कक्षा 12 राजनीति विज्ञान अध्याय 4: सत्ता के वैकल्पिक केंद्र - NCERT समाधान

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यह पृष्ठ कक्षा 12 राजनीति विज्ञान के अध्याय 4, 'सत्ता के वैकल्पिक केंद्र' के लिए विस्तृत NCERT समाधान प्रदान करता है। इसमें आसियान (ASEAN) और यूरोपीय संघ (EU) जैसे वैकल्पिक सत्ता केंद्रों के उदय, उनकी संरचना, उद्देश्य और कार्यप्रणाली पर गहन चर्चा शामिल है। समाधान चीन की अर्थव्यवस्था के परिवर्तन, 'खुले द्वार' की नीति और क्षेत्रीय संगठनों के महत्व जैसे महत्वपूर्ण विषयों को भी स्पष्ट करते हैं। प्रत्येक प्रश्न का उत्तर सरल भाषा में, चरण-दर-चरण स्पष्टीकरण के साथ दिया गया है, जिससे छात्रों को अवधारणाओं को समझने और परीक्षा की तैयारी में मदद मिलेगी। यह संसाधन छात्रों को वैश्विक राजनीति में बदलते शक्ति संतुलन को समझने में सहायता करता है।

Quick info

BoardCBSE
ClassClass 12
Subjectराजनीति विज्ञान
Session2026
LanguageHindi
TypeNCERT Solutions
Chapter4. सत्ता के वैकल्पिक केंद्र

Chapter summary

कक्षा 12 राजनीति विज्ञान के अध्याय 4, 'सत्ता के वैकल्पिक केंद्र' के ये NCERT समाधान, शीत युद्ध के बाद उभरे नए शक्ति केंद्रों पर केंद्रित हैं। इसमें आसियान (ASEAN) और यूरोपीय संघ (EU) जैसे संगठनों की स्थापना, उनके उद्देश्य, संरचना और कार्यप्रणाली का विश्लेषण किया गया है। समाधान चीन की आर्थिक सुधारों और 'खुले द्वार' की नीति के प्रभाव को भी विस्तार से बताते हैं। यह अध्याय छात्रों को वैश्विक राजनीति में बहुध्रुवीयता की समझ विकसित करने में मदद करता है।

Learning outcomes

  • आसियान (ASEAN) और यूरोपीय संघ (EU) जैसे वैकल्पिक सत्ता केंद्रों के गठन और उद्देश्यों को समझना।
  • आसियान शैली (ASEAN Way) की अवधारणा और इसके महत्व का विश्लेषण करना।
  • चीन की अर्थव्यवस्था में हुए सुधारों और 'खुले द्वार' की नीति के प्रभावों को पहचानना।
  • क्षेत्रीय संगठनों के निर्माण के कारणों और उनके लाभों का वर्णन करना।
  • वैश्विक राजनीति में सत्ता के बदलते स्वरूप और बहुध्रुवीयता की अवधारणा को समझना।

Topics covered

Paper topics

  • सत्ता के वैकल्पिक केंद्र
  • आसियान (ASEAN)
  • यूरोपीय संघ (EU)
  • आसियान शैली (ASEAN Way)
  • आसियान विजन-2020
  • आसियान सुरक्षा समुदाय
  • आसियान सामाजिक-सांस्कृतिक समुदाय
  • चीन की अर्थव्यवस्था
  • 'खुले द्वार' की नीति
  • क्षेत्रीय संगठनों के उद्देश्य
  • भौगोलिक निकटता का प्रभाव
  • वैश्विक शक्ति संतुलन

Important topics

  • आसियान (ASEAN) और यूरोपीय संघ (EU) की संरचना और उद्देश्य
  • चीन की 'खुले द्वार' की नीति और आर्थिक सुधार
  • आसियान शैली (ASEAN Way) की अवधारणा
  • क्षेत्रीय संगठनों के गठन के कारण और महत्व
  • सत्ता के वैकल्पिक केंद्रों का वैश्विक राजनीति पर प्रभाव

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Questions and Solutions

प्रश्न 1

निम्नलिखित को तिथि के हिसाब से क्रम दें: (क) विश्व व्यापार संगठन में चीन का प्रवेश, (ख) यूरोपीय आर्थिक समुदाय की स्थापना, (ग) यूरोपीय संघ की स्थापना, (घ) आसियान क्षेत्रीय मंच की स्थापना।
Solution:

इन घटनाओं को उनकी तिथि के अनुसार क्रमबद्ध करने पर निम्नलिखित क्रम प्राप्त होता है:

  1. (ख) यूरोपीय आर्थिक समुदाय की स्थापना: 1957 (रोम की संधि के माध्यम से)
  2. (ग) यूरोपीय संघ की स्थापना: 1993 (मास्ट्रिच संधि के माध्यम से, जो यूरोपीय आर्थिक समुदाय का विस्तार था)
  3. (घ) आसियान क्षेत्रीय मंच की स्थापना: 1994
  4. (क) विश्व व्यापार संगठन में चीन का प्रवेश: 2001

अतः, सही कालानुक्रमिक क्रम है: (ख), (ग), (घ), (क)।

प्रश्न 2

'ASEAN way' या आसियान शैली क्या है?
Solution:

'आसियान शैली' (ASEAN Way) आसियान (Association of Southeast Asian Nations) के सदस्य देशों के बीच कामकाज की एक अनूठी और अनौपचारिक शैली को संदर्भित करती है। इसकी मुख्य विशेषताएँ निम्नलिखित हैं:

  • अनौपचारिक और सहयोगपूर्ण कामकाज: यह शैली सदस्य देशों के बीच औपचारिक नियमों और कठोर प्रक्रियाओं के बजाय आपसी विश्वास, परामर्श और सहयोग पर जोर देती है।
  • टकराव रहित दृष्टिकोण: आसियान शैली में सदस्य देशों के बीच किसी भी प्रकार के टकराव या विवाद को बातचीत और कूटनीति के माध्यम से हल करने का प्रयास किया जाता है, न कि सैन्य या दबाव की रणनीति से।
  • राष्ट्रीय संप्रभुता का सम्मान: यह शैली सदस्य देशों की राष्ट्रीय संप्रभुता, समानता और अहस्तक्षेप के सिद्धांतों का सम्मान करती है।
  • धीमी और स्थिर प्रगति: आसियान शैली में निर्णय लेने की प्रक्रिया धीमी हो सकती है क्योंकि इसमें सभी सदस्य देशों की सहमति आवश्यक होती है, लेकिन यह दीर्घकालिक स्थिरता और सहयोग सुनिश्चित करती है।

यह शैली आसियान को यूरोपीय संघ जैसे अधिक एकीकृत और अधिराष्ट्रीय संगठनों से अलग करती है, और इसे दक्षिण-पूर्व एशिया में शांति और स्थिरता बनाए रखने में महत्वपूर्ण माना जाता है।

प्रश्न 3

इनमें से किसने 'खुले द्वार' की नीति अपनाई?
Solution:

(क) चीन

1978 में, चीन के तत्कालीन नेता देंग श्याओ पेंग ने देश की अर्थव्यवस्था के आधुनिकीकरण के लिए 'खुले द्वार की नीति' की घोषणा की। इस नीति का उद्देश्य विदेशी पूंजी, प्रौद्योगिकी और व्यापार को आकर्षित करके चीन की अर्थव्यवस्था को खोलना था, जिससे तीव्र आर्थिक विकास संभव हो सके।

प्रश्न 4

खाली स्थान भरें:
Solution:

यहाँ खाली स्थानों को उपयुक्त शब्दों से भरा गया है:

  • (क) 1972 में भारत और चीन के बीच अरुणाचल प्रदेश और लद्दाख को लेकर सीमावर्ती तनाव की स्थितियाँ उत्पन्न हुई थीं। (नोट: मूल स्रोत में 'लड़ाई' का उल्लेख है, लेकिन ऐतिहासिक संदर्भ में यह सीमा पर तनाव और विवादों को दर्शाता है।)
  • (ख) आसियान क्षेत्रीय मंच के कामों में आर्थिक विकास को तेज करना, सामाजिक और सांस्कृतिक विकास प्राप्त करना और क्षेत्रीय शांति व स्थायित्व को बढ़ावा देना शामिल है।
  • (ग) चीन ने 1972 में संयुक्त राज्य अमेरिका के साथ दोतरफा संबंध शुरू करके अपना एकांतवास समाप्त किया।
  • (घ) मार्शल योजना के प्रभाव से 1948 में यूरोपीय आर्थिक सहयोग संगठन की स्थापना हुई।
  • (ङ) आसियान सुरक्षा समुदाय आसियान का एक स्तम्भ है जो इसके सदस्य देशों की सुरक्षा के मामले देखता है।

