कक्षा 11 राजनीति विज्ञान अध्याय 9 शांति के लिए NCERT समाधान

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यह खंड सीबीएसई कक्षा 11 राजनीति विज्ञान के अध्याय 9 'शांति' के लिए विस्तृत समाधान प्रदान करता है। इसमें शांति की अवधारणा, शांतिपूर्ण दुनिया के लिए आवश्यक मानसिक बदलाव, और स्वतंत्रता, समानता और न्याय के महत्व पर चर्चा की गई है। समाधान बताते हैं कि कैसे राज्य अपने नागरिकों की रक्षा करने में विफल हो सकते हैं और कैसे हिंसा स्थायी समाधान प्रदान नहीं करती है। यह शांति स्थापना के विभिन्न दृष्टिकोणों पर भी प्रकाश डालता है। ये समाधान छात्रों को परीक्षा की तैयारी और विषय की गहरी समझ विकसित करने में मदद करेंगे।

Quick info

BoardCBSE
ClassClass 11
Subjectराजनीति विज्ञान
Session2026
LanguageHindi
TypeNCERT Solutions
Chapter9. शांति

Chapter summary

कक्षा 11 राजनीति विज्ञान के अध्याय 9 'शांति' के ये NCERT समाधान शांति की बहुआयामी प्रकृति की पड़ताल करते हैं। यह अध्याय इस बात पर जोर देता है कि शांति केवल युद्ध की अनुपस्थिति नहीं है, बल्कि स्वतंत्रता, समानता और न्याय की सक्रिय स्थापना है। समाधान बताते हैं कि कैसे व्यक्तिगत मानसिकता में बदलाव और न्यायपूर्ण समाज का निर्माण शांति के लिए महत्वपूर्ण है। यह अध्याय शांति स्थापना के विभिन्न दृष्टिकोणों और हिंसा के माध्यम से स्थायी समाधान प्राप्त करने की सीमाओं पर भी चर्चा करता है।

Learning outcomes

  • शांति की अवधारणा को समझना।
  • शांतिपूर्ण दुनिया के लिए मानसिक बदलाव के महत्व का विश्लेषण करना।
  • स्वतंत्रता, समानता और न्याय के बीच संबंध को पहचानना।
  • राज्य की भूमिका और नागरिकों के अधिकारों की रक्षा पर टिप्पणी करना।
  • हिंसा के माध्यम से स्थायी समाधान प्राप्त करने की सीमाओं का मूल्यांकन करना।
  • शांति स्थापना के विभिन्न दृष्टिकोणों की तुलना करना।

Topics covered

Paper topics

  • शांति की अवधारणा
  • मानसिकता में बदलाव और शांति
  • राज्य के दायित्व और हिंसा
  • स्वतंत्रता, समानता और न्याय का महत्व
  • न्यायपूर्ण समाज और शांति
  • हिंसा के दुष्परिणाम
  • स्थायी शांति की प्राप्ति
  • शांति स्थापना के दृष्टिकोण
  • सत्ता-संतुलन
  • संघर्ष प्रबंधन

Important topics

  • शांति की सकारात्मक अवधारणा
  • स्वतंत्रता, समानता और न्याय का सह-अस्तित्व
  • राज्य की भूमिका और हिंसा का अंतर्संबंध
  • हिंसा के माध्यम से स्थायी समाधान की सीमाएं
  • शांति स्थापना के विभिन्न दृष्टिकोण

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Questions and Solutions

प्रश्न 1

क्या आप जानते हैं कि एक शांतिपूर्ण दुनिया की ओर बदलाव के लिए लोगों के सोचने के तरीके में बदलाव ज़रूरी है? क्या मस्तिष्क शांति को बढ़ावा दे सकता है? और क्या, मानव मस्तिष्क पर केंद्रित रहना शांति स्थापना के लिए पर्याप्त है?
Solution:

