कक्षा 12 राजनीति विज्ञान: अध्याय 7 जन-आंदोलनों का उदय NCERT समाधान

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यह पृष्ठ कक्षा 12 राजनीति विज्ञान के अध्याय 7, 'जन-आंदोलनों का उदय' के लिए विस्तृत NCERT समाधान प्रस्तुत करता है। इसमें चिपको आंदोलन, भारतीय किसान यूनियन (बीकेयू) और आंध्र प्रदेश के शराब-विरोधी आंदोलन जैसे महत्वपूर्ण जन आंदोलनों पर गहराई से चर्चा की गई है। समाधान बताते हैं कि कैसे इन आंदोलनों ने पर्यावरण संरक्षण, किसानों के अधिकारों और सामाजिक मुद्दों जैसे कि शराबखोरी के खिलाफ आवाज उठाई। यह अध्याय बताता है कि कैसे ये आंदोलन लोकतंत्र को मजबूत करते हैं और विभिन्न सामाजिक-आर्थिक मुद्दों को संबोधित करते हैं। ये समाधान छात्रों को इन आंदोलनों के कारणों, मांगों और प्रभावों को समझने में मदद करेंगे, जो परीक्षा की तैयारी के लिए महत्वपूर्ण हैं।

Quick info

BoardCBSE
ClassClass 12
Subjectराजनीति विज्ञान
Session2026
LanguageHindi
TypeNCERT Solutions
Chapter7. जन-आंदोलनों का उदय

Chapter summary

कक्षा 12 राजनीति विज्ञान के अध्याय 7 के ये NCERT समाधान 'जन-आंदोलनों का उदय' पर केंद्रित हैं। यह अध्याय चिपको आंदोलन, भारतीय किसान यूनियन और आंध्र प्रदेश के शराब-विरोधी आंदोलन जैसे प्रमुख जन आंदोलनों के उद्भव, कारणों, मांगों और प्रभावों का विश्लेषण करता है। समाधान बताते हैं कि कैसे इन आंदोलनों ने पर्यावरण, किसानों की दुर्दशा और सामाजिक कुरीतियों जैसे मुद्दों को उठाया और लोकतंत्र में जन भागीदारी के महत्व को रेखांकित किया।

Learning outcomes

  • चिपको आंदोलन के कारणों, मांगों और प्रभावों को समझना।
  • भारतीय किसान यूनियन द्वारा उठाए गए प्रमुख मुद्दों और उनकी सफलताओं का विश्लेषण करना।
  • आंध्र प्रदेश के शराब-विरोधी आंदोलन के सामाजिक और आर्थिक कारणों की पहचान करना।
  • जन आंदोलनों और लोकतंत्र के बीच संबंध को स्पष्ट करना।
  • सामाजिक आंदोलनों के विभिन्न स्वरूपों और उनके महत्व का मूल्यांकन करना।

Topics covered

Paper topics

  • जन आंदोलनों का उदय
  • चिपको आंदोलन
  • भारतीय किसान यूनियन (बीकेयू)
  • शराब-विरोधी आंदोलन (आंध्र प्रदेश)
  • पर्यावरण आंदोलन
  • किसानों के मुद्दे
  • सामाजिक मुद्दे
  • लोकतंत्र और जन भागीदारी
  • प्राकृतिक संसाधनों पर नियंत्रण
  • आर्थिक शोषण

Important topics

  • चिपको आंदोलन: कारण, मांगें और प्रभाव
  • भारतीय किसान यूनियन के मुद्दे और सफलताएं
  • शराब-विरोधी आंदोलन का सामाजिक-आर्थिक विश्लेषण
  • जन आंदोलनों की लोकतंत्र में भूमिका

