कक्षा 11 राजनीति विज्ञान: अध्याय 10 विकास - NCERT समाधान

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यह पृष्ठ सीबीएसई कक्षा 11 राजनीति विज्ञान के अध्याय 10, 'विकास' पर केंद्रित है, जो छात्रों को विकास की अवधारणा, इसके विभिन्न आयामों और प्रभावों की गहन समझ प्रदान करता है। समाधानों में विकास की पारंपरिक परिभाषाओं की आलोचना, इसके सामाजिक और पर्यावरणीय परिणामों की विस्तृत चर्चा, और विकास प्रक्रिया से उत्पन्न होने वाले नए अधिकारों के दावों का विश्लेषण शामिल है। यह भी बताया गया है कि कैसे लोकतांत्रिक व्यवस्थाएं सामान्य हित को बढ़ावा देने वाले निर्णय लेने में अधिक प्रभावी होती हैं, और कैसे लोकप्रिय संघर्ष और आंदोलन सरकारों को जवाबदेह ठहराने में भूमिका निभाते हैं। ये समाधान छात्रों को परीक्षा की तैयारी के लिए महत्वपूर्ण अवधारणाओं को स्पष्ट करने और आलोचनात्मक सोच विकसित करने में मदद करेंगे।

Quick info

BoardCBSE
ClassClass 11
Subjectराजनीतिक सिद्धांत
Session2026
LanguageHindi
TypeNCERT Solutions
Chapter10. विकास

Chapter summary

कक्षा 11 राजनीति विज्ञान के अध्याय 10 'विकास' के ये NCERT समाधान विकास की बहुआयामी प्रकृति की पड़ताल करते हैं। इनमें विकास की प्रचलित परिभाषाओं की सीमाओं, इसके कारण होने वाले सामाजिक विस्थापन और पर्यावरणीय क्षरण जैसे गंभीर मुद्दों पर प्रकाश डाला गया है। समाधान यह भी बताते हैं कि विकास प्रक्रिया ने किन नए अधिकारों के दावों को जन्म दिया है और लोकतांत्रिक सरकारों द्वारा सामान्य हित में निर्णय लेने के क्या लाभ हैं। यह अध्याय छात्रों को विकास से जुड़े जटिल सामाजिक-राजनीतिक पहलुओं को समझने में मदद करता है।

Learning outcomes

  • विकास की अवधारणा और इसकी प्रचलित परिभाषाओं की सीमाओं को समझना।
  • विकास के सामाजिक और पर्यावरणीय प्रभावों का विश्लेषण करना।
  • विकास प्रक्रिया से उत्पन्न होने वाले नए अधिकारों के दावों की पहचान करना।
  • लोकतांत्रिक निर्णय लेने की प्रक्रिया के लाभों को समझना।
  • विकास से संबंधित लोकप्रिय संघर्षों और आंदोलनों की भूमिका का मूल्यांकन करना।

Topics covered

Paper topics

  • विकास की अवधारणा
  • विकास की परिभाषाएँ
  • आर्थिक विकास
  • सामाजिक प्रभाव
  • पर्यावरणीय प्रभाव
  • विस्थापन
  • अधिकारों के दावे
  • लोकतांत्रिक निर्णय लेना
  • सामान्य हित
  • लोकप्रिय संघर्ष
  • नर्मदा बचाओ आंदोलन
  • संसाधन उपयोग

Important topics

  • विकास की अवधारणा और उसकी आलोचना
  • विकास के सामाजिक और पर्यावरणीय परिणाम
  • विकास से जुड़े नए अधिकार
  • लोकतांत्रिक निर्णय लेने की प्रक्रिया के लाभ
  • लोकप्रिय आंदोलनों की भूमिका

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Questions and Solutions

प्रश्न 1

आप 'विकास' से क्या समझते हैं? क्या विकास की प्रचलित परिभाषा से समाज के सभी वर्गों को लाभ होता है?
Solution:

विकास का तात्पर्य लोगों की प्रगति, कल्याण, उन्नति और बेहतर जीवन स्तर से है। हालाँकि, वर्तमान भौतिकवादी युग में 'विकास' शब्द का प्रयोग अक्सर आर्थिक विकास की दर में वृद्धि और समाज के आधुनिकीकरण के संदर्भ में किया जाता है। यह प्रचलित परिभाषा काफी संकीर्ण है। विकास को केवल पूर्व-निर्धारित लक्ष्यों या उद्योग, बाँध, अस्पताल जैसी परियोजनाओं को पूरा करने से जोड़कर देखना दुर्भाग्यपूर्ण है। समाज के व्यापक दृष्टिकोण से, यह परिभाषा अपर्याप्त है। इस प्रक्रिया में, समाज के कुछ वर्ग लाभान्वित होते हैं, जबकि अन्य को भारी नुकसान उठाना पड़ता है, जैसे कि बिना किसी भरपाई के अपने घर, जमीन और रोजगार खोना। अक्सर यह देखा जाता है कि विकास के अधिकांश लाभ शक्तिशाली लोग हथिया लेते हैं, जबकि इसकी कीमत अति दरिद्रों और आबादी के असुरक्षित वर्गों को चुकानी पड़ती है।

प्रश्न 2

जिस तरह का विकास अधिकतर देशों में अपनाया जा रहा है, उससे पड़ने वाले सामाजिक और पर्यावरणीय प्रभावों की चर्चा कीजिए।
Solution:

विकास का वह मॉडल जो अधिकतर देशों में अपनाया जा रहा है, उसके कारण समाज और पर्यावरण को भारी कीमत चुकानी पड़ती है। इसके प्रमुख प्रभाव निम्नलिखित हैं:

  1. पर्यावरणीय प्रभाव: विकास की गतिविधियों के कारण अनेक देशों में पर्यावरण को गंभीर नुकसान पहुँचा है। वनों की अंधाधुंध कटाई के कारण भूमंडलीय ताप बढ़ रहा है। वायुमंडल में ग्रीनहाउस गैसों के उत्सर्जन से ध्रुवीय बर्फ पिघल रही है, जिससे बाढ़ का खतरा बढ़ गया है। वायु प्रदूषण एक गंभीर समस्या है। संसाधनों के अविवेकपूर्ण उपयोग का वंचितों पर तत्काल और अधिक तीव्र प्रभाव पड़ता है। वनों के नष्ट होने से उन्हें जलावन की लकड़ी, जड़ी-बूटी और भोजन प्राप्त करने में कठिनाई होती है। नदियों और तालाबों के सूखने तथा भूजल स्तर के गिरने से महिलाओं को पानी लाने के लिए अधिक दूर जाना पड़ता है।
  2. सामाजिक प्रभाव: विकास की प्रक्रिया के कारण बड़ी संख्या में लोगों को उनके घरों और क्षेत्रों से विस्थापित होना पड़ा है। इस विस्थापन के कारण लोगों ने अपनी आजीविका खो दी है, जिससे वे और भी गरीब हो गए हैं। यदि ग्रामीण खेतिहर समुदाय अपने पारंपरिक पेशे और क्षेत्र से विस्थापित होते हैं, तो वे समाज के हाशिए पर चले जाते हैं और शहरी तथा ग्रामीण गरीबों की बड़ी आबादी में शामिल हो जाते हैं। लंबी अवधि में अर्जित पारंपरिक कौशल नष्ट हो जाते हैं। इससे संस्कृति भी नष्ट होती है, क्योंकि जब लोग नई जगह पर जाते हैं, तो वे अपनी पूरी सामुदायिक जीवन-पद्धति खो बैठते हैं।

प्रश्न 3

विकास की प्रक्रिया ने किन नए अधिकारों के दावों को जन्म दिया है?
Solution:

विकास की प्रक्रिया ने निम्नलिखित नए अधिकारों के दावों को जन्म दिया है:

  1. लोगों को यह अधिकार प्राप्त है कि उनके जीवन के भविष्य को प्रभावित करने वाले निर्णयों में उनसे सलाह ली जाए।
  2. आदिवासी और आदिम समुदाय नैसर्गिक संसाधनों के उपयोग के अपने परंपरागत अधिकारों का दावा कर सकते हैं।
  3. लोगों को आजीविका का अधिकार भी प्राप्त है, जिसके अंतर्गत वे सरकार से अपनी आजीविका के स्रोत पर खतरा पैदा होने पर इसका दावा कर सकते हैं।