प्रश्न 5

क्षेत्रीय संगठनों को बनाने के उद्देश्य क्या हैं?
Solution:

क्षेत्रीय संगठनों को बनाने के प्रमुख उद्देश्य निम्नलिखित हैं:

  1. ऐतिहासिक दुश्मनी को समाप्त करना और सहयोग बढ़ाना: क्षेत्रीय संगठनों का एक महत्वपूर्ण उद्देश्य अपने क्षेत्र के देशों के बीच मौजूद पुरानी दुश्मनी और अविश्वास को समाप्त करना है। इसके बजाय, वे आपसी सहयोग को बढ़ावा देते हैं ताकि सदस्य देश मिलकर अपनी कमजोरियों और कठिनाइयों का समाधान ढूंढ सकें।
  2. शांतिपूर्ण और सहकारी व्यवस्था का विकास: ये संगठन सदस्य राष्ट्रों के बीच अधिक शांतिपूर्ण और सहकारी क्षेत्रीय व्यवस्था स्थापित करने का प्रयास करते हैं। इसका लक्ष्य क्षेत्र में स्थिरता और सुरक्षा सुनिश्चित करना है।
  3. आर्थिक एकीकरण और विकास: क्षेत्रीय संगठन सदस्य देशों की अर्थव्यवस्थाओं को एक साथ लाने और सामूहिक आर्थिक विकास को बढ़ावा देने का कार्य करते हैं। यूरोपीय संघ और आसियान इसके प्रमुख उदाहरण हैं, जिन्होंने अपने सदस्य देशों के बीच व्यापार, निवेश और आर्थिक सहयोग को बढ़ाया है।
  4. साझा हितों की पूर्ति: सदस्य देश अपने साझा हितों, जैसे कि सुरक्षा, पर्यावरण संरक्षण, या सांस्कृतिक आदान-प्रदान, को प्रभावी ढंग से पूरा करने के लिए एक साथ आते हैं।

संक्षेप में, क्षेत्रीय संगठन शांति, सहयोग और साझा समृद्धि के लिए एक मंच प्रदान करते हैं।

प्रश्न 6

भौगोलिक निकटता का क्षेत्रीय संगठनों के गठन पर क्या असर होता है?
Solution:

भौगोलिक निकटता क्षेत्रीय संगठनों के गठन और उनके कामकाज पर गहरा प्रभाव डालती है। इसके मुख्य प्रभाव निम्नलिखित हैं:

  • संगठन की भावना का विकास: जब देश भौगोलिक रूप से एक-दूसरे के करीब होते हैं, तो उनमें स्वाभाविक रूप से जुड़ाव और सहयोग की भावना विकसित होती है। यह निकटता उन्हें एक साझा पहचान और उद्देश्य की ओर बढ़ने के लिए प्रेरित करती है।
  • संघर्ष में कमी और सहयोग में वृद्धि: भौगोलिक निकटता अक्सर देशों के बीच आपसी समझ को बढ़ाती है और संघर्ष की संभावना को कम करती है। इसके परिणामस्वरूप, वे एक-दूसरे के साथ अधिक सहयोग करने लगते हैं, जिससे शांतिपूर्ण संबंध स्थापित होते हैं।
  • आर्थिक सहयोग और व्यापार को प्रोत्साहन: निकटता के कारण देशों के बीच परिवहन और संचार आसान हो जाता है, जो अंतर्देशीय व्यापार और आर्थिक सहयोग को प्रोत्साहित करता है। इससे सदस्य राष्ट्रों के बीच वस्तुओं और सेवाओं का आदान-प्रदान सुगम होता है।
  • सामूहिक सुरक्षा और संसाधन आवंटन: भौगोलिक रूप से निकट देश मिलकर एक सामूहिक सुरक्षा व्यवस्था बना सकते हैं, जिससे प्रत्येक देश पर सुरक्षा का बोझ कम होता है। वे अपने संसाधनों को रक्षा के बजाय कृषि, उद्योग, शिक्षा, स्वास्थ्य और बुनियादी ढांचे जैसे विकास के क्षेत्रों में लगा सकते हैं, जिससे जीवन स्तर में सुधार होता है।
  • एकीकरण और सामान्य सरकार की संभावना: मजबूत क्षेत्रीय संगठन देशों के बीच मेल-मिलाप को बढ़ावा देते हैं और भविष्य में अधिक गहरे एकीकरण या यहाँ तक कि एक सामान्य सरकार के गठन के लिए अनुकूल वातावरण बना सकते हैं।
  • परिवहन और संचार संपर्क: क्षेत्रीय संगठन सदस्य राष्ट्रों को सड़क, रेल और अन्य संचार माध्यमों से जोड़ने में मदद करते हैं, जिससे लोगों और विचारों का आदान-प्रदान आसान हो जाता है।