यह कथन बिल्कुल सही है कि एक शांतिपूर्ण दुनिया की ओर परिवर्तन के लिए लोगों के सोचने के तरीके में बदलाव लाना आवश्यक है। संयुक्त राष्ट्र शैक्षणिक, वैज्ञानिक तथा सांस्कृतिक संगठन (UNESCO) के संविधान में कहा गया है, "क्योंकि युद्ध का आरंभ लोगों के दिमाग में होता है, इसलिए शांति के बचाव भी लोगों के दिमाग में ही रचे जाने चाहिए।" यह टिप्पणी काफी हद तक उचित लगती है। जब तक हम अपने मन में शांति के विचारों को रखेंगे और उसी के अनुसार अपने कार्यों को करेंगे, हमारे आसपास शांति का माहौल बना रहेगा। हिंसा की उत्पत्ति हमारे मस्तिष्क में ही होती है, और जब यह उग्र रूप ले लेती है, तो हम अपना आपा खोकर हिंसा कर बैठते हैं। इसलिए, सबसे पहले हमें अपने विचारों और भावनाओं को शांत और सकारात्मक बनाने की आवश्यकता है। आध्यात्मिकता की ओर झुकाव इसमें सहायक हो सकता है। 'जीओ और जीने दो' के सिद्धांत का पालन करना शांतिपूर्ण वातावरण बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है।

हालांकि, केवल मानव मस्तिष्क पर ध्यान केंद्रित करना शांति स्थापना के लिए पर्याप्त नहीं है। हमें एक न्यायपूर्ण और लोकतांत्रिक समाज के निर्माण के लिए हिंसा के सभी रूपों को त्यागना होगा। शांति स्थापित करने के लिए विभिन्न तरीकों को अपनाना होगा और युद्ध जैसी स्थितियों से बचना होगा। परमाणु प्रतिद्वंद्विता को समाप्त करना शांति स्थापना की दिशा में एक सकारात्मक कदम होगा। यह समझना महत्वपूर्ण है कि शांति एक स्थायी स्थिति नहीं है जिसे एक बार में हासिल कर लिया जाए; इसे बनाए रखने के लिए निरंतर प्रयास आवश्यक हैं।

प्रश्न 2

राज्य को अपने नागरिकों के जीवन और अधिकारों की रक्षा अवश्य करनी चाहिए। हालाँकि कई बार राज्य के कार्य इसके कुछ नागरिकों के खिलाफ़ हिंसा के स्रोत होते हैं। कुछ उदाहरणों की मदद से इस पर टिप्पणी कीजिए।
Solution:

प्रत्येक राज्य स्वयं को एक स्वतंत्र और सर्वोच्च इकाई के रूप में देखता है। इस नाते, राज्य का यह दायित्व बनता है कि वह अपने नागरिकों के जीवन और अधिकारों की रक्षा करे। परन्तु, कई बार ऐसा देखा जाता है कि राज्य अपने इस दायित्व को पूरा करने में असफल हो जाता है। आजकल लगभग हर राज्य ने बल प्रयोग के अपने साधनों को मजबूत किया है। राज्य से अपेक्षा की जाती है कि वह सेना या पुलिस का प्रयोग अपने नागरिकों की सुरक्षा के लिए करे, लेकिन व्यवहार में इन शक्तियों का प्रयोग अक्सर अपने ही नागरिकों के विरोध के स्वर को दबाने के लिए किया जाता है।

इसके कुछ उदाहरण निम्नलिखित हैं:

1. **राज्य द्वारा दंगे भड़काना:** कभी-कभी राज्य अपने हितों की रक्षा के लिए दंगे भड़काने में भूमिका निभा सकता है। उदाहरण के लिए, हाल ही में मुजफ्फरनगर में भड़के सांप्रदायिक दंगों में सैकड़ों लोग मारे गए और हजारों अपने घरों को छोड़कर राहत शिविरों में रहने को मजबूर हुए। ऐसे मामलों में, राज्य के पास दंगों को नियंत्रित करने के साधन होते हुए भी, वह निष्क्रिय रह सकता है या अप्रत्यक्ष रूप से स्थिति को बिगड़ने दे सकता है, जिससे निर्दोष लोगों को नुकसान उठाना पड़ता है।