प्रश्न 4

विकास के बारे में निर्णय सामान्य हित को बढ़ावा देने के लिए किए जाएँ, यह करने में अन्य प्रकार की सरकार की लोकतांत्रिक व्यवस्था के क्या लाभ हैं?
Solution:

यह निर्विवाद है कि लोकतांत्रिक सरकारें, अन्य प्रकार की सरकारों की तुलना में, विकास के बारे में ऐसे निर्णय लेने में अधिक सक्षम होती हैं जो सामान्य हित को बढ़ावा देते हैं। लोकतांत्रिक व्यवस्थाओं का कार्य जनसमूह के विभिन्न तबकों की प्रतिस्पर्धी माँगों को पूरा करना और वर्तमान तथा भविष्य की दावेदारियों के बीच संतुलन स्थापित करना होता है। लोकतंत्र और तानाशाही जैसी अन्य सरकारों के बीच मुख्य अंतर यह है कि लोकतंत्र में संसाधनों को लेकर विरोध या बेहतर जीवन के बारे में विभिन्न विचारों के द्वंद्व का समाधान विचार-विमर्श और सभी अधिकारों के प्रति सम्मान के माध्यम से होता है, जबकि तानाशाही में ऐसे फैसले ऊपर से थोपे जाते हैं। इस प्रकार, लोकतंत्र में हर व्यक्ति बेहतर जीवन हासिल करने की प्रक्रिया में एक साझेदार होता है और विकास की योजनाएँ बनाने तथा उनके कार्यान्वयन के तरीके खोजने में भी शामिल होता है। किसी और द्वारा बनाई गई योजना का अनुसरण करने और स्वयं योजना बनाने व उसमें भागीदार होने में अंतर है, क्योंकि बाद वाले में आपकी विशेष ज़रूरतों को समझने की गुंजाइश अधिक होती है।

लोकतांत्रिक देशों में निर्णय-प्रक्रिया में लोगों की भागीदारी के अधिकार पर बल दिया जाता है। भागीदारी सुनिश्चित करने का एक प्रस्तावित तरीका यह है कि स्थानीय विकास योजनाओं से संबंधित निर्णय स्थानीय निर्णयकारी संस्थाओं को लेने दिए जाएँ। इसीलिए स्थानीय निकायों के अधिकार और संसाधन बढ़ाने की वकालत की जाती है, क्योंकि इससे उन मसलों पर लोगों से परामर्श हो पाता है जो उन्हें अत्यधिक प्रभावित करते हैं, और समुदाय को नुकसान पहुँचाने वाली परियोजनाओं को रद्द करना संभव हो पाता है। योजना बनाने और नीतियों के निर्धारण में संलग्नता से लोगों को अपनी ज़रूरतों के अनुसार संसाधनों का उपयोग करने की गुंजाइश भी बनती है। लोकतंत्र के अलावा किसी अन्य प्रकार की सरकार में इन सब बातों की संभावनाएँ नगण्य होती हैं।

प्रश्न 5

विकास से होने वाली सामाजिक और पर्यावरणीय क्षति के प्रति सरकार को जवाबदेह बनवाने में लोकप्रिय संघर्ष और आंदोलन कितने सफल रहे हैं?
Solution:

ऐसे आंदोलन कभी-कभी ही सफल हो पाते हैं, और अक्सर आंशिक रूप से ही सफल होते हैं। इस संदर्भ में, 'नर्मदा बचाओ आंदोलन' एक प्रमुख उदाहरण है। यह आंदोलन नर्मदा नदी पर सरदार सरोवर परियोजना के तहत बनने वाले बाँधों के निर्माण के खिलाफ विस्थापित लोगों द्वारा चलाया जा रहा है। बड़े बाँधों के समर्थकों का दावा है कि इससे बिजली पैदा होगी, बड़े क्षेत्र की सिंचाई में मदद मिलेगी और सौराष्ट्र एवं कच्छ के रेगिस्तानी इलाकों को पेयजल उपलब्ध होगा। इन दावों का विरोधियों द्वारा खंडन किया जाता है। विरोधियों का तर्क है कि इस परियोजना के कारण लाखों लोगों को विस्थापित होना पड़ा है और उनकी आजीविका छिन गई है। विरोधियों का यह भी कहना है कि विशाल जंगली भूभाग के बाँध में डूब जाने से पर्यावरणीय संतुलन बिगड़ सकता है। विरोधियों द्वारा चलाए जा रहे आंदोलन ने सरकार पर जबरदस्त दबाव डाला है।

