कक्षा 11 भारत का संविधान: अध्याय 7 संघवाद NCERT समाधान
यह पृष्ठ कक्षा 11 के लिए भारत के संविधान के अध्याय 7, 'संघवाद' पर विस्तृत NCERT समाधान प्रदान करता है। यह अध्याय भारत की संघीय प्रणाली की बारीकियों की पड़ताल करता है, जिसमें राज्यों के पुनर्गठन, केंद्र-राज्य संबंधों में तनाव और भाषाई राज्यों के निर्माण की ऐतिहासिक पृष्ठभूमि शामिल है। समाधानों में भारत के संविधान में 'संघ' (Union) शब्द के उपयोग, अनुच्छेद 356 जैसे विवादास्पद प्रावधानों और जम्मू और कश्मीर को विशेष दर्जा देने वाले अनुच्छेद 370 पर चर्चा की गई है। यह सामग्री छात्रों को भारत की संघीय संरचना को समझने, विभिन्न राज्यों के गठन के पीछे के कारणों और केंद्र सरकार तथा राज्य सरकारों के बीच शक्तियों के वितरण को समझने में मदद करती है। ये समाधान परीक्षा की तैयारी के लिए एक मूल्यवान संसाधन के रूप में काम करते हैं, जो छात्रों को संघवाद से संबंधित महत्वपूर्ण अवधारणाओं और प्रश्नों की गहन समझ प्रदान करते हैं।
Quick info
| Board | CBSE |
|---|---|
| Class | Class 11 |
| Subject | भारत का संविधान सिद्धांत और व्यवहार |
| Session | 2026 |
| Language | Hindi |
| Type | NCERT Solutions |
| Chapter | 7. संघवाद |
Chapter summary
अध्याय 7 'संघवाद' के ये NCERT समाधान भारत की संघीय संरचना की पड़ताल करते हैं। इसमें राज्यों के पुनर्गठन, भाषाई आधार पर राज्यों के निर्माण (जैसे गुजरात, महाराष्ट्र, पंजाब, हरियाणा) और केंद्र-राज्य संबंधों को प्रभावित करने वाले प्रमुख अनुच्छेदों (जैसे 356 और 370) पर प्रकाश डाला गया है। समाधान भारत में 'राज्यों के संघ' की अवधारणा और विभिन्न ऐतिहासिक संदर्भों पर भी चर्चा करते हैं।
Learning outcomes
- भारत की संघीय व्यवस्था की संरचना और कार्यप्रणाली को समझना।
- राज्यों के पुनर्गठन और भाषाई राज्यों के निर्माण के ऐतिहासिक संदर्भों का विश्लेषण करना।
- अनुच्छेद 356 और 370 जैसे संघवाद से संबंधित महत्वपूर्ण संवैधानिक प्रावधानों की व्याख्या करना।
- केंद्र-राज्य संबंधों में तनाव और उनके समाधान के तरीकों की पहचान करना।
- भारत के संविधान में 'राज्यों के संघ' (Union of States) के अर्थ को स्पष्ट करना।
Topics covered
Paper topics
- संघवाद की अवधारणा
- राज्यों का संघ (Union of States)
- केंद्र-राज्य संबंध
- राज्य पुनर्गठन आयोग
- भाषाई आधार पर राज्यों का गठन
- अनुच्छेद 356 (राष्ट्रपति शासन)
- अनुच्छेद 370 (जम्मू-कश्मीर का विशेष दर्जा)
- संवैधानिक शासन
- मार्शल लॉ
- भारतीय संघीय व्यवस्था का विकास
- ऐतिहासिक संदर्भ (सोवियत संघ, वेस्टइंडीज संघ, नाइजीरिया)
- संवैधानिक प्रावधान
Important topics
- संघवाद की अवधारणा और भारत में इसका स्वरूप
- अनुच्छेद 356 और इसके विवादास्पद पहलू
- अनुच्छेद 370 और जम्मू-कश्मीर का विशेष दर्जा
- भाषाई आधार पर राज्यों का गठन और पुनर्गठन
- केंद्र-राज्य संबंधों में तनाव और संतुलन