इस प्रकार, भौगोलिक निकटता क्षेत्रीय संगठनों के निर्माण और उनकी सफलता के लिए एक महत्वपूर्ण आधार प्रदान करती है।

प्रश्न 7

'आसियान विजन-2020' की मुख्य-मुख्य बातें क्या हैं?
Solution:

'आसियान विजन-2020' आसियान (Association of Southeast Asian Nations) द्वारा भविष्य के लिए निर्धारित एक महत्वाकांक्षी योजना थी, जिसका उद्देश्य संगठन को और अधिक मजबूत, एकीकृत और वैश्विक मंच पर प्रभावशाली बनाना था। इसकी मुख्य बातें निम्नलिखित थीं:

  • बहिर्मुखी भूमिका: विजन-2020 ने आसियान की अंतर्राष्ट्रीय समुदाय में एक सक्रिय और बहिर्मुखी भूमिका पर जोर दिया। इसका अर्थ था कि आसियान केवल अपने क्षेत्र तक सीमित न रहकर वैश्विक मुद्दों पर भी अपनी राय रखेगा और समाधान में योगदान देगा।
  • बातचीत को बढ़ावा: आसियान ने टकराव की जगह बातचीत और कूटनीति को बढ़ावा देने की अपनी नीति को जारी रखा। इसी नीति के तहत आसियान ने कंबोडिया के संघर्ष को सुलझाने और पूर्वी तिमोर के संकट को संभालने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।
  • नियमित वार्षिक बैठकें: दक्षिण-पूर्व एशियाई सहयोग पर बातचीत को मजबूत करने के लिए 1999 से नियमित रूप से वार्षिक बैठकें आयोजित करने का निर्णय लिया गया।
  • आसियान समुदाय का निर्माण: यह विजन आसियान समुदाय के निर्माण की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम था, जिसमें आर्थिक, सामाजिक और सुरक्षा संबंधी आयाम शामिल थे। यह यूरोपीय संघ की तरह एक अधिक एकीकृत संगठन बनाने की दिशा में एक प्रयास था।
  • क्षेत्रीय शांति और स्थिरता: आसियान ने अपने क्षेत्र में शांति, स्थिरता और समृद्धि को बढ़ावा देने के लिए अपनी प्रतिबद्धता दोहराई।

यह विजन आसियान की बदलती वैश्विक परिदृश्य में अपनी प्रासंगिकता बनाए रखने और एक प्रमुख क्षेत्रीय शक्ति के रूप में उभरने की आकांक्षा को दर्शाता है।

प्रश्न 8

आसियान समुदाय के मुख्य स्तंभों और उनके उद्देश्यों के बारे में बताएँ।
Solution:

आसियान समुदाय (ASEAN Community) के तीन मुख्य स्तंभ हैं, जिन्हें 2003 में स्थापित करने की दिशा में कदम उठाए गए थे। ये स्तंभ आसियान को एक एकीकृत और प्रभावशाली संगठन बनाने के उद्देश्य से बनाए गए थे:

  1. आसियान सुरक्षा समुदाय (ASEAN Security Community - ASC):
    • उद्देश्य: इसका मुख्य उद्देश्य सदस्य देशों के बीच शांति, सुरक्षा और स्थिरता बनाए रखना है। यह क्षेत्रीय विवादों को सैनिक टकराव तक न ले जाने की सहमति पर आधारित है। यह सदस्य देशों की विदेश और सुरक्षा नीतियों में तालमेल बिठाने का भी प्रयास करता है। 1994 में स्थापित आसियान क्षेत्रीय मंच (ARF) इसी दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम था।
  2. आसियान आर्थिक समुदाय (ASEAN Economic Community - AEC):
    • उद्देश्य: इसका लक्ष्य एक एकल बाजार और उत्पादन आधार का निर्माण करना है, जिसमें वस्तुओं, सेवाओं, निवेश, और कुशल श्रमिकों का मुक्त प्रवाह हो सके। यह सदस्य देशों के बीच आर्थिक प्रतिस्पर्धा को बढ़ावा देना और उन्हें वैश्विक अर्थव्यवस्था में अधिक प्रतिस्पर्धी बनाना चाहता है।
  3. आसियान सामाजिक-सांस्कृतिक समुदाय (ASEAN Socio-Cultural Community - ASCC):
    • उद्देश्य: यह स्तंभ सदस्य देशों के बीच आपसी समझ, सहयोग और सांस्कृतिक आदान-प्रदान को बढ़ावा देता है। इसका उद्देश्य एक साझा आसियान पहचान का निर्माण करना और मानव संसाधनों का विकास करना है, ताकि सदस्य देशों के नागरिकों का जीवन स्तर सुधर सके। यह पर्यावरण संरक्षण और सतत विकास जैसे मुद्दों पर भी ध्यान केंद्रित करता है।

