कक्षा 11 राजनीति विज्ञान NCERT समाधान: अध्याय 5 अधिकार
यह पृष्ठ कक्षा 11 राजनीति विज्ञान के अध्याय 5 'अधिकार' के लिए विस्तृत NCERT समाधान प्रस्तुत करता है। इसमें अधिकारों की परिभाषा, उनके महत्व और अधिकारों का दावा करने के आधारों पर चर्चा की गई है। समाधान बताते हैं कि अधिकार क्या हैं, वे क्यों आवश्यक हैं, और समाज में सम्मानजनक जीवन जीने के लिए उनकी क्या भूमिका है। यह पृष्ठ अधिकारों के ऐतिहासिक विकास, जैसे प्राकृतिक अधिकारों की अवधारणा और संयुक्त राष्ट्र मानवाधिकारों की सार्वभौमिक घोषणा पर भी प्रकाश डालता है। भारतीय संविधान में मौलिक अधिकारों के संदर्भ और संपत्ति के अधिकार को हटाए जाने की जानकारी भी शामिल है। ये समाधान छात्रों को अधिकारों की अवधारणा को गहराई से समझने और परीक्षा की तैयारी में मदद करने के लिए डिज़ाइन किए गए हैं।
Quick info
| Board | CBSE |
|---|---|
| Class | Class 11 |
| Subject | राजनीति विज्ञान |
| Session | 2026 |
| Language | Hindi |
| Type | NCERT Solutions |
| Chapter | 5. अधिकार |
Chapter summary
कक्षा 11 राजनीति विज्ञान के अध्याय 5 'अधिकार' के लिए NCERT समाधान अधिकारों की प्रकृति, महत्व और उनके दावों के आधारों को स्पष्ट करते हैं। यह समाधान अधिकारों को सामाजिक जीवन की आवश्यक परिस्थितियाँ बताता है जो व्यक्तिगत विकास के लिए महत्वपूर्ण हैं। इसमें मानवाधिकारों की सार्वभौमिक घोषणा और प्राकृतिक अधिकारों की ऐतिहासिक अवधारणाओं का भी उल्लेख है। समाधान यह भी बताते हैं कि कैसे अधिकार सरकार को निरंकुश होने से रोकते हैं और सामाजिक कल्याण को बढ़ावा देते हैं।
Learning outcomes
- अधिकारों की परिभाषा और उनके महत्व को समझना।
- व्यक्तिगत विकास के लिए अधिकारों की आवश्यकता का विश्लेषण करना।
- अधिकारों का दावा करने के लिए उपयुक्त आधारों की पहचान करना।
- मानवाधिकारों की सार्वभौमिक घोषणा के महत्व को जानना।
- भारतीय संविधान में मौलिक अधिकारों की भूमिका को समझना।
Topics covered
Paper topics
- अधिकारों की परिभाषा
- अधिकारों का महत्व
- प्राकृतिक अधिकार
- मानवाधिकारों की सार्वभौमिक घोषणा
- राजनीतिक अधिकार
- नागरिक अधिकार
- भारतीय संविधान में मौलिक अधिकार
- संपत्ति का अधिकार
- अधिकारों का दावा करने के आधार
- लास्की का अधिकार पर विचार
- इमैनुएल कांट के विचार
Important topics
- अधिकारों की परिभाषा और महत्व
- प्राकृतिक अधिकार और उनका ऐतिहासिक संदर्भ
- मानवाधिकारों की सार्वभौमिक घोषणा
- भारतीय संविधान में मौलिक अधिकार
- अधिकारों का दावा करने के आधार
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Questions and Solutions
प्रश्न 1
अधिकारों को सामाजिक जीवन की वे परिस्थितियाँ माना जाता है, जिनके बिना कोई भी व्यक्ति अपना पूर्ण विकास नहीं कर सकता है। ये वे मान्यताएँ हैं जिन्हें समाज महत्वपूर्ण समझता है और जिन्हें राज्य द्वारा संरक्षण प्राप्त होता है। अधिकारों के बिना, व्यक्ति अपनी क्षमताओं का पूरी तरह से उपयोग नहीं कर पाता और उसका विकास अवरुद्ध हो जाता है।
अधिकारों का महत्व:
- व्यक्तिगत विकास: अधिकार व्यक्ति को अपनी प्रतिभा, योग्यता और शक्तियों का विकास करने के अवसर प्रदान करते हैं।
- सामाजिक उन्नति: जब व्यक्तियों का विकास होता है, तो यह समाज की समग्र उन्नति में भी योगदान देता है।
- सरकार पर नियंत्रण: अधिकार सरकार को निरंकुश या अत्याचारी बनने से रोकते हैं, जिससे नागरिकों की स्वतंत्रता सुरक्षित रहती है।
- सामाजिक कल्याण: अधिकार सामाजिक कल्याण को बढ़ावा देते हैं, यह सुनिश्चित करते हुए कि सभी नागरिकों को सम्मानजनक जीवन जीने के लिए आवश्यक सुविधाएँ मिलें।
- गरिमापूर्ण जीवन: अधिकार व्यक्तियों को सम्मान और गरिमा के साथ जीने में सक्षम बनाते हैं, जैसे आजीविका का अधिकार जो आर्थिक स्वतंत्रता और गरिमा सुनिश्चित करता है।