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Questions and Solutions

प्रश्न 1

चिपको आंदोलन के बारे में निम्नलिखित में कौन-कौन से कथन गलत हैं:
  • (क) यह पेड़ों की कटाई को रोकने के लिए चला एक पर्यावरण आंदोलन था।
  • (ख) इस आंदोलन ने पारिस्थितिकी और आर्थिक शोषण के मामले उठाए।
  • (ग) यह महिलाओं द्वारा शुरू किया गया शराब-विरोधी आंदोलन था।
  • (घ) इस आंदोलन की माँग थी कि स्थानीय निवासियों का अपने प्राकृतिक संसाधनों पर नियंत्रण होना चाहिए।
Solution:

दिए गए कथनों में से कथन (ग) गलत है।

सही कथन इस प्रकार हैं:

  • (क) यह पेड़ों की कटाई को रोकने के लिए चला एक पर्यावरण आंदोलन था। (सही)
  • (ख) इस आंदोलन ने पारिस्थितिकी और आर्थिक शोषण के मामले उठाए। (सही)
  • (ग) यह महिलाओं द्वारा शुरू किया गया शराब-विरोधी आंदोलन था। (गलत)
  • (घ) इस आंदोलन की माँग थी कि स्थानीय निवासियों का अपने प्राकृतिक संसाधनों पर नियंत्रण होना चाहिए। (सही)

स्पष्टीकरण: चिपको आंदोलन मुख्य रूप से वनों की कटाई के विरोध में एक पर्यावरण आंदोलन था। इसने पारिस्थितिकी और आर्थिक शोषण के मुद्दों को भी उठाया और स्थानीय समुदायों के प्राकृतिक संसाधनों पर नियंत्रण की मांग की। हालाँकि आंदोलन के दौरान शराबबंदी का मुद्दा भी उठा और महिलाओं की इसमें महत्वपूर्ण भागीदारी थी, लेकिन इसे केवल महिलाओं द्वारा शुरू किया गया शराब-विरोधी आंदोलन कहना इसकी मुख्य प्रकृति को सीमित करना होगा। यह आंदोलन मुख्य रूप से वनों के संरक्षण से जुड़ा था।

प्रश्न 2

निम्नलिखित में से कुछ कथन गलत हैं। इनकी पहचान करें और ज़रूरी सुधार के साथ उन्हें दुरुस्त करके दोबारा लिखें:
  • (क) सामाजिक आंदोलन भारत के लोकतंत्र को हानि पहुँचा रहे हैं।
  • (ख) सामाजिक आंदोलनों की मुख्य ताकत विभिन्न सामाजिक वर्गी के बीच व्याप्त उनका जनाधार है।
  • (ग) भारत के राजनीतिक दलों ने कई मुद्दों को नहीं उठाया। इसी कारण सामाजिक आंदोलनों का उदय हुआ।
Solution:

दिए गए कथनों में से कथन (क) गलत है। अन्य कथन सही हैं।

सुधार के साथ दुरुस्त कथन:

  1. कथन (क): यह कथन गलत है क्योंकि सामाजिक आंदोलन भारत के लोकतंत्र को हानि नहीं पहुँचा रहे हैं, बल्कि वे लोकतंत्र को मजबूत करने और विभिन्न सामाजिक-आर्थिक मुद्दों को उठाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। वे जन भागीदारी को बढ़ाते हैं और सरकार को जवाबदेह बनाते हैं।
  2. कथन (ख): यह कथन ठीक है क्योंकि सामाजिक आंदोलनों की मुख्य ताकत विभिन्न सामाजिक वर्गों के बीच उनका व्यापक जनाधार होता है। यह जनाधार उन्हें सामूहिक कार्रवाई करने और अपनी मांगों को प्रभावी ढंग से उठाने की शक्ति प्रदान करता है।
  3. कथन (ग): यह कथन सही है क्योंकि भारत के राजनीतिक दलों ने अक्सर कई महत्वपूर्ण सामाजिक-आर्थिक मुद्दों को पर्याप्त रूप से नहीं उठाया है। इसी कारण से, इन अनसुने मुद्दों को उठाने और समाधान खोजने के लिए सामाजिक आंदोलनों का उदय हुआ है।

