कक्षा 11 राजनीति विज्ञान: नागरिकता NCERT समाधान

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यह पृष्ठ कक्षा 11 राजनीति विज्ञान के अध्याय 6, 'नागरिकता' के लिए विस्तृत और सटीक NCERT समाधान प्रस्तुत करता है। इसमें नागरिकता की अवधारणा, राजनीतिक समुदाय की पूर्ण सदस्यता के रूप में इसके अधिकार और दायित्वों पर चर्चा की गई है। समाधान समकालीन लोकतांत्रिक राज्यों में नागरिकों द्वारा अपेक्षित अधिकारों जैसे सार्वभौमिक वयस्क मताधिकार, शिक्षा, सूचना, समानता और जीविकोपार्जन के अधिकार की व्याख्या करते हैं। साथ ही, यह नागरिकों के राज्य और अन्य नागरिकों के प्रति दायित्वों पर भी प्रकाश डालता है, जिसमें सामूहिक कल्याण की रक्षा करना और कानूनों का पालन करना शामिल है। यह खंड भारत में दलितों और महिलाओं द्वारा अपने अधिकारों के लिए किए गए हालिया संघर्षों का भी विश्लेषण करता है, जिसमें आरक्षण, समान अवसर और सामाजिक-आर्थिक समानता की मांगें शामिल हैं। अंत में, यह शरणार्थियों की समस्याओं और वैश्विक नागरिकता की अवधारणा के माध्यम से उनकी सहायता की संभावनाओं पर भी विचार करता है। ये समाधान छात्रों को परीक्षा की तैयारी के लिए एक स्पष्ट और व्यापक समझ प्रदान करते हैं।

Quick info

BoardCBSE
ClassClass 11
Subjectराजनीति विज्ञान
Session2026
LanguageHindi
TypeNCERT Solutions
Chapter6. नागरिकता

Chapter summary

कक्षा 11 राजनीति विज्ञान के अध्याय 6 'नागरिकता' के लिए NCERT समाधान, नागरिकता की बहुआयामी प्रकृति को स्पष्ट करते हैं। यह समाधान राजनीतिक समुदाय की सदस्यता के रूप में नागरिक के अधिकारों और कर्तव्यों की पड़ताल करते हैं। इसमें समकालीन लोकतांत्रिक समाजों में नागरिकों के अधिकारों की सूची और उनके राज्य व साथी नागरिकों के प्रति दायित्वों का विस्तृत विवरण शामिल है। समाधान भारत में दलितों और महिलाओं द्वारा अपने नागरिक अधिकारों के लिए चलाए गए महत्वपूर्ण आंदोलनों पर भी प्रकाश डालते हैं, जिसमें आरक्षण और समान अवसरों की मांगें प्रमुख थीं। अंत में, यह शरणार्थियों के मुद्दों और वैश्विक नागरिकता की भूमिका पर भी चर्चा करता है।

Learning outcomes

  • नागरिकता को राजनीतिक समुदाय की पूर्ण और समान सदस्यता के रूप में समझना।
  • समकालीन लोकतांत्रिक राज्यों में नागरिकों के विभिन्न अधिकारों की पहचान करना।
  • नागरिकों के राज्य और अन्य नागरिकों के प्रति दायित्वों का विश्लेषण करना।
  • भारत में दलितों और महिलाओं द्वारा नागरिक अधिकारों के लिए किए गए संघर्षों का अध्ययन करना।
  • शरणार्थियों की समस्याओं और वैश्विक नागरिकता की भूमिका को समझना।

Topics covered

Paper topics

  • नागरिकता की परिभाषा
  • नागरिकता के अधिकार
  • नागरिकों के दायित्व
  • समकालीन लोकतांत्रिक राज्य
  • सार्वभौमिक वयस्क मताधिकार
  • शिक्षा का अधिकार
  • समानता का अधिकार
  • दलित आंदोलन
  • महिला आंदोलन
  • शरणार्थियों की समस्याएँ
  • वैश्विक नागरिकता
  • कानूनों का पालन