2. **पुलिसिया हिंसा:** कई बार पुलिस बल, जो नागरिकों की सुरक्षा के लिए होता है, अत्यधिक बल प्रयोग करता है या प्रदर्शनकारियों पर लाठीचार्ज करता है, जिससे नागरिकों को चोटें आती हैं और उनके अधिकारों का हनन होता है।

इस प्रकार, यह कहा जा सकता है कि यद्यपि राज्य का कर्तव्य नागरिकों की रक्षा करना है, लेकिन व्यवहार में उसके कुछ कार्य स्वयं हिंसा के स्रोत बन सकते हैं।

प्रश्न 3

शांति को सर्वोत्तम रूप में तभी पाया जा सकता है जब स्वतंत्रता, समानता और न्याय कायम हो। क्या आप सहमत हैं?
Solution:

हम इस तथ्य से पूरी तरह सहमत हैं कि शांति को सर्वोत्तम रूप में तभी पाया जा सकता है जब स्वतंत्रता, समानता और न्याय कायम हो।

राजनीति के क्षेत्र में, समानता का अर्थ केवल राजनीतिक समानता (जैसे वोट देने का अधिकार) तक सीमित नहीं है, बल्कि इसमें सामाजिक और आर्थिक समानता भी शामिल है। सभी को समान अवसर मिलने चाहिए और किसी का भी शोषण नहीं होना चाहिए। यदि सभी को अपनी योग्यता के अनुसार काम मिलेगा, तो वे व्यस्त रहेंगे और उनके पास हिंसा के बारे में सोचने का समय या इच्छा नहीं होगी। जैसा कि कहावत है, 'खाली दिमाग शैतान का घर होता है', इसलिए व्यक्ति को हमेशा व्यस्त रखना महत्वपूर्ण है।

न्याय का संबंध समाज में जीवन को व्यवस्थित करने वाले नियमों और तरीकों से होता है। जिस समाज में एक सशक्त न्यायिक व्यवस्था होती है, वहां शांति बनी रहती है। लोग संतुष्ट रहते हैं क्योंकि उन्हें पता होता है कि अन्याय होने पर दोषी को सजा मिलेगी। ऐसे समाज में गलत प्रवृत्ति वाले लोगों की संख्या नगण्य होती है, जिससे हिंसा पनपने की कोई वजह नहीं रहती।

अतः, एक ऐसे समाज का निर्माण करना आवश्यक है जहाँ स्वतंत्रता, समानता और न्याय का सुंदर समन्वय हो। जहाँ कोई किसी का बुरा न सोचे, कोई किसी के साथ गलत न करे, बल्कि समरस सह-अस्तित्व के सिद्धांत का पालन करते हुए सभी आगे बढ़ें।

प्रश्न 4

हिंसा के माध्यम से दूरगामी न्यायोचित उद्देश्यों को नहीं पाया जा सकता है। आप इस कथन के बारे में क्या सोचते हैं?
Solution:

यह कथन बिल्कुल सत्य है। हिंसा को किसी भी स्थिति में उचित नहीं ठहराया जा सकता है, और न ही इसके माध्यम से दूरगामी न्यायोचित उद्देश्यों को प्राप्त किया जा सकता है। महात्मा गांधी ने भी कहा था, "मैं हिंसा का विरोध करता हूँ क्योंकि जब यह कोई अच्छा कार्य करती प्रतीत होती है तब अच्छाई अस्थायी होती है, जबकि इससे जो बुराई होती है वह स्थायी होती है।"