प्रश्न 3

उत्तर प्रदेश के कुछ भागों में (अब उत्तराखंड) 1970 के दशक में किन कारणों से चिपको आंदोलन का जन्म हुआ? इस आंदोलन का क्या प्रभाव पड़ा?
Solution:

चिपको आंदोलन के जन्म के कारण:

1970 के दशक में, उत्तर प्रदेश के तत्कालीन अल्मोड़ा जिले (अब उत्तराखंड) के कुछ गाँवों में चिपको आंदोलन का जन्म मुख्य रूप से निम्नलिखित कारणों से हुआ:

  1. वन विभाग द्वारा व्यावसायिक कटाई की अनुमति: गाँव वालों ने अपनी खेती-बाड़ी के औजार बनाने के लिए ऐश (Ash) के पेड़ काटने की अनुमति वन विभाग से मांगी, लेकिन उन्हें यह अनुमति नहीं दी गई। इसके विपरीत, वन विभाग ने खेल का सामान बनाने वाली एक कंपनी को उसी क्षेत्र में व्यावसायिक उपयोग के लिए पेड़ काटने की अनुमति दे दी।
  2. स्थानीय संसाधनों पर नियंत्रण का अभाव: ग्रामीणों को अपने प्राकृतिक संसाधनों, जैसे कि जंगल, पर नियंत्रण का अधिकार नहीं था, जबकि बाहरी कंपनियां उनके संसाधनों का व्यावसायिक लाभ के लिए उपयोग कर रही थीं।
  3. पारिस्थितिकी और आर्थिक शोषण: पेड़ों की अंधाधुंध कटाई से क्षेत्र की पारिस्थितिकी को नुकसान पहुँच रहा था और स्थानीय लोगों के आर्थिक हितों का शोषण हो रहा था।

आंदोलन का तरीका:

जब कंपनी ने पेड़ काटना शुरू किया, तो गाँव वालों ने इसका सामूहिक विरोध किया। विरोध का तरीका यह था कि ग्रामीण, विशेषकर महिलाएँ, पेड़ों से चिपक जाती थीं ताकि उन्हें काटा न जा सके। इसी 'चिपकने' की क्रिया के कारण आंदोलन का नाम 'चिपको आंदोलन' पड़ा।

आंदोलन का प्रभाव:

चिपको आंदोलन का व्यापक प्रभाव पड़ा, जिसमें निम्नलिखित शामिल हैं:

  1. पेड़ों की कटाई पर रोक: आंदोलन की सफलता के फलस्वरूप सरकार ने अगले 15 वर्षों के लिए पहाड़ी क्षेत्रों में पेड़ों की कटाई पर रोक लगा दी।
  2. जन जागरूकता: इस आंदोलन ने पहाड़ी क्षेत्र के लोगों, विशेषकर महिलाओं में अपने अधिकारों के प्रति चेतना जागृत की।
  3. सामाजिक मुद्दों का समावेश: आंदोलन ने केवल पर्यावरण संरक्षण तक सीमित न रहकर, स्थानीय लोगों के प्राकृतिक संसाधनों पर अधिकार, लघु उद्योगों को बढ़ावा, वन कर्मचारियों के वेतन, और शराबबंदी जैसे कई अन्य सामाजिक-आर्थिक मुद्दों को भी अपने में शामिल कर लिया।
  4. प्रेरणा का स्रोत: चिपको आंदोलन ने देश के अन्य हिस्सों में भी जन आंदोलनों को प्रेरित किया, जिससे लोगों को यह महसूस हुआ कि वे राजनीतिक दलों का सहारा लिए बिना भी सामूहिक प्रयास से अपनी समस्याओं का समाधान करवा सकते हैं।
  5. शराबबंदी की मांग: आंदोलन में महिलाओं की भागीदारी के साथ शराबबंदी का मुद्दा भी प्रमुखता से उठा और क्षेत्र में शराबबंदी की मांग की गई।

