कक्षा 12 राजनीति विज्ञान: अध्याय 6 - लोकतांत्रिक व्यवस्था का संकट NCERT समाधान
यह पृष्ठ कक्षा 12 राजनीति विज्ञान के अध्याय 6, 'लोकतांत्रिक व्यवस्था का संकट' के लिए विस्तृत NCERT समाधान प्रदान करता है। इसमें 1975 के आपातकाल से संबंधित प्रमुख घटनाओं, जैसे कि 'संपूर्ण क्रांति' का आह्वान, 1974 की रेल हड़ताल, नक्सलवादी आंदोलन और इलाहाबाद उच्च न्यायालय के फैसले जैसे विषयों को शामिल किया गया है। समाधानों में आपातकाल की घोषणा के कारणों, शाह आयोग की नियुक्ति और उसके निष्कर्षों, तथा मध्यावधि चुनावों की आवश्यकता पर भी प्रकाश डाला गया है। यह सामग्री छात्रों को उस जटिल दौर की राजनीतिक घटनाओं को समझने में मदद करती है, जिसमें मौलिक अधिकारों का निलंबन और न्यायपालिका तथा सरकार के बीच संघर्ष शामिल था। ये समाधान छात्रों को परीक्षा की तैयारी के लिए एक स्पष्ट और संक्षिप्त मार्गदर्शिका प्रदान करते हैं।
Quick info
| Board | CBSE |
|---|---|
| Class | Class 12 |
| Subject | राजनीति विज्ञान |
| Session | 2026 |
| Language | Hindi |
| Type | NCERT Solutions |
| Chapter | 6. लोकतांत्रिक व्यवस्था का संकट |
Chapter summary
कक्षा 12 राजनीति विज्ञान के अध्याय 6, 'लोकतांत्रिक व्यवस्था का संकट' के ये NCERT समाधान, 1975 के आपातकाल के कारणों और परिणामों पर केंद्रित हैं। इसमें गुजरात और बिहार के छात्र आंदोलनों, 1974 की रेल हड़ताल, और न्यायपालिका-सरकार के बीच बढ़ते तनाव जैसे महत्वपूर्ण मुद्दों का विश्लेषण किया गया है। समाधानों में आपातकाल की घोषणा के सरकारी कारणों, शाह आयोग की जाँच और उसके निष्कर्षों, तथा जनता पार्टी के शासन के पतन के बाद 1980 में हुए मध्यावधि चुनावों की पृष्ठभूमि को भी स्पष्ट किया गया है। यह अध्याय उस दौर की राजनीतिक उथल-पुथल को समझने के लिए आवश्यक है।
Learning outcomes
- आपातकाल की घोषणा से संबंधित विभिन्न कथनों की सत्यता का मूल्यांकन करना।
- आपातकाल की घोषणा के प्रमुख कारणों और संदर्भों की पहचान करना।
- विभिन्न राजनीतिक घटनाओं और नेताओं के बीच सही मेल स्थापित करना।
- 1980 में मध्यावधि चुनाव कराने के कारणों का विश्लेषण करना।
- शाह आयोग की नियुक्ति के उद्देश्य और उसके निष्कर्षों को समझना।
- 1975 में राष्ट्रीय आपातकाल की घोषणा के सरकारी कारणों का वर्णन करना।
Topics covered
Paper topics
- आपातकाल की घोषणा
- आपातकाल के कारण
- गुजरात छात्र आंदोलन
- बिहार छात्र आंदोलन
- संपूर्ण क्रांति
- 1974 की रेल हड़ताल
- सरकार और न्यायपालिका के बीच संघर्ष
- शाह आयोग की नियुक्ति और निष्कर्ष
- जनता पार्टी सरकार
- 1980 के मध्यावधि चुनाव
- मौलिक अधिकारों का निलंबन
- आपातकाल के दौरान राजनीतिक घटनाएँ
Important topics
- 1975 के राष्ट्रीय आपातकाल की घोषणा के कारण
- शाह आयोग की नियुक्ति और उसके निष्कर्ष
- जयप्रकाश नारायण और 'संपूर्ण क्रांति'