Important topics

  • नागरिकता के अधिकार और दायित्व
  • समकालीन लोकतांत्रिक राज्यों में नागरिक अधिकार
  • दलित आंदोलन और उनकी मांगें
  • महिला आंदोलन और उनकी मांगें
  • शरणार्थियों की समस्याएँ
  • वैश्विक नागरिकता की अवधारणा

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Questions and Solutions

प्रश्न 1

राजनीतिक समुदाय की पूर्ण और समान सदस्यता के रूप में नागरिकता में अधिकार और दायित्व दोनों शामिल हैं। समकालीन लोकतांत्रिक राज्यों में नागरिक किन अधिकारों के उपयोग की अपेक्षा कर सकते हैं? नागरिकों के राज्य और अन्य नागरिकों के प्रति क्या दायित्व हैं?
Solution:

नागरिकता को किसी राजनीतिक समुदाय की पूर्ण और समान सदस्यता के रूप में परिभाषित किया जाता है, जिसमें नागरिकों को अधिकार प्राप्त होते हैं और उनके कुछ दायित्व भी होते हैं।

समकालीन लोकतांत्रिक राज्यों में, नागरिक निम्नलिखित अधिकारों के उपयोग की अपेक्षा कर सकते हैं:

  • सार्वभौमिक वयस्क मताधिकार का अधिकार, जिससे वे अपने प्रतिनिधियों का चुनाव कर सकें।
  • अपनी भाषा, लिपि और संस्कृति को बनाए रखने और उसके शिक्षण के लिए संस्थाएँ स्थापित करने का अधिकार।
  • किसी भी धर्म का पालन करने, अभ्यास करने और प्रचार करने की स्वतंत्रता का अधिकार।
  • न्यूनतम मजदूरी प्राप्त करने का अधिकार, ताकि वे सम्मानजनक जीवन जी सकें।
  • गुणवत्तापूर्ण शिक्षा प्राप्त करने का अधिकार, जो उनके व्यक्तिगत और व्यावसायिक विकास के लिए आवश्यक है।
  • सरकारी कामकाज और निर्णयों के बारे में सूचना प्राप्त करने का अधिकार।
  • कानून के समक्ष समानता का अधिकार और भेदभाव से सुरक्षा का अधिकार।
  • जीविकोपार्जन के लिए उपयुक्त साधन प्राप्त करने का अधिकार।
  • सुरक्षित और सम्मानजनक आवास का अधिकार।
  • देश के भीतर कहीं भी आने-जाने का अधिकार।

यह ध्यान रखना महत्वपूर्ण है कि लोकतांत्रिक व्यवस्थाओं में अधिकारों की सूची लगातार विकसित और विस्तारित हो रही है। कुछ अधिकारों को बुनियादी माना जाता है और उन्हें प्राथमिकता दी जाती है, जबकि अन्य को सरकार परिस्थितियों के अनुसार मान्यता देती है।

नागरिकों के राज्य और अन्य नागरिकों के प्रति निम्नलिखित दायित्व भी हैं:

  • सामूहिक कल्याण को प्राथमिकता देना: नागरिकों को केवल अपनी निजी ज़रूरतों और हितों पर ध्यान केंद्रित नहीं करना चाहिए, बल्कि उन चीज़ों की भी रक्षा करनी चाहिए जो सभी के लिए हितकर हैं, जैसे कि वायु और जल प्रदूषण को कम करना, वृक्षारोपण को बढ़ावा देना और वनों की कटाई को रोकना।
  • राष्ट्रीय भावना का सम्मान: नागरिकों को ऐसा कोई कार्य नहीं करना चाहिए जिससे देश की भावना आहत हो और उनके निर्णय सटीक और उचित होने चाहिए।
  • कानूनों का पालन: राज्य के नागरिक के नाते, यह दायित्व है कि वे राज्य द्वारा निर्मित कानूनों का पालन करें और देश तथा समाज में शांति व्यवस्था बनाए रखने में राज्य का पूरा सहयोग करें।
  • अन्य नागरिकों के अधिकारों का सम्मान: नागरिकों को अन्य लोगों के अधिकारों और स्वतंत्रताओं का सम्मान करना चाहिए और उनके साथ सौहार्दपूर्ण व्यवहार करना चाहिए।