अधिकारों का दावा करने के आधार:
- आवश्यकताएँ और विकास: मनुष्य अपनी विभिन्न आवश्यकताओं की पूर्ति के लिए प्रयास करता है, जो उसके विकास के लिए आवश्यक हैं। अधिकार इन्हीं आवश्यकताओं की पूर्ति के लिए अवसर प्रदान करने की मांग पर आधारित होते हैं।
- जीवन के लिए अनिवार्यता: कोई भी मांग तभी अधिकार का रूप ले सकती है जब वह व्यक्ति के जीवन जीने के लिए आवश्यक हो।
- सामाजिक स्वीकृति: समाज द्वारा उस मांग को उचित समझा जाना और स्वीकार किया जाना भी अधिकार बनने का एक महत्वपूर्ण आधार है।
उदाहरण के लिए, आजीविका का अधिकार इसलिए महत्वपूर्ण है क्योंकि यह व्यक्ति को सम्मानजनक जीवन जीने और अपनी प्रतिभा का उपयोग करने में सक्षम बनाता है।
Common mistakes
- अधिकारों को केवल विशेषाधिकार समझना।
- अधिकारों और कर्तव्यों के बीच संबंध को अनदेखा करना।
- अधिकारों के सामाजिक और नैतिक आधारों को स्पष्ट न कर पाना।
Revision tips
- अधिकारों की परिभाषा को लास्की और हॉलैंड जैसे विचारकों के अनुसार याद करें।
- अधिकारों के महत्व को सूचीबद्ध करें और प्रत्येक बिंदु को समझें।
- अधिकारों के दावों के आधारों को स्पष्ट रूप से समझें।
- मानवाधिकारों की सार्वभौमिक घोषणा और भारतीय संविधान के मौलिक अधिकारों से तुलना करें।
Practice MCQs
Q1. अधिकारों को सामान्यतः क्या माना जाता है?
Explanation: अधिकारों को सामाजिक जीवन की वे परिस्थितियाँ माना जाता है जिनके बिना कोई भी व्यक्ति अपना पूर्ण विकास नहीं कर सकता है।
Q2. 10 दिसंबर 1948 को संयुक्त राष्ट्र की सामान्य सभा ने किसे स्वीकार किया?
Explanation: 10 दिसंबर 1948 को संयुक्त राष्ट्र की सामान्य सभा ने मानवाधिकारों की सार्वभौमिक घोषणा को स्वीकार किया और लागू किया।
Q3. 17वीं और 18वीं शताब्दी के राजनीतिक सिद्धांतकारों के अनुसार अधिकार कैसे प्राप्त होते थे?
Explanation: 17वीं और 18वीं शताब्दी में, यह माना जाता था कि अधिकार प्रकृति या ईश्वर द्वारा प्रदत्त होते हैं और जन्म से प्राप्त होते हैं।
Q4. निम्नलिखित में से कौन सा अधिकार पहले तीन प्राकृतिक अधिकारों में शामिल था, जिसे बाद में हटा दिया गया?
Explanation: जीवन, स्वतंत्रता और संपत्ति के अधिकार को तीन प्राकृतिक अधिकार माना जाता था, लेकिन भारतीय संविधान से संपत्ति के अधिकार को बाद में हटा दिया गया।
Q5. लास्की के अनुसार, अधिकार क्या हैं?
Explanation: लास्की के अनुसार, अधिकार सामाजिक जीवन की वे परिस्थितियाँ हैं जिनके बिना कोई भी व्यक्ति अपना पूर्ण विकास नहीं कर सकता है।
Frequently asked questions
अधिकार क्या होते हैं?
अधिकार उन सामाजिक परिस्थितियों को कहते हैं जिन्हें समाज के सभी लोग सम्मान और गरिमा के साथ जीवन जीने के लिए आवश्यक मानते हैं। ये व्यक्तिगत विकास के लिए महत्वपूर्ण हैं।
अधिकार महत्वपूर्ण क्यों हैं?
अधिकार व्यक्ति के व्यक्तित्व के विकास, शक्तियों के विस्तार, समाज की उन्नति, सरकार को निरंकुश होने से रोकने और जीवन को सुखमय बनाने के लिए महत्वपूर्ण हैं।
अधिकारों का दावा करने के मुख्य आधार क्या हैं?
अधिकारों का दावा करने के मुख्य आधार मनुष्य की अपनी आवश्यकताओं की पूर्ति की इच्छा, जीवन के लिए उनकी आवश्यकता की अनिवार्यता और समाज द्वारा उनकी मांग की स्वीकृति हैं।
मानवाधिकारों की सार्वभौमिक घोषणा कब स्वीकार की गई?
मानवाधिकारों की सार्वभौमिक घोषणा 10 दिसंबर 1948 को संयुक्त राष्ट्र की सामान्य सभा द्वारा स्वीकार की गई थी।
भारतीय संविधान में संपत्ति के अधिकार का क्या हुआ?
भारतीय संविधान में पहले संपत्ति का अधिकार एक मौलिक अधिकार था, लेकिन 1979 में 44वें संशोधन द्वारा इसे हटा दिया गया।
यह समाधान किस कक्षा और विषय के लिए उपयोगी है?
यह समाधान कक्षा 11 के राजनीति विज्ञान विषय के लिए है, विशेष रूप से 'अधिकार' अध्याय के लिए।
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