CBSE Class 11 Hindi Vitan NCERT Solutions Chapter 2: राजस्थान की रजत बूँदें

NCERT Solutions PDF Class 11 PDF

This chapter, 'Rajasthan Ki Rajat Bunde' (Silver Drops of Rajasthan), from the CBSE Class 11 Hindi Vitan textbook, delves into the critical issue of water scarcity, particularly in arid regions like Rajasthan. The NCERT Solutions provide detailed answers to questions about traditional water harvesting methods, such as the construction and significance of 'Kui' (a unique well). It explains the difference between Kui and regular wells, the role of 'chejaras' (craftsmen), and the societal respect they once commanded. The solutions also clarify terms like 'Palad Pani', 'Patal Pani', and 'Rejani Pani', offering insights into how water is perceived and managed in Rajasthan. Furthermore, the chapter addresses the growing water crisis and suggests ways to conserve water, drawing parallels with efforts in other Indian states. These solutions are invaluable for students to understand the importance of water conservation, traditional wisdom, and sustainable water management practices, aiding in their exam preparation by offering clear explanations and context.

Quick info

BoardCBSE
ClassClass 11
Subjectवितान
Session2026
LanguageHindi
TypeNCERT Solutions
Chapter2. राजस्थान की रजत बूँदें

Chapter summary

Chapter 2 of CBSE Class 11 Hindi Vitan, 'Rajasthan Ki Rajat Bunde', focuses on traditional water harvesting systems in Rajasthan, especially the 'Kui'. The NCERT Solutions explain the construction, depth, and diameter of 'Kuis' compared to regular wells, and the societal role of the 'chejaras' (craftsmen). It also defines and differentiates 'Palad Pani', 'Patal Pani', and 'Rejani Pani'. The solutions highlight the urgency of water conservation in the face of increasing scarcity and discuss broader measures being taken across India.

Learning outcomes

  • Understand the concept and construction of 'Kui' in Rajasthan.
  • Differentiate between 'Kui' and conventional wells.
  • Learn about the traditional respect and role of 'chejaras' (craftsmen).
  • Define and differentiate between 'Palad Pani', 'Patal Pani', and 'Rejani Pani'.
  • Appreciate the importance of water conservation and traditional water harvesting.
  • Analyze the causes and solutions for the growing water crisis.

Topics covered

Paper topics

  • राजस्थान की जल समस्या
  • कुंई का निर्माण और विशेषताएँ
  • कुंई और सामान्य कुओं में अंतर
  • चेजारों की भूमिका और सामाजिक स्थिति
  • पालर पानी
  • पाताल पानी
  • रेजाणी पानी
  • वर्षा जल संचयन
  • जल संरक्षण के उपाय
  • पारंपरिक जल स्रोत

Important topics

  • कुंई का निर्माण और विशेषताएँ
  • पालर पानी, पाताल पानी, रेजाणी पानी की परिभाषाएँ
  • जल संरक्षण का महत्व
  • चेजारों की बदलती सामाजिक स्थिति

PDF preview

Read page by page below. PDF is streamed from the official NCERT website — no download button on this page.

Loading document …
Page of
Loading page …

Questions and Solutions

प्रश्न 1

राजस्थान में कुंई किसे कहते हैं? इसकी गहराई और व्यास तथा सामान्य कुओं की गहराई और व्यास में क्या अंतर होता है ?
Solution: राजस्थान में, जहाँ रेत की अधिकता के कारण वर्षा का पानी भूमि में समा जाता है और नीचे नमी के रूप में फैल जाता है, वहाँ इस नमी को पानी के रूप में प्राप्त करने के लिए एक विशेष प्रकार की संरचना का निर्माण किया जाता है जिसे 'कुंई' कहते हैं। कुंई का निर्माण चार-पाँच हाथ के व्यास की जगह को तीस से पैंतीस हाथ की गहराई तक खोदकर किया जाता है। खुदाई के साथ-साथ चिनाई भी की जाती है ताकि नमी को रोका जा सके। इस चिनाई के बाद खड़िया मिट्टी की परत पर रिस-रिस कर पानी एकत्र हो जाता है।

सामान्य कुओं की तुलना में, कुंई का व्यास बहुत छोटा होता है, जबकि उसकी गहराई कुओं के बराबर या थोड़ी कम हो सकती है। कुंई का मुँह छोटा रखने का मुख्य कारण यह है कि यदि इसका व्यास बड़ा होगा तो कम मात्रा में एकत्र हुआ पानी अधिक क्षेत्र में फैल जाएगा, जिससे उसे ऊपर निकालना कठिन हो जाएगा।