प्रश्न 2

सभी नागरिकों को समान अधिकार दिए तो जा सकते हैं लेकिन हो सकता है कि वे इन अधिकारों का प्रयोग समानता से न कर सके। इस कथन की व्याख्या कीजिए।
Solution:

यह कथन बिल्कुल सही है कि सभी नागरिकों को सैद्धांतिक रूप से समान अधिकार दिए जा सकते हैं, लेकिन व्यवहार में वे इन अधिकारों का प्रयोग समान रूप से नहीं कर पाते हैं। इसका मुख्य कारण समाज में व्याप्त असमानताएँ हैं।

हमारे समाज में आर्थिक और सामाजिक असमानताएँ मौजूद हैं। उदाहरण के लिए, एक धनी व्यक्ति और एक गरीब व्यक्ति, दोनों को शिक्षा का अधिकार प्राप्त हो सकता है, लेकिन गरीब व्यक्ति संसाधनों की कमी के कारण उस अधिकार का पूरी तरह से उपयोग नहीं कर पाता। इसी प्रकार, जो लोग सड़क के किनारे रहते हैं या अत्यंत विपन्न हैं, वे अपने अधिकारों का प्रयोग करने में असमर्थ हो सकते हैं।

ऐतिहासिक रूप से, जमींदारी प्रथा इसका एक ज्वलंत उदाहरण थी। जमींदारों को जहाँ जीने का अधिकार था, वहीं गरीबों को भी वही अधिकार प्राप्त था। परंतु, वास्तविकता यह थी कि गरीब का जीवन क्रूर जमींदारों की दया पर निर्भर करता था। उनकी छोटी सी भूल पर भी उन्हें कड़ी सजा दी जाती थी और उनकी सुनने वाला कोई नहीं होता था। इस प्रकार, एक वर्ग दूसरे का शोषण करता था, भले ही दोनों को सैद्धांतिक रूप से समान अधिकार प्राप्त हों।

यदि समाज में वास्तविक समानता स्थापित हो जाए और सभी नागरिक अपने अधिकारों का प्रयोग समान रूप से कर सकें, तो समाज निश्चित रूप से प्रगति की ओर अग्रसर होगा। अधिकारों का समान प्रयोग तभी संभव है जब सामाजिक और आर्थिक असमानताओं को दूर किया जाए।

प्रश्न 3

भारत में नागरिक अधिकारों के लिए हाल के वर्षों में किए गए किन्हीं दो संघर्षों पर टिप्पणी लिखिए। इन संघर्षों में किन अधिकारों की माँग की गई थी?
Solution:

भारत में नागरिक अधिकारों के लिए हाल के वर्षों में कई महत्वपूर्ण संघर्ष हुए हैं। यहाँ दो प्रमुख संघर्षों पर टिप्पणी दी गई है:

  1. दलित आंदोलन: भारत में दलित समुदाय सदियों से सामाजिक भेदभाव और उत्पीड़न का शिकार रहा है। रूढ़िवादी सामाजिक संरचनाओं के कारण, उन्हें अक्सर निम्न स्तर का जीवन जीने के लिए मजबूर किया गया है। अपनी इस दयनीय स्थिति को सुधारने और समाज की मुख्यधारा में शामिल होने के लिए, दलितों ने अपने अधिकारों के लिए संघर्ष किया है। इस आंदोलन की मुख्य मांगों में आरक्षण की व्यवस्था शामिल थी, ताकि उन्हें शिक्षा, सरकारी नौकरियों और राजनीतिक प्रतिनिधित्व में समान अवसर मिल सकें। 'मंडल आयोग' की रिपोर्ट के बाद यह संघर्ष और तेज हुआ, जिसने अन्य पिछड़ा वर्ग (ओबीसी) के साथ-साथ दलितों के लिए भी आरक्षण का प्रावधान किया। दलित समुदाय केवल राजनीतिक अधिकारों तक ही सीमित नहीं रहना चाहता, बल्कि वे समान सामाजिक और आर्थिक अधिकार भी चाहते हैं, क्योंकि इनके बिना राजनीतिक अधिकारों का कोई वास्तविक अर्थ नहीं रह जाता।

