश्मीर की आंतरिक विविधताओं और उनसे उत्पन्न क्षेत्रीय आकांक्षाओं को समझना।

Topics covered

Paper topics

  • क्षेत्रीय आकांक्षाओं की प्रकृति
  • पूर्वोत्तर भारत की क्षेत्रीय मांगें
  • नागालैंड और मिजोरम की अलगाववादी मांगें
  • पंजाब में भाषाई और धार्मिक पहचान
  • पंजाब समझौता (1985)
  • आनंदपुर साहिब प्रस्ताव
  • जम्मू-कश्मीर की आंतरिक विभिन्नताएँ
  • कश्मीरियत और स्वायत्तता का मसला
  • धर्मनिरपेक्ष राज्य की आकांक्षा
  • क्षेत्रीय असंतुलन
  • आदिवासी पहचान आधारित मांगें
  • केंद्र-राज्य संबंध

Important topics

  • क्षेत्रीय आकांक्षाओं की प्रकृति और अभिव्यक्ति
  • पूर्वोत्तर भारत की विशिष्ट क्षेत्रीय मांगें
  • पंजाब समझौता और आनंदपुर साहिब प्रस्ताव
  • जम्मू-कश्मीर की आंतरिक विभिन्नताएँ और आकांक्षाएँ
  • भाषाई पहचान और राज्यों का गठन

PDF preview

Read page by page below. PDF is streamed from the official NCERT website — no download button on this page.

Loading document …
Page of
Loading page …

Questions and Solutions

1. निम्नलिखित में मेल करें:

क्षेत्रीय आकांक्षाओं की प्रकृति और राज्य का सही मिलान करें:

(क) सामाजिक-धार्मिक पहचान के आधार पर राज्य का निर्माण

(ख) भाषाई पहचान और केंद्र के साथ तनाव

(ग) क्षेत्रीय असंतुलन के फलस्वरूप राज्य का निर्माण

(घ) आदिवासी पहचान के आधार पर अलगाववादी माँग

राज्य

(i) पंजाब

(ii) तमिलनाडु

(iii) झारखंड/छत्तीसगढ़

(iv) नागालैंड/मिजोरम

Solution:

क्षेत्रीय आकांक्षाओं की प्रकृति और संबंधित राज्यों का सही मिलान इस प्रकार है:

  1. (क) सामाजिक-धार्मिक पहचान के आधार पर राज्य का निर्माण - (i) पंजाब (सिखों के लिए अलग पहचान और स्वायत्तता की मांग)।
  2. (ख) भाषाई पहचान और केंद्र के साथ तनाव - (ii) तमिलनाडु (द्रविड़ आंदोलन और हिंदी विरोध)।
  3. (ग) क्षेत्रीय असंतुलन के फलस्वरूप राज्य का निर्माण - (iii) झारखंड/छत्तीसगढ़ (औद्योगिक और आर्थिक असंतुलन के कारण)।
  4. (घ) आदिवासी पहचान के आधार पर अलगाववादी माँग - (iv) नागालैंड/मिजोरम (आदिवासी समुदायों की स्वायत्तता और अलगाव की मांगें)।

2. पूर्वोत्तर के लोगों की क्षेत्रीय आकांक्षाओं की अभिव्यक्ति कई रूपों में होती है। बाहरी लोगों के खिलाफ़ आंदोलन, ज्यादा स्वायत्तता की माँग के आंदोलन और अलग देश बनाने की माँग करना-ऐसी ही कुछ अभिव्यक्तियाँ हैं। पूर्वोत्तर के मानचित्र पर इन तीनों के लिए अलग-अलग रंग भरिए और दिखाइए कि किस राज्य में कौन-सी प्रवृत्ति ज्यादा प्रवल है।

पूर्वोत्तर के लोगों की क्षेत्रीय आकांक्षाओं की अभिव्यक्ति कई रूपों में होती है। बाहरी लोगों के खिलाफ़ आंदोलन, ज्यादा स्वायत्तता की माँग के आंदोलन और अलग देश बनाने की माँग करना-ऐसी ही कुछ अभिव्यक्तियाँ हैं। पूर्वोत्तर के मानचित्र पर इन तीनों के लिए अलग-अलग रंग भरिए और दिखाइए कि किस राज्य में कौन-सी प्रवृत्ति ज्यादा प्रवल है।
Solution:

पूर्वोत्तर भारत में क्षेत्रीय आकांक्षाओं की अभिव्यक्ति विविध रूपों में हुई है, जिन्हें मानचित्र पर दर्शाया जा सकता है। यहाँ प्रमुख प्रवृत्तियाँ और संबंधित राज्य दिए गए हैं:

  • अलग देश बनाने की माँग: नागालैंड और मिजोरम जैसे राज्यों ने ऐतिहासिक रूप से अलग देश बनाने की मांग की थी। हालांकि, मिजोरम बाद में स्वायत्त राज्य बनने पर सहमत हो गया। नागालैंड में भी अलगाववादी आंदोलन का पूर्ण समाधान अभी तक नहीं हुआ है, यद्यपि कुछ समूहों ने भारत सरकार के साथ समझौते किए हैं।
  • स्वायत्तता की माँग: मणिपुर और त्रिपुरा जैसे राज्यों में बाहरी भाषा (जैसे असमी) को लादने के खिलाफ आंदोलन हुए, जिससे स्वायत्तता की मांग बढ़ी। करबी, दिमगा और बोडो जैसी जनजातियों ने भी स्वायत्त परिषदों या स्वायत्त क्षेत्रों की मांग की है। मेघालय, मिजोरम और अरुणाचल प्रदेश जैसे नए राज्यों का गठन भी क्षेत्रीय आकांक्षाओं का परिणाम था।
  • बाहरी लोगों के खिलाफ आंदोलन: पूर्वोत्तर के कई राज्यों में स्थानीय समुदायों ने बाहरी लोगों (विशेषकर अन्य भारतीय राज्यों से आए लोगों) के खिलाफ आंदोलन किए हैं, जो अक्सर आर्थिक अवसरों और सांस्कृतिक पहचान को लेकर होते हैं।

मानचित्र पर इन प्रवृत्तियों को अलग-अलग रंगों से दर्शाया जा सकता है, जहाँ प्रत्येक राज्य के लिए प्रमुख प्रवृत्ति को उजागर किया जाएगा। उदाहरण के लिए, नागालैंड और मिजोरम को 'अलग देश की मांग' के लिए एक रंग, मणिपुर और त्रिपुरा को 'स्वायत्तता की मांग' के लिए दूसरे रंग, और अन्य राज्यों में जहाँ बाहरी लोगों के खिलाफ आंदोलन प्रमुख रहे हैं, उन्हें तीसरे रंग से दर्शाया जा सकता है।

3. पंजाब समझौते के मुख्य प्रावधान क्या थे? क्या ये प्रावधान पंजाब और उसके पड़ोसी राज्यों के बीच तनाव बढ़ाने के कारण बन सकते हैं? तर्क सहित उत्तर वीजिए।

पंजाब समझौते के मुख्य प्रावधान क्या थे? क्या ये प्रावधान पंजाब और उसके पड़ोसी राज्यों के बीच तनाव बढ़ाने के कारण बन सकते हैं? तर्क सहित उत्तर वीजिए।
Solution:

प्रधानमंत्री राजीव गांधी और अकाली दल के नेता संत हरचंद सिंह लोगोवाल के बीच 1985 में हुए पंजाब समझौते के मुख्य प्रावधान निम्नलिखित थे:

  1. चंडीगढ़ का हस्तांतरण: यह माना गया कि चंडीगढ़ पर पंजाब का हक है और इसे शीघ्र ही पंजाब को सौंप दिया जाएगा। यह प्रावधान पंजाब और हरियाणा के बीच तनाव का एक प्रमुख कारण रहा है, क्योंकि हरियाणा भी चंडीगढ़ पर अपना दावा करता है।
  2. सीमा विवाद का समाधान: पंजाब और हरियाणा के बीच सीमा विवाद को सुलझाने के लिए एक अलग आयोग स्थापित करने का प्रावधान था। यह भी पड़ोसी राज्यों के बीच संभावित तनाव का स्रोत बन सकता था।
  3. जल बंटवारा: रावी और व्यास नदियों के पानी का पंजाब, हरियाणा और राजस्थान के बीच बंटवारा करने के लिए एक न्यायाधिकरण (Tribunal) बैठाया जाएगा। जल संसाधनों का बंटवारा हमेशा से ही राज्यों के बीच तनाव का एक संवेदनशील मुद्दा रहा है।
  4. सिक्खों के साथ बेहतर व्यवहार: सरकार ने भविष्य में सिक्खों के साथ बेहतर व्यवहार करने और उन्हें राष्ट्रीय धारा में सम्मानजनक स्थिति देने का वचन दिया।
  5. मुआवजा और दोषियों को दंड: सरकार ने दंगा पीड़ित परिवारों को उचित मुआवजा देने और दोषियों को दंडित करने का वादा किया।