प्रश्न 4

भारतीय किसान यूनियन किसानों की दुर्दशा की तरफ़ ध्यान आकर्षित करने वाला अग्रणी संगठन है। नब्बे के दशक में इसने किन मुद्दों को उठाया और इसे कहाँ तक सफलता मिली?
Solution:

भारतीय किसान यूनियन (बीकेयू) एक प्रमुख संगठन रहा है जिसने किसानों की समस्याओं को पुरजोर तरीके से उठाया है। 1990 के दशक में, विशेषकर उदारीकरण के दौर में, बीकेयू ने निम्नलिखित प्रमुख मुद्दों को उठाया:

उठाए गए मुद्दे:

  1. बिजली की दरों में बढ़ोतरी का विरोध: किसानों को सिंचाई और अन्य कृषि कार्यों के लिए बिजली की आवश्यकता होती है, और इसकी दरों में वृद्धि उनके लिए एक बड़ा बोझ थी।
  2. नगदी फसलों के बाजार का संकट: 1980 के दशक के उत्तरार्ध से अर्थव्यवस्था के उदारीकरण के प्रयासों के कारण नगदी फसलों के बाजार में अनिश्चितता और संकट पैदा हो गया था।
  3. सरकारी खरीद मूल्य में वृद्धि: बीकेयू ने गन्ने और गेहूं जैसी प्रमुख फसलों के लिए सरकारी खरीद मूल्य (MSP) में वृद्धि की मांग की ताकि किसानों को उनकी उपज का उचित मूल्य मिल सके।
  4. कृषि उत्पादों की आवाजाही पर पाबंदियाँ हटाना: किसानों को अपने उत्पादों को एक राज्य से दूसरे राज्य में ले जाने में आने वाली बाधाओं को दूर करने की मांग की गई।
  5. समुचित दर पर बिजली आपूर्ति: किसानों को गारंटीशुदा और उचित दर पर बिजली की आपूर्ति सुनिश्चित करने की मांग की गई।
  6. किसानों के लिए पेंशन: वृद्धावस्था में किसानों की आर्थिक सुरक्षा के लिए पेंशन योजना की मांग भी उठाई गई।

सफलताएँ:

भारतीय किसान यूनियन ने अपने आंदोलनों और दबाव के माध्यम से कई महत्वपूर्ण सफलताएँ हासिल कीं:

  1. मांगों की स्वीकृति: बीकेयू के कार्यकर्ताओं और नेताओं ने जिला समाहर्त्ता के कार्यालय के बाहर तीन सप्ताह तक धरना दिया, जिसके परिणामस्वरूप उनकी कुछ माँगें मान ली गईं। मेरठ में हुआ यह धरना ग्रामीण शक्ति का एक बड़ा प्रदर्शन माना गया।
  2. दबाव समूह के रूप में भूमिका: 1990 के दशक की शुरुआत तक, बीकेयू ने अपने को राजनीतिक दलों से दूर रखते हुए, अपने सदस्य संख्या के बल पर राजनीति में एक प्रभावी दबाव समूह के रूप में कार्य किया।
  3. अन्य संगठनों के साथ समन्वय: इस संगठन ने राज्यों में मौजूद अन्य किसान संगठनों के साथ मिलकर अपनी कुछ अन्य माँगें मनवाने में भी सफलता पाई।
  4. अस्सी के दशक का सफल आंदोलन: इन सफलताओं के कारण, किसान आंदोलन को 1980 के दशक में सबसे सफल सामाजिक आंदोलनों में से एक माना जाता है।