- सरकार और न्यायपालिका के बीच संघर्ष
- आपातकाल के दौरान मौलिक अधिकारों की स्थिति
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Questions and Solutions
प्रश्न 1
- (क) आपातकाल की घोषणा 1975 में इंदिरा गाँधी ने की।
- (ख) आपातकाल में सभी मौलिक अधिकार निष्क्रिय हो गए।
- (ग) बिगड़ती हुई आर्थिक स्थिति के मद्देनज़र आपातकाल की घोषणा की गई थी।
- (घ) आपातकाल के दौरान विपक्ष के अनेक नेताओं को गिरफ्तार कर लिया गया।
- (ङ) सी.पी.आई. ने आपातकाल की घोषणा का समर्थन किया।
आपातकाल से संबंधित दिए गए कथनों का मूल्यांकन इस प्रकार है:
- (क) गलत। आपातकाल की घोषणा 25 जून, 1975 को की गई थी, और यह निर्णय तत्कालीन प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी के नेतृत्व वाली सरकार द्वारा लिया गया था।
- (ख) सही। आपातकाल के दौरान, अनुच्छेद 20 और 21 को छोड़कर, अन्य सभी मौलिक अधिकार निलंबित कर दिए गए थे, जिससे वे निष्क्रिय हो गए थे।
- (ग) गलत। यद्यपि आर्थिक समस्याएँ मौजूद थीं, आपातकाल की घोषणा का मुख्य कारण 'आंतरिक गड़बड़ी' बताया गया था, न कि विशेष रूप से बिगड़ती आर्थिक स्थिति।
- (घ) सही। आपातकाल के दौरान, सरकार ने कई विपक्षी नेताओं, कार्यकर्ताओं और असंतुष्टों को गिरफ्तार किया था ताकि विरोध प्रदर्शनों को दबाया जा सके।
- (ङ) सही। कम्युनिस्ट पार्टी ऑफ इंडिया (सी.पी.आई.) ने उस समय की कांग्रेस सरकार का समर्थन किया था और आपातकाल की घोषणा का भी समर्थन किया था।
प्रश्न 2
- (क) 'संपूर्ण क्रांति' का आह्वान
- (ख) 1974 की रेल-हड़ताल
- (ग) नक्सलवादी आंदोलन
- (घ) इलाहाबाद उच्च न्यायालय का फैसला
- (ङ) शाह आयोग की रिपोर्ट के निष्कर्ष
आपातकाल की घोषणा के संदर्भ से जो मेल नहीं खाता है, वह है:
(ग) नक्सलवादी आंदोलन।
स्पष्टीकरण:
'संपूर्ण क्रांति' का आह्वान (जयप्रकाश नारायण द्वारा), 1974 की रेल-हड़ताल (जॉर्ज फर्नांडिस के नेतृत्व में), और इलाहाबाद उच्च न्यायालय का फैसला (जिसमें इंदिरा गांधी के चुनाव को अमान्य घोषित किया गया था) ये सभी घटनाएँ आपातकाल की घोषणा के लिए महत्वपूर्ण पृष्ठभूमि तैयार कर रही थीं। शाह आयोग की रिपोर्ट आपातकाल के बाद की जाँच से संबंधित है, न कि घोषणा के कारणों से। नक्सलवादी आंदोलन एक अलग सामाजिक-राजनीतिक घटना थी जिसका आपातकाल की घोषणा से सीधा संबंध नहीं था, यद्यपि यह उस समय की अशांति का हिस्सा हो सकता था।
प्रश्न 3
- (क) संपूर्ण क्रांति (i) इंदिरा गाँधी
- (ख) गरीबी हटाओ (ii) जयप्रकाश नारायण
- (ग) छात्र आंदोलन (iii) बिहार आंदोलन
- (घ) रेल हड़ताल (iv) जॉर्ज फर्नांडिस
निम्नलिखित का सही मेल इस प्रकार है:
- (क) संपूर्ण क्रांति - (ii) जयप्रकाश नारायण
- (ख) गरीबी हटाओ - (i) इंदिरा गाँधी
- (ग) छात्र आंदोलन - (iii) बिहार आंदोलन
- (घ) रेल हड़ताल - (iv) जॉर्ज फर्नांडिस
स्पष्टीकरण:
'संपूर्ण क्रांति' का नारा जयप्रकाश नारायण ने दिया था। 'गरीबी हटाओ' इंदिरा गांधी का एक प्रमुख चुनावी नारा था। छात्र आंदोलन, विशेष रूप से बिहार में, एक महत्वपूर्ण राजनीतिक घटना थी। जॉर्ज फर्नांडिस ने 1974 की रेल हड़ताल का नेतृत्व किया था।
प्रश्न 4
1980 में लोकसभा के लिए मध्यावधि चुनाव करवाने के पीछे मुख्य कारण जनता पार्टी की सरकार का पतन था। जनता पार्टी, जो विभिन्न गैर-कांग्रेसी दलों का एक गठबंधन थी, इंदिरा गांधी के शासन के विरोध में बनी थी।
मोरारजी देसाई के नेतृत्व वाली जनता पार्टी सरकार केवल 18 महीने ही सत्ता में रह सकी क्योंकि आंतरिक कलह और गठबंधन के दलों के बीच मतभेदों के कारण यह बिखर गई। इसके बाद, चौधरी चरण सिंह के नेतृत्व में एक नई सरकार बनी, जिसे कांग्रेस पार्टी ने बाहर से समर्थन दिया। हालाँकि, कांग्रेस ने जल्द ही अपना समर्थन वापस ले लिया, जिससे चरण सिंह की सरकार भी अल्पमत में आ गई और मात्र चार महीने तक ही चल सकी। सरकार के इस अस्थिरता के कारण, 1980 में लोकसभा को भंग कर दिया गया और नए सिरे से चुनाव कराने पड़े।
प्रश्न 5
जनता पार्टी की सरकार ने 1977 में शाह आयोग की नियुक्ति आपातकाल के दौरान हुई कथित ज्यादतियों, कानूनों के उल्लंघन और शक्तियों के दुरुपयोग की जाँच के लिए की थी। इस आयोग की अध्यक्षता सर्वोच्च न्यायालय के सेवानिवृत्त मुख्य न्यायाधीश श्री न्यायमूर्ति जे.सी. शाह ने की थी।
आयोग की नियुक्ति का उद्देश्य:
आपातकाल के दौरान सरकार द्वारा की गई कार्रवाइयों, जैसे कि नागरिक अधिकारों का हनन, राजनीतिक विरोधियों का दमन, और सरकारी मशीनरी के दुरुपयोग की निष्पक्ष जाँच करवाना।
शाह आयोग के निष्कर्ष:
शाह आयोग ने अपनी रिपोर्ट में कई महत्वपूर्ण निष्कर्ष निकाले:
- आयोग ने पाया कि आपातकाल के दौरान सरकारी मशीनरी का बड़े पैमाने पर दुरुपयोग किया गया था।
- अधिकांश आदेश मौखिक रूप से दिए जाते थे, जिससे जवाबदेही तय करना मुश्किल हो जाता था।
- नागरिक अधिकारों का उल्लंघन हुआ था और नौकरशाही ने अपनी शक्तियों का नियमों के विरुद्ध प्रयोग किया था।
- पुलिस संगठन ने आम नागरिकों पर जुल्म ढाए थे और अपनी स्वतंत्र कार्यशैली को त्याग दिया था।
- नौकरशाही ने नियमों के अनुसार कार्य करने के बजाय सरकार के निर्देशों का पालन किया।
श्रीमती इंदिरा गांधी को भी गवाही के लिए बुलाया गया था, लेकिन उन्होंने आयोग के किसी भी प्रश्न का उत्तर देने या अपनी सफाई देने से इनकार कर दिया था।
प्रश्न 6
25 जून, 1975 को सरकार द्वारा राष्ट्रीय आपातकाल की घोषणा के लिए मुख्य रूप से 'आंतरिक गड़बड़ी' को कारण बताया गया था। इसके अतिरिक्त, निम्नलिखित प्रमुख कारण थे जिन्होंने इस घोषणा की पृष्ठभूमि तैयार की:
- गुजरात में छात्र आंदोलन (जनवरी 1974): इस आंदोलन ने राष्ट्रीय राजनीति को प्रभावित किया। आवश्यक वस्तुओं की बढ़ती कीमतों और भ्रष्टाचार के खिलाफ छात्रों ने राज्यव्यापी आंदोलन छेड़ दिया, जिसका नेतृत्व विपक्षी दल कर रहे थे। आंदोलन के उग्र होने पर राष्ट्रपति शासन लगाया गया। केंद्र सरकार चुनाव कराने में हिचकिचा रही थी, लेकिन मोरारजी देसाई के अनशन की चेतावनी के बाद जून 1975 में चुनाव हुए, जिसमें कांग्रेस को हार का सामना करना पड़ा। इससे केंद्र सरकार की छवि धूमिल हुई।
- बिहार में छात्र आंदोलन (मार्च 1974): यह आंदोलन भी बढ़ती कीमतों, खाद्यान्न की अनुपलब्धता, बेरोजगारी और भ्रष्टाचार के खिलाफ था। छात्रों ने जयप्रकाश नारायण से नेतृत्व करने का आग्रह किया। जयप्रकाश नारायण ने 'संपूर्ण क्रांति' का आह्वान किया, जिसका उद्देश्य वास्तविक लोकतंत्र की स्थापना करना था। इस आंदोलन ने राजनीतिक रूप ले लिया और बिहार सरकार की बर्खास्तगी की माँग की गई, जो धीरे-धीरे राष्ट्रव्यापी हो गया।
- 1974 की रेल हड़ताल: जॉर्ज फर्नांडिस के नेतृत्व में रेलवे कर्मचारियों द्वारा बोनस और सेवा शर्तों को लेकर की गई यह हड़ताल राष्ट्रव्यापी थी। इसने पूरे देश के जनजीवन को ठप्प कर दिया और सरकार के विरुद्ध असंतोष को बढ़ाया। सरकार ने इसे असंवैधानिक घोषित किया और हड़ताल बिना किसी समझौते के वापस ले ली गई, लेकिन इसने आम जनता और व्यापारियों में असंतोष पैदा किया।
- सरकार और न्यायपालिका के बीच संघर्ष: संविधान लागू होने के बाद से ही न्यायपालिका और सरकार के बीच अधिकारों को लेकर मतभेद थे। इंदिरा गांधी के कार्यकाल में यह संघर्ष तीखा हो गया। संसद की सर्वोच्चता और मौलिक अधिकारों में संशोधन के अधिकार को लेकर विवाद था। केशवानंद भारती मामले (1973) में सर्वोच्च न्यायालय ने कहा कि संसद संविधान के मूल ढांचे को बदले बिना संशोधन कर सकती है। इंदिरा गांधी ने न्यायपालिका पर दबाव बनाने का प्रयास किया, जिसके तहत वरिष्ठतम न्यायाधीशों को दरकिनार कर ए.एन. रे को मुख्य न्यायाधीश नियुक्त किया गया, जिसकी व्यापक निंदा हुई।
इन सभी घटनाओं ने देश में एक राजनीतिक अस्थिरता और असंतोष का माहौल बनाया, जिसे सरकार ने आपातकाल की घोषणा का आधार बनाया।
Common mistakes
- आपातकाल की घोषणा के कारणों को गलत समझना या केवल एक कारण पर ध्यान केंद्रित करना।
- विभिन्न राजनीतिक घटनाओं और नेताओं के बीच गलत मिलान करना।
- शाह आयोग की रिपोर्ट के निष्कर्षों को गलत तरीके से प्रस्तुत करना।
- आपातकाल के दौरान मौलिक अधिकारों की स्थिति को लेकर भ्रमित होना।
Revision tips
- आपातकाल से संबंधित मुख्य घटनाओं की एक कालानुक्रमिक सूची बनाएं।
- शाह आयोग की नियुक्ति और उसके निष्कर्षों को अच्छी तरह समझें।
- विभिन्न राजनीतिक आंदोलनों (जैसे छात्र आंदोलन, रेल हड़ताल) और उनके नेताओं के बीच संबंध स्थापित करें।
- आपातकाल की घोषणा के सरकारी कारणों और विपक्षी दलों के तर्कों के बीच अंतर को समझें।
Practice MCQs
Q1. आपातकाल की घोषणा के संदर्भ से कौन-सा मेल नहीं खाता है?