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Questions and Solutions
मुख्य बिन्दू :-
1990 के दशक में, भारत सरकार ने प्रशासनिक सुविधा और बढ़ती मांगों को पूरा करने के उद्देश्य से कुछ बड़े राज्यों का पुनर्गठन किया। इसके परिणामस्वरूप, बिहार, उत्तर प्रदेश और मध्य प्रदेश जैसे राज्यों को विभाजित करके क्रमशः झारखंड, उत्तरांचल (अब उत्तराखंड) और छत्तीसगढ़ जैसे नए राज्यों का निर्माण किया गया। यह प्रक्रिया भारत की संघीय व्यवस्था के विकास का एक महत्वपूर्ण हिस्सा थी, जो विभिन्न क्षेत्रों की विशिष्ट आवश्यकताओं को पूरा करने के लिए राज्यों के पुनर्गठन की अनुमति देती है।
सोवियत संघ, जो कभी एक महाशक्ति था, 1989 के बाद विघटित हो गया और कई स्वतंत्र देशों में बँट गया। इनमें से कुछ देशों ने मिलकर 'स्वतंत्र राज्यों का राष्ट्रमंडल' का गठन किया। सोवियत संघ के विघटन के पीछे शक्तियों के अत्यधिक केंद्रीकरण और संघनन की प्रवृत्तियाँ प्रमुख कारण मानी जाती हैं।
14 अगस्त 1947 को भारत का विभाजन हुआ, जिसके परिणामस्वरूप भारत और पाकिस्तान नामक दो स्वतंत्र राष्ट्रों का उदय हुआ।
1958 में 'वेस्टइंडीज संघ' (Federation of West Indies) का गठन हुआ, जो कैरिबियन द्वीपों का एक संक्षिप्त राजनीतिक संघ था।
1914 तक, उत्तरी नाइजीरिया और दक्षिणी नाइजीरिया ब्रिटिश उपनिवेश थे। 1950 में इबादान संवैधानिक सम्मेलन में, नाइजीरिया के नेताओं ने एक संघीय संविधान बनाने का निर्णय लिया। नाइजीरिया की तीन प्रमुख जातीयताएँ - योरूबा, इग्बो और हौसा-फुलानी - हैं, जिन्होंने देश की राजनीतिक संरचना को प्रभावित किया।
1979 के सैन्य संविधान के तहत, किसी भी राज्य को अपनी सिविल पुलिस रखने का अधिकार नहीं था, जो केंद्रीय नियंत्रण को दर्शाता है।
भारतीय संविधान के अंग्रेजी संस्करण में 'फेडरेशन' शब्द के बजाय 'यूनियन' शब्द का प्रयोग किया गया है। अनुच्छेद 1(1) स्पष्ट करता है कि भारत, अर्थात् इंडिया, राज्यों का संघ (Union of States) होगा। अनुच्छेद 1(2) के अनुसार, राज्य और उनके राज्य क्षेत्र वे होंगे जो पहली अनुसूची में विनिर्दिष्ट हैं। यह शब्दावली भारत की एकात्मक झुकाव वाली संघीय प्रकृति को दर्शाती है, जहाँ राज्यों को संघ से अलग होने का अधिकार नहीं है।
संविधान के अनुच्छेद 33 और 34, विशेष परिस्थितियों में, जैसे कि देश के किसी क्षेत्र में 'सैनिक शासन' (मार्शल लॉ) लागू होने पर, संघ सरकार की शक्तियों को काफी बढ़ा देते हैं।
1950 और 1960 के दशक के शुरुआती वर्षों में, जवाहरलाल नेहरू के नेतृत्व में भारतीय संघीय व्यवस्था की नींव रखी गई। इस अवधि के दौरान, केंद्र और राज्यों दोनों में कांग्रेस पार्टी का प्रभुत्व था, जिसने संघीय व्यवस्था के प्रारंभिक स्वरूप को आकार दिया।
1977 में, पश्चिम बंगाल की वामपंथी सरकार ने केंद्र-राज्य संबंधों को पुन: परिभाषित करने और राज्यों को अधिक स्वायत्तता देने के उद्देश्य से एक महत्वपूर्ण दस्तावेज प्रकाशित किया।