हिंसा का शिकार व्यक्ति जिन मनोवैज्ञानिक और भौतिक नुकसानों से गुजरता है, वे उसके भीतर शिकायतों को जन्म देते हैं। ये शिकायतें पीढ़ी-दर-पीढ़ी बनी रह सकती हैं और किसी घटना या टिप्पणी से उत्तेजित होकर संघर्षों के नए दौर को शुरू कर सकती हैं। न्यायपूर्ण और टिकाऊ शांति केवल दबी हुई शिकायतों और संघर्ष के कारणों को स्पष्ट रूप से व्यक्त करके और बातचीत के माध्यम से हल करके ही प्राप्त की जा सकती है। यही कारण है कि भारत और पाकिस्तान के बीच समस्याओं को हल करने के वर्तमान प्रयासों में विभिन्न वर्गों के बीच अधिक संपर्क को प्रोत्साहित करना शामिल है।

हमें यह नहीं भूलना चाहिए कि हिंसा एक बुराई है और शांति बनाए रखने के लिए इसकी आवश्यकता नहीं है। हिंसा का उपयोग केवल शांति प्राप्ति के तरीकों में विफलता के बाद ही किया जाना चाहिए, और तब भी यह प्रयास होना चाहिए कि हिंसा इतनी सीमित हो कि वह विवादों के निपटारे में सहायक सिद्ध हो। कुल मिलाकर, जहाँ तक संभव हो, हिंसा से बचना चाहिए क्योंकि यह मानव हित में है।

प्रश्न 5

विश्व में शांति स्थापना के जिन दृष्टिकोणों की अध्याय में चर्चा की गई है उनके बीच क्या अंतर है?
Solution:

विश्व में शांति स्थापना के लिए मुख्य रूप से तीन दृष्टिकोणों की चर्चा की गई है, जिनके बीच निम्नलिखित अंतर हैं:

  1. पहला दृष्टिकोण (राष्ट्र-केंद्रित और सत्ता-संतुलन): यह दृष्टिकोण राष्ट्रों को केंद्रीय स्थान देता है और उनकी संप्रभुता का आदर करता है। यह राष्ट्रों के बीच प्रतिद्वंद्विता को एक जीवंत सत्य मानता है। इसकी मुख्य चिंता प्रतिद्वंद्विता के उपयुक्त प्रबंधन और संघर्ष की आशंका को सत्ता-संतुलन की पारस्परिक व्यवस्था के द्वारा कम करना है। उन्नीसवीं सदी में प्रमुख यूरोपीय देशों ने इसी दृष्टिकोण को अपनाया था।
  2. दूसरा दृष्टिकोण (अंतर्राष्ट्रीय संगठन): इस दृष्टिकोण में अंतर्राष्ट्रीय संगठनों जैसे संयुक्त राष्ट्र की भूमिका पर जोर दिया जाता है। यह मानता है कि अंतर्राष्ट्रीय कानून और संगठन सदस्य राष्ट्रों के बीच विवादों को सुलझाने और शांति बनाए रखने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकते हैं।
  3. तीसरा दृष्टिकोण (व्यक्ति-केंद्रित): यह दृष्टिकोण शांति की स्थापना के लिए व्यक्तिगत स्तर पर प्रयासों पर बल देता है। इसमें अहिंसा, सहिष्णुता, करुणा और आपसी समझ जैसे मूल्यों को बढ़ावा देना शामिल है। यह मानता है कि जब व्यक्ति आंतरिक शांति प्राप्त करते हैं, तो वे समाज में शांति फैलाने में योगदान करते हैं।

इन दृष्टिकोणों के बीच मुख्य अंतर उनके केंद्रीय फोकस (राष्ट्र, अंतर्राष्ट्रीय संगठन, या व्यक्ति) और शांति प्राप्त करने के तरीकों में निहित है। पहला दृष्टिकोण शक्ति संतुलन पर निर्भर करता है, दूसरा कानूनी और संस्थागत ढांचे पर, और तीसरा व्यक्तिगत नैतिकता और व्यवहार पर।

Common mistakes

  • शांति को केवल युद्ध की अनुपस्थिति मानना।
  • हिंसा को न्यायोचित उद्देश्यों को प्राप्त करने का साधन समझना।
  • राज्य की भूमिका को केवल सुरक्षा प्रदाता के रूप में देखना, उसके अन्य दायित्वों को अनदेखा करना।
  • स्वतंत्रता, समानता और न्याय के बीच के अंतर्संबंध को न समझना।

