CBSE Class 12 Hindi Vitan: Chapter 2 'Jujh' NCERT Solutions
CBSE Class 12 Hindi Vitan Chapter 2 NCERT Solutions introduces 'Jujh', a poignant excerpt from Anand Yadav's autobiography. This chapter vividly portrays the relentless spirit of a young boy determined to pursue education against all odds. Facing his father's resistance and the stark realities of rural poverty, the protagonist's unwavering passion for learning shines through. The solutions explore his journey of convincing his mother and the influential Datta Ji Rao, leading to a crucial compromise with his father. This narrative offers deep insights into the socio-economic challenges of the time and the universal struggle for knowledge. Understanding these elements will significantly aid students in grasping the chapter's essence and excelling in their examinations.
Quick info
| Board | CBSE |
|---|---|
| Class | Class 12 |
| Subject | Hindi Vitan |
| Session | 2026 |
| Language | Hindi |
| Type | NCERT Solutions |
| Chapter | Chapter 2 |
Chapter summary
Chapter 2, 'Jujh', of the Hindi Vitan textbook focuses on an excerpt from Anand Yadav's autobiographical novel. The NCERT Solutions cover the author's biography, a detailed summary of the story, and the central conflict of a determined student against familial and societal pressures. It explains the boy's yearning for education, his strategic approach to gain support, and the resolution that allows him to continue his studies under specific conditions. The solutions emphasize themes of perseverance, the value of education, and the realities of agricultural life.
Learning outcomes
- Understand the biographical details of author Anand Yadav.
- Summarize the key events and themes of the 'Jujh' chapter.
- Analyze the protagonist's struggle for education against his father's wishes.
- Identify the role of supporting characters like the mother and Datta Ji Rao.
- Explain the socio-economic conditions depicted in the rural setting.
- Appreciate the protagonist's determination and strategic thinking.
Topics covered
Paper topics
- Author Introduction: Anand Yadav
- Chapter Summary: Jujh
- Rural Life in Maharashtra
- Protagonist's Desire for Education
- Father's Opposition to Education
- Mother's Role and Support
- Intervention of Datta Ji Rao
- Socio-economic Conditions
- Compromises for Education
- Themes of Perseverance and Determination
Important topics
- Protagonist's struggle for education
- Father's perspective vs. son's ambition
- Role of community elders (Datta Ji Rao)
- Depiction of rural agricultural life
- Themes of perseverance and overcoming obstacles
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Questions and Solutions
यह खंड सीबीएसई कक्षा 12 हिंदी वितान की पाठ्यपुस्तक के अध्याय 2, 'जूझ' के लिए विस्तृत समाधान प्रदान करता है। इसमें लेखक आनंद यादव का जीवन परिचय, पाठ का सारांश और मुख्य विषयों का विश्लेषण शामिल है। ये समाधान छात्रों को कहानी के पात्रों, उनकी प्रेरणाओं और ग्रामीण जीवन की वास्तविकताओं को समझने में मदद करते हैं, जिससे उन्हें परीक्षा की तैयारी में सहायता मिलती है।
लेखक परिचय