प्रश्न 2

दिनोंदिन बढ़ती पानी की समस्या से निपटने में यह पाठ आपकी कैसे मदद कर सकता है तथा देश के अन्य राज्यों में इसके लिए क्या उपाय हो रहे हैं? जानें और लिखें।
Solution: दिनोंदिन विकराल होती जल समस्या के इस दौर में, 'राजस्थान की रजत बूँदें' पाठ हमें जल प्राप्ति के पारंपरिक और वैकल्पिक उपायों पर विचार करने के लिए प्रेरित करता है। यह सिखाता है कि कैसे सीमित जल संसाधनों का कुशलतापूर्वक उपयोग किया जा सकता है, विशेषकर उन क्षेत्रों में जहाँ पानी की कमी एक गंभीर चुनौती है।

देश के अन्य राज्यों में भी पानी की समस्या से निपटने के लिए विभिन्न सरकारी और गैर-सरकारी स्तर पर प्रयास किए जा रहे हैं। इनमें प्रिंट मीडिया, विज्ञापनों, कार्यक्रमों और जन-जागरूकता अभियानों के माध्यम से लोगों को जल संरक्षण के महत्व से अवगत कराना शामिल है। कई स्थानों पर वर्षा जल संचयन के उपाय किए जा रहे हैं, जैसे तालाबों का पुनरुद्धार, छोटे कुओं, बावड़ियों और जलाशयों का निर्माण करके भूजल स्तर को बढ़ाना। यदि इन सभी उपायों को अपनाया जाए, तो निश्चित रूप से हम जल संकट से निपटने में सफल हो सकते हैं।

प्रश्न 3

चेजारों के साथ गाँव-समाज के व्यवहार में पहले की तुलना में आज क्या फ़र्क आया है? पाठ के आधार पर बताइए ।
Solution: 'चेजारों' शब्द का अर्थ है कुंई निर्माण के दक्ष चिनाई करने वाले कारीगर। पाठ के अनुसार, राजस्थान में पहले चेजारों को गाँव-समाज में विशेष दर्जा प्राप्त था। कुंई का निर्माण पूरा होने पर एक उत्सव मनाया जाता था और चेजारों को विदाई के समय तरह-तरह की भेंट दी जाती थी। कुंई बनने के बाद भी उनका गाँव से रिश्ता बना रहता था और उन्हें तीज-त्योहारों व मांगलिक अवसरों पर भी भेंट मिलती थी। फसल आने पर उनके नाम से खलिहान में अनाज का एक ढेर अलग से रखा जाता था।

परंतु, समय के साथ इस व्यवहार में परिवर्तन आया है। आज चेजारों को वह पहले जैसा सम्मान प्राप्त नहीं है। अब उनसे केवल मजदूरी देकर काम करवाया जाता है, और उन्हें पहले की तरह विशेष भेंट या सम्मान नहीं मिलता।

प्रश्न 4

निजी होते हुए भी कुंईयों पर ग्राम समाज का अंकुश लगा रहता है। लेखक ने ऐसा क्यों कहा होगा?
Solution: लेखक का यह कहना इसलिए उचित है क्योंकि राजस्थान के लोग यह भली-भाँति समझते हैं कि कुंई के माध्यम से भूमि के अंदर मौजूद नमी को ही पानी के रूप में प्राप्त किया जाता है। यदि बहुत अधिक संख्या में कुंईयाँ बनाई जाएँगी, तो पानी की नमी का बँटवारा अधिक हो जाएगा, जिससे प्रत्येक कुंई की पानी एकत्र करने की क्षमता पर नकारात्मक प्रभाव पड़ेगा।

इसी कारण, यद्यपि कुंई का निर्माण निजी भूमि पर हो सकता है, लेकिन इसके निर्माण और उपयोग पर ग्राम समाज का अंकुश बना रहता है। समाज यह सुनिश्चित करता है कि आवश्यकता पड़ने पर ही नई कुंई के निर्माण की स्वीकृति दी जाए, ताकि जल स्रोत का अत्यधिक दोहन न हो और सभी को पर्याप्त पानी मिलता रहे।