  2. महिला आंदोलन: भारत में महिलाओं को भी लंबे समय से सामाजिक शोषण और असमानता का सामना करना पड़ा है। महिला आंदोलनों ने महिलाओं की दयनीय स्थिति की ओर समाज का ध्यान आकर्षित किया है और जनमत को बदलने का प्रयास किया है। इन आंदोलनों की प्रमुख मांगें सरकारी नीतियों को प्रभावित करना, महिलाओं के लिए समान अधिकार और अवसर सुनिश्चित करना, और उनकी सुरक्षा की गारंटी देना रही हैं। महिला सशक्तिकरण बढ़ा है, लेकिन आज भी महिलाएँ शोषण से पूरी तरह मुक्त नहीं हैं। उन्हें पुरुषों के समान दर्जा नहीं मिला है, मजदूरी में असमानता बरती जाती है, और लोकसभा व विधानसभाओं में उनका प्रतिनिधित्व बहुत कम है। वर्तमान समय की शिक्षित और जागरूक महिलाएँ अपने अधिकारों के प्रति अधिक सचेत हैं और सरकार में अपना प्रतिनिधित्व बढ़ाने की माँग कर रही हैं।

प्रश्न 4

शरणार्थियों की समस्याएँ क्या हैं? वैश्विक नागरिकता की अवधारणा किस प्रकार उनकी सहायता कर सकती है?
Solution:

शरणार्थी वे लोग होते हैं जो उत्पीड़न, आक्रमण, युद्ध या अन्य गंभीर कारणों से अपने मूल निवास स्थान से विस्थापित हो जाते हैं। यदि कोई देश उन्हें स्वीकार करने से इनकार कर देता है और वे अपने घर नहीं लौट सकते, तो वे राज्यविहीन या शरणार्थी बन जाते हैं।

शरणार्थियों की मुख्य समस्याएँ निम्नलिखित हैं:

  • आवास और सुरक्षा: वे अक्सर पड़ोसी देशों में शिविरों में या अवैध प्रवासियों के रूप में रहने को मजबूर होते हैं, जहाँ उन्हें बुनियादी आवास और सुरक्षा की कमी का सामना करना पड़ता है।
  • कानूनी स्थिति: उनकी कानूनी स्थिति अनिश्चित होती है, जिससे उन्हें काम करने, शिक्षा प्राप्त करने या स्वास्थ्य सेवाओं तक पहुँचने में कठिनाई होती है।
  • आर्थिक अभाव: वे अक्सर काम करने में असमर्थ होते हैं या उन्हें कम मजदूरी पर काम करना पड़ता है, जिससे वे गरीबी में जीवन यापन करते हैं।
  • सामाजिक अलगाव: उन्हें नए समाज में घुलने-मिलने में कठिनाई होती है और वे सामाजिक अलगाव का अनुभव कर सकते हैं।
  • मानसिक आघात: युद्ध, हिंसा और विस्थापन के कारण वे गंभीर मानसिक आघात से गुजर सकते हैं।

वैश्विक नागरिकता की अवधारणा किस प्रकार सहायता कर सकती है:

वैश्विक नागरिकता की अवधारणा यह मानती है कि हम सभी एक बड़े वैश्विक समुदाय के सदस्य हैं, न कि केवल अपने राष्ट्र के। यह अवधारणा शरणार्थियों की सहायता करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती है:

  • मानवीय सहानुभूति को बढ़ावा: वैश्विक नागरिकता लोगों को राष्ट्रीय सीमाओं से परे जाकर अन्य मनुष्यों के प्रति सहानुभूति रखने और उनकी पीड़ा को समझने के लिए प्रेरित करती है।
  • अंतर्राष्ट्रीय सहयोग: यह अवधारणा सरकारों और अंतर्राष्ट्रीय संगठनों को शरणार्थियों के लिए अधिक मानवीय और प्रभावी समाधान खोजने के लिए मिलकर काम करने हेतु प्रोत्साहित करती है।
  • अधिकारों की वकालत: वैश्विक नागरिक शरणार्थियों के अधिकारों की वकालत कर सकते हैं और उनके लिए बेहतर जीवन स्थितियों की मांग कर सकते हैं।
  • जागरूकता फैलाना: यह अवधारणा शरणार्थी संकट के बारे में जागरूकता फैलाकर लोगों को इस मुद्दे पर कार्रवाई करने के लिए प्रेरित कर सकती है।