प्रश्न 5

आंध्र प्रदेश में चले शराब-विरोधी आंदोलन ने देश का ध्यान' कुछ गंभीर मुद्दों की तरफ खींचा। ये मुद्दे क्या थे? क्या आप शराब-विरोधी आंदोलन को महिला-आंदोलन का दर्जा दे सकते हैं? कारण बताएँ।
Solution:

आंध्र प्रदेश में चला शराब-विरोधी आंदोलन केवल शराब की खपत तक सीमित नहीं था, बल्कि इसने देश का ध्यान कई गंभीर सामाजिक और आर्थिक मुद्दों की ओर खींचा:

आंदोलन द्वारा उठाए गए गंभीर मुद्दे:

  1. पुरुषों का शारीरिक और मानसिक कमजोर होना: अत्यधिक शराब पीने के कारण पुरुष शारीरिक और मानसिक रूप से कमजोर हो रहे थे, जिसका सीधा असर उनकी खेतीबाड़ी और अन्य आर्थिक गतिविधियों में भागीदारी पर पड़ रहा था, जिससे कृषि उत्पादन प्रभावित हो रहा था।
  2. पारिवारिक आर्थिक दशा का बिगड़ना: शराब पर अत्यधिक खर्च के कारण परिवारों की आर्थिक स्थिति बुरी तरह प्रभावित हो रही थी। लोग उधार लेकर शराब पी रहे थे और कर्ज के बोझ तले दबे जा रहे थे।
  3. कर्ज के जाल में फँसना: शराब ठेकेदार अक्सर उधार देकर लोगों को शराब पीने के लिए प्रोत्साहित करते थे, जिसके कारण कई बार खेती की भूमि भी कर्ज चुकाने में चली जाती थी।
  4. महिलाओं पर काम का बोझ बढ़ना: पुरुष शराब में धुत रहने के कारण खेती और घरेलू कामों में ठीक से भाग नहीं ले पाते थे। इसके परिणामस्वरूप, घर के सारे काम और खेती-बाड़ी का बोझ महिलाओं के कंधों पर आ गया था।
  5. घरेलू हिंसा और असुरक्षा: अधिक शराब पीने से पुरुष घर में मारपीट करते थे, जिससे महिलाओं और बच्चों को दैनिक रूप से हिंसा का सामना करना पड़ता था। इससे घरों में तनाव का माहौल बनता था।
  6. पारिवारिक अर्थव्यवस्था और सामाजिक तनाव: शराबखोरी और मारपीट के कारण पारिवारिक अर्थव्यवस्था चरमराने लगी थी और घरों में तनाव का वातावरण फैल गया था, जिससे लगभग सभी महिलाएँ परेशान थीं।

शराब-विरोधी आंदोलन को महिला-आंदोलन का दर्जा देना:

हाँ, शराब-विरोधी आंदोलन को निश्चय ही महिला-आंदोलन का दर्जा दिया जा सकता है। इसके निम्नलिखित कारण हैं:

  1. महिलाओं की स्थिति में सुधार का लक्ष्य: यह आंदोलन मुख्य रूप से महिलाओं की दयनीय स्थिति में सुधार लाने के उद्देश्य से चलाया गया था। पुरुषों की शराब की लत के कारण महिलाओं को दोहरी मार झेलनी पड़ रही थी - एक तरफ काम का बोझ और दूसरी तरफ घरेलू हिंसा और आर्थिक तंगी।
  2. महिलाओं की सक्रिय भागीदारी: इस आंदोलन में महिलाओं की भागीदारी अत्यंत सक्रिय और निर्णायक थी। उन्होंने संगठित होकर शराब की बिक्री और खपत के खिलाफ आवाज उठाई।
  3. सामाजिक कुरीति के खिलाफ लड़ाई: शराबखोरी एक ऐसी सामाजिक कुरीति थी जिसका सबसे बुरा प्रभाव महिलाओं और बच्चों पर पड़ रहा था। इसलिए, इस आंदोलन को महिलाओं के अधिकारों और कल्याण के लिए एक लड़ाई के रूप में देखा जा सकता है।
  4. पारिवारिक और सामाजिक व्यवस्था की बहाली: आंदोलन का उद्देश्य केवल शराबबंदी नहीं था, बल्कि परिवारों में शांति, आर्थिक स्थिरता और सामाजिक व्यवस्था को बहाल करना भी था, जो सीधे तौर पर महिलाओं के जीवन की गुणवत्ता से जुड़ा था।