आनंद यादव का जन्म सन 1935 में महाराष्ट्र के कोल्हापुर जिले में हुआ था। उनका पूरा नाम आनंद रतन यादव है। उन्होंने मराठी और संस्कृत साहित्य में स्नातकोत्तर की उपाधि प्राप्त की। वे लंबे समय तक पुणे विश्वविद्यालय में मराठी विभाग में कार्यरत रहे। आनंद यादव की लगभग पच्चीस पुस्तकें प्रकाशित हो चुकी हैं, जिनमें उपन्यास, कविताएँ और आलोचनात्मक कृतियाँ शामिल हैं। उनका उपन्यास 'नटरंग' काफी चर्चित रहा है। 'जूझ' उपन्यास के लिए उन्हें सन 1990 में साहित्य अकादमी पुरस्कार से सम्मानित किया गया था।
पाठ का सारांश
'जूझ' लेखक आनंद यादव के प्रसिद्ध आत्मकथात्मक उपन्यास का एक अंश है। यह अंश एक किशोर लड़के के ग्रामीण जीवन के कठोर यथार्थ और उसके रंगीन परिवेश का विश्वसनीय चित्रण करता है। कहानी एक ऐसे किशोर के इर्द-गिर्द घूमती है जो हर परिस्थिति में पढ़ने की तीव्र इच्छा रखता है और साहित्य, संगीत तथा अन्य विषयों की ओर आकर्षित होता है।
लेखक के पिता उसे पाठशाला जाने से रोक देते हैं और खेती के काम में लगा देते हैं। लड़के का मन पढ़ने के लिए तड़पता है, लेकिन वह पिता के डर से कुछ कह नहीं पाता। उसे यह भी विश्वास है कि खेती से मिलने वाला लाभ धीरे-धीरे कम हो रहा है, जबकि पढ़ाई के बाद नौकरी से कुछ पैसे कमाए जा सकते हैं। दिवाली के बाद गन्ने पेरने का काम शुरू होता है, और लेखक के पिता सबसे पहले गुड़ बेचकर अधिक कीमत पाना चाहते हैं।
इस वर्ष भी पिता ने जल्दी काम शुरू किया, जिससे गन्ने पेरने का काम सबसे पहले पूरा हो गया। एक दिन जब लेखक कंडे थाप रहा था और उसका बेटा पानी भर रहा था, तब लेखक ने माँ से पढ़ाई की बात की। माँ ने अपनी लाचारी व्यक्त करते हुए कहा कि पढ़ाई की बात करने पर पिता बरहेला सुअर की तरह गुर्राते हैं। लेखक ने सुझाव दिया कि वह दत्ता जी राव सरकार से उसकी पढ़ाई के बारे में बात करे। माँ, जो अपने बेटे की तड़पन समझती थी, रात में दत्ता जी राव देसाई के पास गई और सारी बात बताई।
माँ ने यह भी बताया कि दादा (लेखक के पिता) सारा दिन बाजार में रखमाबाई के पास गुजार देते हैं और खेती का काम नहीं करते। उन्होंने यह भी कहा कि दादा ने लड़के की पढ़ाई इसलिए बंद करवाई है ताकि वह खुद गाँव में आजादी से घूम सके। यह सुनकर देसाई क्रोधित हो गए। माँ ने यह भी जोड़ा कि यदि लड़का अभी भी कक्षा में पढ़ने लगे तो दो महीने में पाँचवीं पास कर लेगा और उसका एक साल बच जाएगा। देसाई ने लेखक के पिता को बुलाया और फटकार लगाई। उन्होंने कहा कि पिता खेती पर ध्यान नहीं देते, परिवार को काम में जोतकर खुद घूमते हैं और अपनी मौज के लिए लड़के के जीवन को बर्बाद कर रहे हैं। देसाई ने लेखक को आदेश दिया कि वह सुबह पाठशाला जाए और मन लगाकर पढ़े। यदि पिता मना करें तो वे (देसाई) उसे पढ़ाएँगे।
लेखक के पिता ने उस पर कंडे बेचना, चारा बेचना, सिनेमा देखना, जुआ खेलना और खेती व घर के काम पर ध्यान न देने जैसे गलत आदतों के आरोप लगाए। लेखक ने अपने उत्तरों से उन्हें संतुष्ट कर दिया। देसाई ने पूछा कि क्या वह कभी फेल हुआ है, और लेखक के मना करने पर उसे पाठशाला जाने का आदेश देकर घर भेज दिया। बाद में, उन्होंने रतनाप्पा को समझाया और लेखक के पिता ने भी पाठशाला भेजने की सहमति दे दी।
घर आकर, पिता ने लेखक से यह वचन लिया कि वह दिन निकलते ही खेत पर जाएगा और वहीं से पाठशाला पहुँचेगा। पाठशाला से छुट्टी होते ही बस्ता घर रखकर सीधे खेत पर आकर एक घंटा मवेशी चराएगा। यदि खेतों में ज्यादा काम हुआ तो वह पाठशाला से अनुपस्थित रहेगा। लेखक ने सभी शर्तें मान लीं और पाँचवीं कक्षा में जाकर बैठने लगा। कक्षा में दो लड़कों को छोड़कर बाकी सभी नए बच्चे थे।
Common mistakes
- Misinterpreting the father's motivations for stopping the son's education.