प्रश्न 5

कुंई निर्माण से संबंधित निम्न शब्दों के बारे में जानकारी प्राप्त करें - पालर पानी, पाताल पानी, रेजाणी पानी।
Solution: राजस्थान में पानी के तीन मुख्य रूप माने जाते हैं, जिनके बारे में जानकारी इस प्रकार है:
  1. पालर पानी: यह वर्षा का वह जल है जो सीधे धरातल पर मिलता है और बहकर नदियों, तालाबों आदि में एकत्रित हो जाता है। यह पानी का सबसे ऊपरी और आसानी से उपलब्ध रूप है।
  2. पाताल पानी: यह वर्षा जल का वह रूप है जो जमीन में नीचे धँसकर 'भूजल' बन जाता है। इस जल को हम कुओं, ट्यूबवेल आदि द्वारा प्राप्त करते हैं। यह भूजल स्तर से जुड़ा होता है।
  3. रेजाणी पानी: यह वह वर्षा जल है जो रेत के नीचे तो जाता है, परन्तु खड़िया मिट्टी की परत के कारण भूजल से नहीं मिल पाता। यह नमी के रूप में रेत में समा जाता है और इसे कुंई द्वारा प्राप्त किया जाता है। 'रेजा' शब्द का प्रयोग धरातल में समाई वर्षा के माप के लिए होता है।

Common mistakes

  • Confusing the terms 'Palad Pani', 'Patal Pani', and 'Rejani Pani'.
  • Underestimating the significance of traditional water harvesting methods like 'Kui'.
  • Not understanding the societal context and historical importance of 'chejaras'.

Revision tips

  • Focus on understanding the unique features of 'Kui' construction and its purpose.
  • Memorize the definitions and distinctions between the three types of water ('Palad', 'Patal', 'Rejani').
  • Reflect on the societal changes affecting the 'chejaras' and their craft.
  • Consider the broader implications of water scarcity and conservation methods discussed in the chapter.

Practice MCQs

Q1. राजस्थान में 'कुंई' किसे कहा जाता है?

Q2. कुंई की गहराई सामान्य कुओं की तुलना में कैसी होती है?

Q3. 'चेजारों' का संबंध पाठ के अनुसार किससे है?

Q4. पाठ में 'पालर पानी' का क्या अर्थ बताया गया है?

Q5. 'पाताल पानी' से क्या तात्पर्य है?

Q6. रेजाणी पानी वह वर्षा जल है जो...

Frequently asked questions

कक्षा 11 हिंदी वितान के अध्याय 2 'राजस्थान की रजत बूँदें' में मुख्य रूप से क्या समझाया गया है?

इस अध्याय में राजस्थान की जल समस्या, पारंपरिक जल स्रोतों जैसे 'कुंई' के निर्माण, उसकी गहराई-व्यास, और 'चेजारों' (कारीगरों) की भूमिका पर प्रकाश डाला गया है। साथ ही, 'पालर पानी', 'पाताल पानी', और 'रेजाणी पानी' जैसे जल के विभिन्न रूपों को भी समझाया गया है।

कुंई और सामान्य कुओं में क्या मुख्य अंतर है?

कुंई की गहराई सामान्य कुओं के बराबर या थोड़ी कम हो सकती है, लेकिन उसका व्यास बहुत छोटा (चार-पाँच हाथ) होता है, जबकि सामान्य कुओं का व्यास बड़ा होता है। कुंई विशेष रूप से वर्षा जल से प्राप्त नमी को संग्रहित करने के लिए बनाई जाती है।

पाठ में 'चेजारों' का क्या महत्व बताया गया है?

चेजारों कुंई निर्माण के कुशल कारीगर होते थे। पहले उन्हें समाज में विशेष सम्मान प्राप्त था और कुंई बनने पर उन्हें भेंट दी जाती थी। पाठ यह भी बताता है कि समय के साथ उनका यह सम्मान कम हुआ है और अब उन्हें केवल मजदूरी देकर काम करवाया जाता है।

'पालर पानी', 'पाताल पानी', और 'रेजाणी पानी' क्या हैं?

'पालर पानी' वर्षा का सीधा जल है जो बहकर नदियों-तालाबों में जाता है। 'पाताल पानी' भूमिगत जल है जो कुओं/ट्यूबवेल से मिलता है। 'रेजाणी पानी' वह वर्षा जल है जो रेत में नमी के रूप में समा जाता है और कुंई द्वारा प्राप्त होता है।

यह पाठ जल संरक्षण के बारे में क्या सिखाता है?

यह पाठ सिखाता है कि पानी की समस्या कितनी गंभीर है और हमें पारंपरिक जल संचयन विधियों को अपनाना चाहिए। यह पानी के समुचित प्रयोग और वर्षा जल के संचयन की आवश्यकता पर भी जोर देता है, जो परीक्षा की तैयारी के लिए महत्वपूर्ण है।

Content reviewed by the NCERT Help team. Editorial Team and update policy

NCERT Solutions PDF PDF on NCERT Help. URL unchanged for search indexing.