तर्क सहित उत्तर:

हाँ, ये प्रावधान पंजाब और उसके पड़ोसी राज्यों, विशेषकर हरियाणा, के बीच तनाव बढ़ाने के कारण बन सकते थे। चंडीगढ़ का मुद्दा आज भी पंजाब और हरियाणा के बीच एक प्रमुख विवाद का विषय है। जल बंटवारे का मुद्दा भी राज्यों के बीच हमेशा से ही संवेदनशील रहा है, और किसी भी राज्य को लगता है कि उसे उसके उचित हिस्से से कम पानी मिल रहा है, तो तनाव उत्पन्न हो सकता है। सीमा विवादों का समाधान भी अक्सर जटिल होता है और इसमें पड़ोसी राज्यों के बीच असहमति की गुंजाइश बनी रहती है। यद्यपि समझौते का उद्देश्य शांति स्थापित करना था, लेकिन इन प्रावधानों के कार्यान्वयन में आने वाली कठिनाइयाँ या राज्यों के बीच असहमति भविष्य में तनाव का कारण बन सकती थी।

4. आनंदपुर साहिब प्रस्ताव कें विवादास्पद होने के क्या कारण थे?

आनंदपुर साहिब प्रस्ताव के विवादास्पद होने के क्या कारण थे?
Solution:

आनंदपुर साहिब प्रस्ताव, जो 1973 में अकालियों के एक समूह द्वारा पारित किया गया था, कई कारणों से विवादास्पद हो गया:

  • क्षेत्रीय स्वायत्तता की मांग: प्रस्ताव में केंद्र-राज्य संबंधों को पुनर्परिभाषित करने और पंजाब के लिए अधिक स्वायत्तता की मांग की गई थी। यह मांग केंद्र सरकार के लिए चिंता का विषय थी, क्योंकि यह संघीय ढांचे को कमजोर कर सकती थी।
  • 'सिख कौम' की आकांक्षाओं पर जोर: प्रस्ताव में सिख 'कौम' (राष्ट्र या समुदाय) की आकांक्षाओं पर विशेष जोर दिया गया था। इसने सिखों के 'बोलबाला' (प्रभुत्व या वर्चस्व) का भी ऐलान किया।
  • अलग सिख राष्ट्र की व्याख्या: यद्यपि प्रस्ताव संघवाद को मजबूत करने की अपील करता था, लेकिन इसकी भाषा और सिख पहचान पर जोर देने के कारण इसे एक अलग सिख राष्ट्र की मांग के रूप में भी पढ़ा जा सकता था। यह व्याख्या राष्ट्रीय एकता के लिए एक चुनौती के रूप में देखी गई।
  • कांग्रेस से प्रतिद्वंद्विता: 1970 के दशक में कांग्रेस पार्टी द्वारा पंजाब में सिख और हिंदू दलितों के बीच समर्थन प्राप्त करने की कोशिशों के कारण अकाली दल कांग्रेस से चिढ़ गया था, जिसने इस प्रस्ताव को पारित करने में भूमिका निभाई।

इन कारणों से, आनंदपुर साहिब प्रस्ताव को पंजाब के लिए अधिक शक्ति की मांग के साथ-साथ एक अलग सिख पहचान और संभावित अलगाववाद की ओर एक कदम के रूप में देखा गया, जिससे यह विवादास्पद बन गया।

5. जम्मू-कश्मीर की अंदरुनी विभिन्नताओं की व्याख्या कीजिए और बताइए कि इन विभिन्नताओं के कारण इस राज्य में किस तरह अनेक क्षेत्रीय आकांक्षाओं ने सर उठाया है।

जम्मू-कश्मीर की अंदरुनी विभिन्नताओं की व्याख्या कीजिए और बताइए कि इन विभिन्नताओं के कारण इस राज्य में किस तरह अनेक क्षेत्रीय आकांक्षाओं ने सर उठाया है।
Solution:

जम्मू-कश्मीर राज्य अपनी आंतरिक विविधताओं के कारण एक जटिल राजनीतिक परिदृश्य प्रस्तुत करता है, जिसने विभिन्न क्षेत्रीय आकांक्षाओं को जन्म दिया है।

जम्मू-कश्मीर की अंदरूनी विभिन्नताएँ:

  1. भौगोलिक और सामाजिक-सांस्कृतिक क्षेत्र: राज्य को मुख्य रूप से तीन राजनीतिक और सामाजिक क्षेत्रों में बांटा जा सकता है: जम्मू, कश्मीर घाटी और लद्दाख।
    • कश्मीर घाटी: यह राज्य का दिल माना जाता है। यहाँ कश्मीरी भाषा बोली जाती है और अधिकांश आबादी मुस्लिम है, हालांकि एक अल्पसंख्यक हिंदू आबादी भी है। यहाँ की पहचान 'कश्मीरियत' के रूप में जानी जाती है।
    • जम्मू क्षेत्र: यह पहाड़ी तलहटी और मैदानी इलाकों का मिश्रण है। यहाँ हिन्दू, मुस्लिम और सिख धर्मों के लोग रहते हैं और विभिन्न भाषाएँ बोली जाती हैं।
    • लद्दाख: यह एक पर्वतीय क्षेत्र है जहाँ मुख्य रूप से बौद्ध और मुस्लिम आबादी निवास करती है, लेकिन यह आबादी तुलनात्मक रूप से कम है।
  2. पहचान का सवाल: राज्य के लोग स्वयं को सबसे पहले 'कश्मीरी' मानते हैं, और फिर अन्य पहचानों से जोड़ते हैं। यह एक मजबूत क्षेत्रीय पहचान है जो राष्ट्रीय या पाकिस्तानी पहचान से अलग है।

इन विभिन्नताओं के कारण उत्पन्न क्षेत्रीय आकांक्षाएँ:

  1. धर्मनिरपेक्ष राज्य की आकांक्षा: 1947 से पहले, जम्मू-कश्मीर पर एक हिंदू शासक (महाराजा हरि सिंह) का शासन था, जो भारत या पाकिस्तान में शामिल नहीं होना चाहते थे। नेशनल कांफ्रेंस के नेता शेख अब्दुल्ला के नेतृत्व में एक जन-आंदोलन चला, जिसका उद्देश्य महाराजा को हटाना और एक धर्मनिरपेक्ष, स्वायत्त राज्य की स्थापना करना था। वे पाकिस्तान में शामिल होने के भी खिलाफ थे।
  2. आक्रमणकारियों से प्रतिरक्षा और लोकतंत्र की स्थापना की आकांक्षा: अक्टूबर 1947 में पाकिस्तान समर्थित कबायली घुसपैठियों के हमले के बाद, महाराजा ने भारत से सैन्य सहायता मांगी और भारत संघ में विलय के दस्तावेज पर हस्ताक्षर किए। भारत ने सैन्य मदद दी और घुसपैठियों को खदेड़ा। इस विलय के साथ यह सहमति बनी कि स्थिति सामान्य होने पर जनमत सर्वेक्षण द्वारा राज्य की नियति तय की जाएगी। शेख अब्दुल्ला 1948 में राज्य के प्रधानमंत्री बने और उन्होंने लोकतंत्र की स्थापना और राज्य को बाहरी आक्रमणों से सुरक्षित रखने की आकांक्षाओं को पूरा करने का प्रयास किया।
  3. राजनीतिक स्वायत्तता का मसला: 'कश्मीर मुद्दा' केवल भारत-पाकिस्तान विवाद तक सीमित नहीं है, बल्कि इसमें राज्य की राजनीतिक स्वायत्तता का प्रश्न भी गहराई से जुड़ा हुआ है। राज्य के विभिन्न क्षेत्रों की अपनी विशिष्ट आकांक्षाएँ हैं, जो कभी-कभी राज्य सरकार और केंद्र सरकार के साथ तनाव का कारण बनती हैं।
  4. क्षेत्रीय पहचान और प्रतिनिधित्व: जम्मू, कश्मीर घाटी और लद्दाख के लोगों की अपनी अलग-अलग सांस्कृतिक और राजनीतिक अपेक्षाएँ हैं। इन विविधताओं के कारण, प्रत्येक क्षेत्र अपने लिए उचित प्रतिनिधित्व और स्वायत्तता की मांग करता है, जिससे राज्य के भीतर ही क्षेत्रीय आकांक्षाओं का एक जटिल ताना-बाना बुना गया है।