- Overlooking the significance of Datta Ji Rao's intervention.
- Failing to connect the protagonist's desire for education with the changing economic realities of farming.
- Not understanding the compromises made by the protagonist to continue his studies.
Revision tips
- Read the author's introduction carefully to understand his background.
- Focus on the protagonist's journey and the obstacles he faces.
- Note down the key conversations and their outcomes, especially with the mother and Datta Ji Rao.
- Understand the compromises the protagonist agrees to in order to study.
- Discuss the themes of perseverance and the importance of education with classmates.
Practice MCQs
Q1. आनंद यादव का जन्म किस वर्ष हुआ था?
Explanation: आनंद यादव का जन्म सन 1935 में महाराष्ट्र के कोल्हापुर में हुआ था।
Q2. लेखक के पिता ने उसे पाठशाला जाने से क्यों रोका?
Explanation: लेखक के पिता ने उसे पाठशाला जाने से रोक दिया तथा खेती के काम में लगा दिया, क्योंकि वे उसे खेती के कामों में व्यस्त रखना चाहते थे।
Q3. लेखक की माँ ने पढ़ाई की बात करने पर क्या कहा?
Explanation: लेखक की माँ ने अपनी लाचारी प्रकट करते हुए कहा कि तेरी पढ़ाई-लिखाई की बात करने पर वह बरहेला सुअर की तरह गुर्राता है।
Q4. लेखक ने अपनी पढ़ाई के बारे में बात करने के लिए किसे सुझाव दिया?
Explanation: लेखक ने सुझाव दिया कि वह दत्ता जी राव सरकार से उसकी पढ़ाई के बारे में बात करे।
Q5. दत्ता जी राव देसाई ने लेखक के पिता को किस बात पर फटकार लगाई?
Explanation: देसाई ने लेखक के पिता को खेती पर ध्यान न देने, बीवी-बच्चों को खेत में जोतकर घूमने और लड़के के जीवन की बलि चढ़ाने जैसी बातों पर फटकार लगाई।
Frequently asked questions
यह समाधान किस कक्षा और विषय के लिए हैं?
यह समाधान CBSE कक्षा 12 की हिंदी वितान पुस्तक के अध्याय 2, 'जूझ' के लिए हैं।
'जूझ' अध्याय का मुख्य विषय क्या है?
'जूझ' अध्याय एक किशोर की शिक्षा प्राप्त करने की तीव्र इच्छा और उसके पिता के विरोध के बावजूद अपने लक्ष्य को प्राप्त करने के संघर्ष को दर्शाता है।
लेखक आनंद यादव का परिचय क्या है?
आनंद यादव एक प्रसिद्ध मराठी लेखक हैं, जिनका जन्म 1935 में हुआ था। उन्हें उनके आत्मकथात्मक उपन्यास 'जूझ' के लिए साहित्य अकादमी पुरस्कार से सम्मानित किया गया है।
लेखक के पिता उसकी पढ़ाई क्यों बंद करवाना चाहते थे?
लेखक के पिता उसे खेती के कामों में लगाना चाहते थे और शायद यह भी मानते थे कि खेती से ही आय का साधन है, इसलिए वे नहीं चाहते थे कि बेटा पढ़े।
दत्ता जी राव देसाई ने इस मामले में क्या भूमिका निभाई?
दत्ता जी राव देसाई ने लेखक के पिता को डांटकर और समझाकर लेखक की पढ़ाई जारी रखने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।
क्या लेखक को अपनी पढ़ाई जारी रखने के लिए कोई समझौता करना पड़ा?
हाँ, लेखक को अपनी पढ़ाई जारी रखने के लिए अपने पिता के साथ समझौता करना पड़ा कि वह स्कूल जाने से पहले और बाद में खेत के काम करेगा।
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