Common mistakes

  • विकास को केवल आर्थिक प्रगति तक सीमित समझना।
  • विकास के नकारात्मक सामाजिक और पर्यावरणीय प्रभावों को अनदेखा करना।
  • लोकतांत्रिक निर्णय लेने की प्रक्रिया के महत्व को कम आंकना।
  • विस्थापित समुदायों के अधिकारों और आजीविका के मुद्दों को नजरअंदाज करना।

Revision tips

  • विकास की परिभाषा और उसके विभिन्न पहलुओं पर ध्यान केंद्रित करें।
  • सामाजिक और पर्यावरणीय प्रभावों के उदाहरणों को याद रखें।
  • लोकतांत्रिक निर्णय लेने के लाभों और संघर्षों की भूमिका को समझें।
  • मुख्य आंदोलनों जैसे नर्मदा बचाओ आंदोलन के बारे में जानें।

Practice MCQs

Q1. विकास की प्रचलित परिभाषा में प्रायः किस पर जोर दिया जाता है?

Q2. विकास की प्रक्रिया से उत्पन्न होने वाला एक प्रमुख पर्यावरणीय प्रभाव क्या है?

Q3. विकास के कारण विस्थापित लोगों को किस अधिकार का दावा करने का अवसर मिलता है?

Q4. लोकतांत्रिक सरकारें विकास संबंधी निर्णय लेते समय किस पर अधिक ध्यान देती हैं?

Q5. नर्मदा बचाओ आंदोलन का मुख्य विरोध किस परियोजना के खिलाफ था?

Frequently asked questions

कक्षा 11 राजनीति विज्ञान में 'विकास' अध्याय का क्या महत्व है?

यह अध्याय छात्रों को विकास की जटिल अवधारणा, इसके विभिन्न आयामों, और समाज व पर्यावरण पर पड़ने वाले प्रभावों को समझने में मदद करता है, जो परीक्षा के दृष्टिकोण से महत्वपूर्ण है।

विकास की प्रचलित परिभाषा की क्या सीमाएँ हैं?

विकास की प्रचलित परिभाषा अक्सर केवल आर्थिक विकास की दर में वृद्धि और आधुनिकीकरण पर केंद्रित होती है, जो समाज के सभी वर्गों के कल्याण को सुनिश्चित नहीं करती और इसके नकारात्मक पर्यावरणीय प्रभाव भी हो सकते हैं।

विकास के कारण लोगों को किन सामाजिक समस्याओं का सामना करना पड़ता है?

विकास के कारण लोगों को विस्थापन, आजीविका का नुकसान, पारंपरिक कौशल का क्षरण और सामुदायिक जीवन-पद्धति के टूटने जैसी सामाजिक समस्याओं का सामना करना पड़ता है।

लोकतांत्रिक सरकारें विकास संबंधी निर्णय लेने में क्यों बेहतर मानी जाती हैं?

लोकतांत्रिक सरकारें जनसमूह के विभिन्न तबकों की माँगों को पूरा करने, प्रतिस्पर्धात्मक हितों में संतुलन बनाने और विचार-विमर्श के माध्यम से निर्णय लेने में सक्षम होती हैं, जिससे सामान्य हित को बढ़ावा मिलता है।

विकास से संबंधित लोकप्रिय संघर्षों का क्या उद्देश्य होता है?

लोकप्रिय संघर्ष और आंदोलन सरकारों को विकास परियोजनाओं के नकारात्मक सामाजिक और पर्यावरणीय प्रभावों के प्रति जवाबदेह बनाने, विस्थापितों के अधिकारों की रक्षा करने और अधिक समावेशी विकास सुनिश्चित करने का प्रयास करते हैं।

क्या विकास के कारण नए अधिकारों के दावे उत्पन्न हुए हैं?

हाँ, विकास की प्रक्रिया ने लोगों को निर्णय लेने में भागीदारी, नैसर्गिक संसाधनों के परंपरागत अधिकारों का दावा करने और आजीविका के अधिकार जैसे नए अधिकारों के दावों को जन्म दिया है।

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