Explanation: नक्सलवादी आंदोलन आपातकाल की घोषणा का सीधा कारण नहीं था, जबकि अन्य विकल्प उस समय की प्रमुख राजनीतिक घटनाएँ थीं जिन्होंने आपातकाल की पृष्ठभूमि तैयार की।
Q2. शाह आयोग की नियुक्ति का मुख्य उद्देश्य क्या था?
Explanation: शाह आयोग की नियुक्ति जनता पार्टी सरकार द्वारा आपातकाल के दौरान हुई ज्यादतियों, कानूनों के उल्लंघन और शक्तियों के दुरुपयोग की जाँच के लिए की गई थी।
Q3. 1975 में राष्ट्रीय आपातकाल की घोषणा का एक मुख्य सरकारी कारण क्या बताया गया था?
Explanation: सरकार ने 25 जून, 1975 को 'आंतरिक गड़बड़ी' के आधार पर राष्ट्रीय आपातकाल की घोषणा की थी।
Q4. निम्नलिखित में से कौन-सा कथन आपातकाल के बारे में सही है?
Explanation: आपातकाल के दौरान, अनुच्छेद 20 और 21 को छोड़कर, अन्य सभी मौलिक अधिकार निलंबित कर दिए गए थे, जिससे वे निष्क्रिय हो गए थे।
Q5. जयप्रकाश नारायण ने किस आंदोलन का नेतृत्व किया था?
Explanation: जयप्रकाश नारायण ने बिहार में छात्र आंदोलन का नेतृत्व स्वीकार करते हुए 'संपूर्ण क्रांति' का आह्वान किया था, जिसका उद्देश्य वास्तविक लोकतंत्र की स्थापना करना था।
Frequently asked questions
कक्षा 12 राजनीति विज्ञान के अध्याय 6 का मुख्य विषय क्या है?
कक्षा 12 राजनीति विज्ञान के अध्याय 6, 'लोकतांत्रिक व्यवस्था का संकट', का मुख्य विषय 1975 में भारत में घोषित राष्ट्रीय आपातकाल और उसके आसपास की राजनीतिक घटनाओं पर केंद्रित है।
आपातकाल की घोषणा के मुख्य कारण क्या थे?
सरकार ने 'आंतरिक गड़बड़ी' को आपातकाल की घोषणा का मुख्य कारण बताया था, लेकिन इसके पीछे गुजरात और बिहार के छात्र आंदोलन, 1974 की रेल हड़ताल, और इलाहाबाद उच्च न्यायालय के फैसले जैसी घटनाएँ भी जिम्मेदार थीं।
शाह आयोग की नियुक्ति क्यों की गई थी?
जनता पार्टी की सरकार ने 1977 में शाह आयोग की नियुक्ति आपातकाल के दौरान हुई ज्यादतियों, कानूनों के उल्लंघन और शक्तियों के दुरुपयोग की जाँच के लिए की थी।
आपातकाल के दौरान सभी मौलिक अधिकार समाप्त कर दिए गए थे?
नहीं, आपातकाल के दौरान अनुच्छेद 20 (अपराधों के लिए दोषसिद्धि के संबंध में संरक्षण) और अनुच्छेद 21 (जीवन और व्यक्तिगत स्वतंत्रता की सुरक्षा) को छोड़कर अन्य सभी मौलिक अधिकार निलंबित कर दिए गए थे।
यह समाधान छात्रों की परीक्षा की तैयारी में कैसे मदद करते हैं?
ये समाधान प्रत्येक प्रश्न के विस्तृत और स्पष्ट उत्तर प्रदान करते हैं, जिससे छात्रों को अध्याय की अवधारणाओं को गहराई से समझने और परीक्षा में पूछे जाने वाले विभिन्न प्रकार के प्रश्नों का उत्तर देने में मदद मिलती है।
क्या इन समाधानों में केवल तथ्यात्मक जानकारी है?
नहीं, इन समाधानों में तथ्यात्मक जानकारी के साथ-साथ घटनाओं के विश्लेषण, कारणों और परिणामों की व्याख्या भी शामिल है, जो छात्रों को विषय की व्यापक समझ प्रदान करती है।
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