Common mistakes

  • क्षेत्रीय आकांक्षाओं को केवल अलगाववाद के रूप में देखना, जबकि वे स्वायत्तता की मांग भी हो सकती हैं।
  • पंजाब समझौते के प्रावधानों और उनके दीर्घकालिक प्रभावों को ठीक से न समझना।
  • जम्मू-कश्मीर की आंतरिक विविधताओं और उनके राजनीतिक महत्व को नजरअंदाज करना।
  • पूर्वोत्तर भारत की जटिल क्षेत्रीय मांगों को सरलीकृत करना।

Revision tips

  • प्रत्येक क्षेत्र (पूर्वोत्तर, पंजाब, जम्मू-कश्मीर) की विशिष्ट मांगों और उनके ऐतिहासिक संदर्भों को सूचीबद्ध करें।
  • आनंदपुर साहिब प्रस्ताव और पंजाब समझौते के मुख्य बिंदुओं को याद करें और उनके तर्कों को समझें।
  • क्षेत्रीय आकांक्षाओं और राष्ट्रीय एकता के बीच संतुलन पर विचार करें।
  • मानचित्र का उपयोग करके पूर्वोत्तर के राज्यों की स्थिति और उनकी मांगों को समझें।

Practice MCQs

Q1. आनंदपुर साहिब प्रस्ताव का मुख्य जोर किस पर था?

Q2. पंजाब समझौते (1985) के अनुसार, चंडीगढ़ का क्या होना तय हुआ था?

Q3. जम्मू-कश्मीर राज्य में कौन से तीन मुख्य राजनीतिक और सामाजिक क्षेत्र शामिल हैं?

Q4. पूर्वोत्तर भारत में क्षेत्रीय आकांक्षाओं की अभिव्यक्ति के कुछ रूप क्या हैं?

Frequently asked questions

कक्षा 12 राजनीति विज्ञान के अध्याय 8 का मुख्य विषय क्या है?

अध्याय 8, 'क्षेत्रीय आकांक्षाएँ', भारत में क्षेत्रीयता की जटिलताओं, विभिन्न क्षेत्रों की विशिष्ट मांगों, भाषाई पहचान के आधार पर राज्यों के गठन और उनसे जुड़े आंदोलनों पर केंद्रित है।

आनंदपुर साहिब प्रस्ताव क्यों विवादास्पद था?

यह प्रस्ताव पंजाब के लिए अधिक स्वायत्तता की मांग करता था और इसमें सिख 'कौम' की आकांक्षाओं पर जोर दिया गया था, जिसे कुछ लोग एक अलग सिख राष्ट्र की मांग के रूप में भी देखते थे, जिससे यह विवादास्पद हो गया।

पंजाब समझौते (1985) के मुख्य प्रावधान क्या थे?

मुख्य प्रावधानों में चंडीगढ़ का पंजाब को हस्तांतरण, सीमा विवादों के समाधान के लिए आयोग का गठन, और जल बंटवारे के लिए न्यायाधिकरण की स्थापना शामिल थी।

जम्मू-कश्मीर में क्षेत्रीय आकांक्षाओं के उत्पन्न होने के क्या कारण हैं?

जम्मू-कश्मीर की आंतरिक विभिन्नताओं (जम्मू, कश्मीर, लद्दाख क्षेत्रों की अलग पहचान), कश्मीरी पहचान (कश्मीरियत), और राजनीतिक स्वायत्तता के मसले के कारण यहाँ अनेक क्षेत्रीय आकांक्षाओं ने जन्म लिया है।

ये NCERT समाधान छात्रों की परीक्षा की तैयारी में कैसे मदद करते हैं?

ये समाधान प्रत्येक प्रश्न के विस्तृत और स्पष्ट उत्तर प्रदान करते हैं, जिससे छात्र महत्वपूर्ण अवधारणाओं, ऐतिहासिक घटनाओं और तर्कों को गहराई से समझ सकते हैं, जो परीक्षा में अच्छे अंक लाने के लिए आवश्यक है।

Content reviewed by the NCERT Help team. Editorial Team and update policy

NCERT Solutions PDF PDF on NCERT Help. URL unchanged for search indexing.