इन तीनों स्तंभों के माध्यम से आसियान एक एकीकृत, शांतिपूर्ण, समृद्ध और गतिशील समुदाय बनने का प्रयास कर रहा है, जो वैश्विक मंच पर अपनी एक विशिष्ट पहचान रखता है।

प्रश्न 9

आज की चीनी अर्थव्यवस्था नियंत्रित अर्थव्यवव्या से किस तरह अलग है?
Solution:

आज की चीनी अर्थव्यवस्था 1949 के बाद स्थापित नियंत्रित समाजवादी अर्थव्यवस्था से कई मायनों में भिन्न है। यह परिवर्तन चीन के आर्थिक सुधारों और 'खुले द्वार की नीति' का परिणाम है:

  1. आर्थिक मॉडल में बदलाव:
    • पूर्व (नियंत्रित अर्थव्यवस्था): 1949 के बाद चीन ने सोवियत मॉडल पर आधारित एक नियंत्रित समाजवादी अर्थव्यवस्था अपनाई। इसमें खेती से पूंजी लेकर सरकारी बड़े उद्योगों को खड़ा करने पर जोर था। अर्थव्यवस्था पूरी तरह से राज्य के नियंत्रण में थी, और निजी संपत्ति व बाजार की भूमिका नगण्य थी।
    • वर्तमान (बाजार-उन्मुख अर्थव्यवस्था): 1978 के बाद, चीन ने धीरे-धीरे बाजार-उन्मुख सुधारों को अपनाया। अब अर्थव्यवस्था में निजी उद्यमों, विदेशी निवेश और बाजार शक्तियों की महत्वपूर्ण भूमिका है। हालाँकि, राज्य अभी भी अर्थव्यवस्था के कुछ प्रमुख क्षेत्रों को नियंत्रित करता है।
  2. खुले द्वार की नीति और विदेशी निवेश:
    • पूर्व: चीन ने पूँजीवादी दुनिया से अपने रिश्ते तोड़ लिए थे और विदेशी व्यापार व निवेश बहुत सीमित था।
    • वर्तमान: चीन ने 'खुले द्वार की नीति' के तहत विदेशी पूंजी और प्रौद्योगिकी को आकर्षित किया है। विशेष आर्थिक क्षेत्रों (SEZs) की स्थापना ने विदेशी निवेश को बढ़ावा दिया है।
  3. आधुनिकीकरण और विकास दर:
    • पूर्व: विकास दर धीमी थी, और जनसंख्या वृद्धि लाभों को कम कर रही थी। औद्योगिक उत्पादन धीमा था और प्रति व्यक्ति आय कम थी।
    • वर्तमान: चीन दुनिया में सबसे तेजी से बढ़ती अर्थव्यवस्थाओं में से एक बन गया है। इसने कृषि, उद्योग, सेना और विज्ञान-प्रौद्योगिकी के क्षेत्रों में अभूतपूर्व आधुनिकीकरण हासिल किया है।
  4. निजीकरण और चरणबद्ध सुधार:
    • पूर्व: अर्थव्यवस्था पूरी तरह से राज्य के स्वामित्व में थी।
    • वर्तमान: चीन ने चरणबद्ध तरीके से सुधार किए हैं। 1982 में खेती का निजीकरण किया गया और 1998 में उद्योगों का। व्यापार संबंधी अवरोधों को केवल विशेष क्षेत्रों के लिए हटाया गया है।
  5. वैश्विक प्रभाव:
    • पूर्व: चीन का वैश्विक आर्थिक प्रभाव बहुत कम था।
    • वर्तमान: चीन एक प्रमुख वैश्विक आर्थिक शक्ति के रूप में उभरा है और क्षेत्रीय तथा वैश्विक मामलों में उसका प्रभाव काफी बढ़ गया है।