इस प्रकार, वैश्विक नागरिकता की भावना शरणार्थियों की समस्याओं के प्रति अधिक संवेदनशील और उत्तरदायी दृष्टिकोण विकसित करने में मदद कर सकती है, जिससे उनके जीवन को बेहतर बनाने के लिए सामूहिक प्रयास किए जा सकें।

Common mistakes

  • अधिकारों और दायित्वों के बीच अंतर को स्पष्ट रूप से न समझना।
  • नागरिक अधिकारों के लिए हुए ऐतिहासिक संघर्षों के महत्व को कम आंकना।
  • वैश्विक नागरिकता की अवधारणा को केवल राष्ट्रीय नागरिकता के संदर्भ में देखना।

Revision tips

  • प्रत्येक अधिकार और दायित्व के लिए विशिष्ट उदाहरणों को याद करें।
  • दलितों और महिला आंदोलनों के मुख्य मांगों और परिणामों को रेखांकित करें।
  • शरणार्थी संकट और वैश्विक नागरिकता के बीच संबंध पर विचार करें।

Practice MCQs

Q1. नागरिकता को राजनीतिक समुदाय की पूर्ण और समान सदस्यता के रूप में परिभाषित करने में क्या शामिल है?

Q2. समकालीन लोकतांत्रिक राज्यों में नागरिकों से अपेक्षित एक अधिकार कौन सा है?

Q3. नागरिकों का एक महत्वपूर्ण दायित्व क्या है?

Q4. भारत में दलित आंदोलन की मुख्य मांगों में से एक क्या थी?

Q5. महिला आंदोलन ने किन अधिकारों की मांग की?

Frequently asked questions

नागरिकता का क्या अर्थ है?

नागरिकता का अर्थ है किसी राजनीतिक समुदाय की पूर्ण और समान सदस्यता, जिसमें अधिकार और दायित्व दोनों शामिल होते हैं।

समकालीन लोकतांत्रिक राज्यों में नागरिकों को कौन से मुख्य अधिकार प्राप्त होते हैं?

नागरिकों को सार्वभौमिक वयस्क मताधिकार, शिक्षा का अधिकार, सूचना का अधिकार, समानता का अधिकार, अपनी भाषा और संस्कृति के शिक्षण का अधिकार आदि प्राप्त होते हैं।

नागरिकों के राज्य और अन्य नागरिकों के प्रति क्या दायित्व हैं?

नागरिकों का दायित्व है कि वे राज्य द्वारा निर्मित कानूनों का पालन करें, शांति व्यवस्था बनाए रखें, सामूहिक कल्याण की रक्षा करें और अन्य नागरिकों के अधिकारों का सम्मान करें।

भारत में नागरिक अधिकारों के लिए हुए हाल के संघर्षों के दो उदाहरण कौन से हैं?

भारत में नागरिक अधिकारों के लिए हुए हाल के संघर्षों में दलित आंदोलन और महिला आंदोलन प्रमुख हैं।

शरणार्थियों की मुख्य समस्याएँ क्या हैं?

शरणार्थी उत्पीड़न, युद्ध या अन्य कारणों से विस्थापित होते हैं और अक्सर उन्हें पड़ोसी देशों में शिविरों में या अवैध प्रवासी के रूप में रहना पड़ता है, जहाँ उन्हें कानूनी काम या शिक्षा जैसी बुनियादी सुविधाओं से वंचित रहना पड़ सकता है।

वैश्विक नागरिकता शरणार्थियों की सहायता कैसे कर सकती है?

वैश्विक नागरिकता की अवधारणा सभी मनुष्यों को एक वैश्विक समुदाय का हिस्सा मानती है, जो शरणार्थियों के प्रति अधिक सहानुभूति और सहायता को बढ़ावा दे सकती है, जिससे उनकी समस्याओं के समाधान में मदद मिल सकती है।

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