संविधान के सबसे विवादास्पद प्रावधानों में से एक अनुच्छेद 356 है, जो राज्यों में राष्ट्रपति शासन लागू करने की अनुमति देता है। इस अनुच्छेद का उपयोग अक्सर राजनीतिक उद्देश्यों के लिए किया गया है, जिससे केंद्र-राज्य संबंधों में तनाव उत्पन्न हुआ है।
1959 में केरल में और 1967 के बाद कई राज्यों में, सरकारों को बहुमत की परीक्षा के बिना ही बर्खास्त कर दिया गया, जो अनुच्छेद 356 के संभावित दुरुपयोग को दर्शाता है।
1980 के दशक में, केंद्र सरकार ने आंध्र प्रदेश और जम्मू-कश्मीर की निर्वाचित सरकारों को बर्खास्त किया, जिससे संघीय व्यवस्था पर बहस तेज हो गई।
1954 में राज्य पुनर्गठन आयोग की स्थापना की गई थी। इस आयोग ने प्रमुख भाषाई समुदायों के लिए भाषा के आधार पर राज्यों के गठन की सिफारिश की।
सन 1956 में भाषाई आधार पर राज्यों के गठन की प्रक्रिया शुरू हुई और यह प्रक्रिया आज भी जारी है, जिससे भारत के राजनीतिक मानचित्र में निरंतर परिवर्तन होते रहे हैं।
सन 1960 में गुजरात और महाराष्ट्र राज्यों का गठन हुआ, जो भाषाई पुनर्गठन का एक प्रमुख उदाहरण है।
सन 1966 में, पंजाब और हरियाणा को अलग-अलग राज्यों के रूप में गठित किया गया, जो भाषाई और क्षेत्रीय पहचान पर आधारित पुनर्गठन का एक और उदाहरण है।
अनुच्छेद 370 के द्वारा जम्मू और कश्मीर को एक विशिष्ट स्थिति प्रदान की गई थी। भारत विभाजन के समय, जम्मू और कश्मीर एक बड़ी देशी रियासत थी जिसके पास भारत या पाकिस्तान में शामिल होने का विकल्प था।
अनुच्छेद 370 के अनुसार, केंद्र सूची और समवर्ती सूची के किसी भी विषय पर संसद द्वारा कानून बनाने और उसे जम्मू और कश्मीर में लागू करने के लिए राज्य सरकार की सहमति आवश्यक थी।
जम्मू और कश्मीर तथा अन्य राज्यों के बीच एक महत्वपूर्ण अंतर यह था कि राज्य सरकार की सहमति के बिना, जम्मू और कश्मीर में 'आंतरिक अशांति' के आधार पर 'आपातकाल' (अनुच्छेद 352 के तहत) लागू नहीं किया जा सकता था, जो राज्य की स्वायत्तता को दर्शाता था।
Common mistakes
- अनुच्छेद 356 के तहत राष्ट्रपति शासन के दुरुपयोग की संभावना को नजरअंदाज करना।
- जम्मू और कश्मीर को विशेष दर्जा देने वाले अनुच्छेद 370 के निहितार्थों को पूरी तरह से न समझना।
- संघीय व्यवस्था में केंद्र और राज्यों के बीच शक्तियों के संतुलन को गलत समझना।
- भाषाई राज्यों के गठन के पीछे की जटिलताओं को सतही तौर पर देखना।
Revision tips
- भारत के संविधान में संघवाद से संबंधित प्रमुख अनुच्छेदों (जैसे 356, 370) को सूचीबद्ध करें और उनके महत्व को समझें।
- भाषाई आधार पर राज्यों के गठन के ऐतिहासिक उदाहरणों (जैसे गुजरात, महाराष्ट्र, पंजाब, हरियाणा) का अध्ययन करें।
- केंद्र-राज्य संबंधों में तनाव के विभिन्न कारणों और उदाहरणों पर ध्यान केंद्रित करें।
- भारत को 'राज्यों का संघ' क्यों कहा जाता है, इस पर स्पष्टता प्राप्त करें।
Practice MCQs
Q1. भारत के संविधान में किस शब्द का प्रयोग 'फेडरेशन' के स्थान पर किया गया है?