संक्षेप में, आज की चीनी अर्थव्यवस्था एक मिश्रित अर्थव्यवस्था है जिसमें बाजार की शक्तियों और निजी उद्यमों की महत्वपूर्ण भूमिका है, जबकि पूर्व में यह एक पूरी तरह से राज्य-नियंत्रित समाजवादी अर्थव्यवस्था थी।

Common mistakes

  • आसियान शैली को केवल जीवन शैली समझना।
  • क्षेत्रीय संगठनों के उद्देश्यों को केवल आर्थिक सहयोग तक सीमित मानना।
  • चीन की 'खुले द्वार' की नीति के वास्तविक अर्थ को न समझना।
  • यूरोपीय संघ और आसियान के बीच के अंतर को स्पष्ट न कर पाना।

Revision tips

  • आसियान और यूरोपीय संघ के प्रमुख उद्देश्यों और संरचनाओं की तुलना करें।
  • चीन की आर्थिक सुधारों की समय-सीमा और प्रमुख नीतियों को याद करें।
  • प्रत्येक प्रश्न के उत्तर में दिए गए मुख्य बिंदुओं को संक्षेप में लिखें।
  • वैश्विक राजनीति में सत्ता के वैकल्पिक केंद्रों के महत्व पर विचार करें।

Practice MCQs

Q1. आसियान के सदस्य देशों के अनौपचारिक और सहयोगपूर्ण कामकाज की शैली को क्या कहा जाता है?

Q2. किस देश ने 1978 में 'खुले द्वार की नीति' की घोषणा की थी?

Q3. यूरोपीय आर्थिक सहयोग संगठन की स्थापना किस योजना के प्रभाव से हुई?

Q4. आसियान सुरक्षा समुदाय का मुख्य उद्देश्य क्या है?

Q5. आसियान का उद्देश्य मुख्य रूप से क्या हासिल करना था?

Frequently asked questions

कक्षा 12 राजनीति विज्ञान के अध्याय 4 का मुख्य विषय क्या है?

कक्षा 12 राजनीति विज्ञान के अध्याय 4, 'सत्ता के वैकल्पिक केंद्र' का मुख्य विषय शीत युद्ध के बाद उभरे नए शक्ति केंद्रों जैसे आसियान (ASEAN) और यूरोपीय संघ (EU) का अध्ययन करना है, साथ ही चीन की अर्थव्यवस्था में हुए बदलावों को समझना है।

आसियान (ASEAN) क्या है और इसके मुख्य उद्देश्य क्या हैं?

आसियान दक्षिण पूर्व एशियाई राष्ट्रों का एक संगठन है जिसकी स्थापना 1967 में हुई थी। इसका मुख्य उद्देश्य आर्थिक विकास को तेज करना, सामाजिक और सांस्कृतिक विकास हासिल करना, तथा क्षेत्रीय शांति और स्थायित्व को बढ़ावा देना है।

'आसियान शैली' (ASEAN Way) से आप क्या समझते हैं?

'आसियान शैली' आसियान सदस्यों के अनौपचारिक, टकराव रहित और सहयोगात्मक कामकाज की शैली को कहा जाता है, जो राष्ट्रीय सार्वभौमिकता का सम्मान करती है।

चीन ने 'खुले द्वार की नीति' क्यों अपनाई?

चीन ने 1978 में 'खुले द्वार की नीति' अपनाई ताकि विदेशी पूंजी और प्रौद्योगिकी के निवेश से उच्चतर उत्पादकता प्राप्त की जा सके और अपनी अर्थव्यवस्था का आधुनिकीकरण किया जा सके।

क्षेत्रीय संगठनों के गठन के क्या लाभ हैं?

क्षेत्रीय संगठन ऐतिहासिक दुश्मनियों को भुलाकर सहयोग को बढ़ावा देते हैं, शांतिपूर्ण व्यवस्था विकसित करते हैं, आर्थिक विकास को गति देते हैं, और सामूहिक सुरक्षा को मजबूत करते हैं।

यह समाधान छात्रों के लिए कैसे उपयोगी हैं?

ये समाधान प्रत्येक प्रश्न का विस्तृत और चरण-दर-चरण उत्तर प्रदान करते हैं, जिससे छात्रों को अध्याय की अवधारणाओं को गहराई से समझने और परीक्षा की तैयारी को मजबूत करने में मदद मिलती है।

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