Revision tips

  • शांति की परिभाषा को केवल नकारात्मक (युद्ध की अनुपस्थिति) से सकारात्मक (न्याय, समानता, स्वतंत्रता की उपस्थिति) तक विस्तार से समझें।
  • प्रत्येक प्रश्न के उत्तर में दिए गए उदाहरणों और तर्कों को ध्यान से पढ़ें और उन्हें अपने शब्दों में लिखने का अभ्यास करें।
  • शांति स्थापना के विभिन्न दृष्टिकोणों के बीच मुख्य अंतरों को सूचीबद्ध करें।
  • स्वतंत्रता, समानता और न्याय के बीच संबंध को स्पष्ट करने वाले तर्कों को याद करें।

Practice MCQs

Q1. शांतिपूर्ण दुनिया के लिए सबसे आवश्यक परिवर्तन क्या है?

Q2. राज्य का प्राथमिक दायित्व क्या है?

Q3. शांति को सर्वोत्तम रूप में कब पाया जा सकता है?

Q4. गांधीजी के अनुसार हिंसा के बारे में क्या सत्य है?

Q5. शांति स्थापना का एक दृष्टिकोण राष्ट्रों की संप्रभुता का आदर करता है और प्रतिद्वंद्विता को कैसे प्रबंधित करता है?

Frequently asked questions

कक्षा 11 राजनीति विज्ञान के अध्याय 9 का मुख्य विषय क्या है?

अध्याय 9 'शांति' का मुख्य विषय शांति की अवधारणा, इसके लिए आवश्यक शर्तें जैसे स्वतंत्रता, समानता और न्याय, और शांति स्थापना के विभिन्न दृष्टिकोणों का विश्लेषण करना है।

क्या शांति केवल युद्ध की अनुपस्थिति है?

नहीं, शांति केवल युद्ध की अनुपस्थिति नहीं है। यह स्वतंत्रता, समानता और न्याय जैसे सकारात्मक तत्वों की सक्रिय स्थापना भी है, जिसके लिए व्यक्तिगत और सामाजिक स्तर पर प्रयास आवश्यक हैं।

राज्य अपने नागरिकों के खिलाफ हिंसा का स्रोत कैसे बन सकता है?

राज्य कभी-कभी अपने हितों की रक्षा के लिए या विरोध के स्वरों को दबाने के लिए बल प्रयोग कर सकता है, जिससे वह स्वयं अपने नागरिकों के खिलाफ हिंसा का स्रोत बन जाता है।

हिंसा के माध्यम से न्यायोचित उद्देश्य क्यों प्राप्त नहीं किए जा सकते?

हिंसा से प्राप्त अच्छाई अस्थायी होती है और यह स्थायी मनोवैज्ञानिक तथा भौतिक नुकसान पहुँचाती है, जिससे शिकायतों की एक श्रृंखला उत्पन्न होती है जो भविष्य में संघर्ष का कारण बन सकती है।

शांति स्थापना के लिए कौन से तीन दृष्टिकोणों की चर्चा की गई है?

अध्याय में शांति स्थापना के लिए तीन दृष्टिकोणों की चर्चा की गई है: पहला, राष्ट्रों की संप्रभुता का आदर करते हुए सत्ता-संतुलन द्वारा प्रतिद्वंद्विता का प्रबंधन; दूसरा, शांति की स्थापना के लिए अंतर्राष्ट्रीय संगठनों की भूमिका; और तीसरा, शांति के लिए व्यक्तिगत स्तर पर प्रयास।

यह समाधान छात्रों की परीक्षा की तैयारी में कैसे मदद करेंगे?

ये समाधान प्रत्येक प्रश्न के विस्तृत और स्पष्ट उत्तर प्रदान करते हैं, जिससे छात्रों को विषय की गहरी समझ विकसित करने और परीक्षा में पूछे जाने वाले प्रश्नों के उत्तर प्रभावी ढंग से लिखने में मदद मिलेगी।

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