Explanation: भारत के संविधान के अंग्रेजी संस्करण में 'फेडरेशन' शब्द के बजाय 'यूनियन' (Union) शब्द का प्रयोग किया गया है, जैसा कि अनुच्छेद 1(1) में 'राज्यों का संघ' (Union of States) के रूप में परिभाषित है।
Q2. किस अनुच्छेद के तहत राज्यों में राष्ट्रपति शासन लागू किया जा सकता है?
Explanation: अनुच्छेद 356 भारतीय संविधान का वह प्रावधान है जो राज्यों में संवैधानिक तंत्र की विफलता की स्थिति में राष्ट्रपति शासन लागू करने की शक्ति प्रदान करता है।
Q3. जम्मू और कश्मीर को विशेष दर्जा किस अनुच्छेद के तहत प्रदान किया गया था?
Explanation: अनुच्छेद 370 के अनुसार, जम्मू और कश्मीर राज्य को भारत के संविधान के तहत एक विशेष स्वायत्त दर्जा प्रदान किया गया था।
Q4. 1950 और 1960 के दशक में भारतीय संघीय व्यवस्था की नींव किसने रखी?
Explanation: जवाहरलाल नेहरू ने 1950 और 1960 के दशक के प्रारंभिक वर्षों में भारतीय संघीय व्यवस्था की नींव रखने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।
Q5. किस वर्ष राज्य पुनर्गठन आयोग की स्थापना की गई थी?
Explanation: राज्य पुनर्गठन आयोग की स्थापना वर्ष 1954 में की गई थी, जिसने भाषाई आधार पर राज्यों के गठन की सिफारिश की।
Frequently asked questions
कक्षा 11 के लिए 'संघवाद' अध्याय के NCERT समाधान क्यों महत्वपूर्ण हैं?
ये समाधान छात्रों को भारत की संघीय प्रणाली, केंद्र-राज्य संबंधों, भाषाई राज्यों के गठन और महत्वपूर्ण संवैधानिक प्रावधानों जैसे संघवाद से संबंधित प्रमुख अवधारणाओं की गहन समझ प्रदान करते हैं, जो परीक्षा की तैयारी के लिए आवश्यक है।
क्या ये समाधान भारत के संविधान में 'फेडरेशन' और 'यूनियन' के बीच अंतर स्पष्ट करते हैं?
हाँ, समाधान बताते हैं कि भारत के संविधान में 'फेडरेशन' के बजाय 'यूनियन' शब्द का प्रयोग किया गया है, जो भारत को राज्यों का एक अविभाज्य संघ दर्शाता है।
अनुच्छेद 356 और 370 का संघवाद से क्या संबंध है?
अनुच्छेद 356 राज्यों में राष्ट्रपति शासन लागू करने की शक्ति देता है, जो केंद्र-राज्य संबंधों को प्रभावित करता है। अनुच्छेद 370 ने जम्मू और कश्मीर को विशेष दर्जा दिया था, जो संघीय ढांचे की एक अनूठी विशेषता थी।
क्या ये समाधान भाषाई आधार पर राज्यों के गठन के बारे में जानकारी प्रदान करते हैं?
हाँ, समाधान राज्य पुनर्गठन आयोग और भाषाई आधार पर राज्यों के गठन की प्रक्रिया पर प्रकाश डालते हैं, जिसमें गुजरात, महाराष्ट्र, पंजाब और हरियाणा जैसे राज्यों के गठन का उल्लेख है।
इन समाधानों का उपयोग परीक्षा की तैयारी के लिए कैसे किया जा सकता है?
छात्र इन समाधानों का उपयोग संघवाद से संबंधित महत्वपूर्ण अवधारणाओं को समझने, प्रमुख अनुच्छेदों के महत्व को जानने और अभ्यास प्रश्नों के माध्यम से अपनी समझ का परीक्षण करने के लिए कर सकते हैं।
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