इस प्रकार, यह आंदोलन महिलाओं के नेतृत्व में, महिलाओं के मुद्दों को केंद्र में रखकर चलाया गया था, इसलिए इसे महिला-आंदोलन का दर्जा देना उचित है।

Common mistakes

  • सामाजिक आंदोलनों को केवल लोकतंत्र के लिए हानिकारक समझना।
  • जन आंदोलनों के वास्तविक उद्देश्यों और मांगों को गलत समझना।
  • आंदोलनों के प्रभाव को केवल तात्कालिक लाभ तक सीमित मानना।

Revision tips

  • प्रत्येक आंदोलन के मुख्य कारणों और मांगों को सूचीबद्ध करें।
  • आंदोलनों के सकारात्मक और नकारात्मक प्रभावों की तुलना करें।
  • जन आंदोलनों और राजनीतिक दलों के बीच के अंतर को समझें।
  • परीक्षा के दृष्टिकोण से महत्वपूर्ण आंदोलनों पर विशेष ध्यान दें।

Practice MCQs

Q1. चिपको आंदोलन के संदर्भ में निम्नलिखित में से कौन सा कथन गलत है?

Q2. भारतीय किसान यूनियन (बीकेयू) ने 1990 के दशक में मुख्य रूप से किन मुद्दों को उठाया?

Q3. आंध्र प्रदेश के शराब-विरोधी आंदोलन का मुख्य कारण क्या था?

Q4. सामाजिक आंदोलनों के बारे में निम्नलिखित में से कौन सा कथन सही है?

Frequently asked questions

चिपको आंदोलन का मुख्य उद्देश्य क्या था?

चिपको आंदोलन का मुख्य उद्देश्य वनों की व्यावसायिक कटाई का विरोध करना और स्थानीय समुदायों के प्राकृतिक संसाधनों पर नियंत्रण की मांग करना था।

भारतीय किसान यूनियन ने किन प्रमुख मांगों को उठाया था?

भारतीय किसान यूनियन ने बिजली की दरों में बढ़ोतरी का विरोध, गन्ने और गेहूं के सरकारी खरीद मूल्य में वृद्धि, कृषि उत्पादों की आवाजाही पर लगी पाबंदियों को हटाना और किसानों के लिए पेंशन का प्रावधान जैसी मांगें उठाईं।

आंध्र प्रदेश के शराब-विरोधी आंदोलन का महिलाओं की स्थिति पर क्या प्रभाव पड़ा?

इस आंदोलन ने पुरुषों की शराबखोरी के कारण महिलाओं पर बढ़ते काम के बोझ, आर्थिक तंगी और घरेलू हिंसा को उजागर किया और महिलाओं की स्थिति में सुधार की मांग की।

क्या सामाजिक आंदोलन भारतीय लोकतंत्र के लिए हानिकारक हैं?

नहीं, सामाजिक आंदोलन भारतीय लोकतंत्र को हानि नहीं पहुँचाते, बल्कि वे विभिन्न मुद्दों को उठाकर और जन भागीदारी को बढ़ावा देकर लोकतंत्र को मजबूत करते हैं।

जन आंदोलनों की सफलता का आधार क्या है?

जन आंदोलनों की सफलता का आधार अक्सर विभिन्न सामाजिक वर्गों के बीच उनका व्यापक जनाधार, सामूहिक प्रयास और अपनी मांगों को प्रभावी ढंग से उठाने की क्षमता होती है।

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