CBSE Class 11 Hindi Aroh Bhag-I Chapter 12: मीरा के पद NCERT Solutions

NCERT Solutions PDF Class 11 PDF

This chapter, "मीरा के पद" (Meera's Verses) for CBSE Class 11 Hindi Aroh Bhag-I, delves into the devotional poetry of the renowned saint-poetess Meerabai. The NCERT Solutions provided here offer a detailed exploration of her verses, focusing on her unique form of devotion to Lord Krishna. Students will understand how Meerabai viewed Krishna, the specific रूप (form) she worshipped, and the profound emotional and spiritual depth of her poetry. The solutions also analyze the भाव (emotional content) and शिल्प (poetic craft) of her verses, highlighting the use of metaphors, alliteration, and the musicality of her language. These solutions are designed to help students grasp the nuances of Meerabai's devotional style and the literary beauty of her compositions, aiding in their exam preparation.

Quick info

BoardCBSE
ClassClass 11
SubjectHindi Aroh Bhag-I
Session2026
LanguageHindi
TypeNCERT Solutions
ChapterChapter 12

Chapter summary

Chapter 12 of Hindi Aroh Bhag-I presents "मीरा के पद," exploring Meerabai's devotional poetry. The NCERT Solutions focus on understanding her worship of Krishna as a divine husband and her self-identification as his devotee. Key aspects covered include the visual representation of Krishna in her poems and an analysis of the emotional and stylistic elements within her verses, such as the use of metaphors and rhetorical devices. These solutions aim to provide a clear understanding of the poetic and devotional significance of Meerabai's work.

Learning outcomes

  • Understand Meerabai's form of devotion to Lord Krishna.
  • Analyze the imagery and symbolism used in Meerabai's poetry.
  • Identify and explain the भाव (emotional content) in the given verses.
  • Recognize and appreciate the शिल्प (poetic craft) and literary devices employed by Meerabai.
  • Interpret the meaning of specific lines and phrases from the poems.

Topics covered

Paper topics

  • मीरा के पद
  • कृष्ण भक्ति
  • भक्ति के रूप
  • भाव सौंदर्य
  • शिल्प सौंदर्य
  • रूपक अलंकार
  • पुनरुक्ति अलंकार
  • मीराबाई की कविताएँ
  • राजस्थानी मिश्रित ब्रजभाषा
  • भक्ति की महिमा
  • सांसारिक सुखों का त्याग
  • आध्यात्मिक आनंद

Important topics

  • मीरा की कृष्ण भक्ति का स्वरूप
  • कृष्ण के मनमोहक रूप का वर्णन
  • आंसुओं से प्रेम-बेलि सींचना
  • आनंद-फल की प्राप्ति
  • भक्ति को मक्खन के समान मानना
  • सांसारिक सार तत्व ग्रहण करना
  • रूपक और पुनरुक्ति अलंकार का प्रयोग

PDF preview

Read page by page below. PDF is streamed from the official NCERT website — no download button on this page.

Loading document …
Page of
Loading page …

Questions and Solutions

प्रश्न 1

मीरा कृष्ण की उपासना किस रूप में करती है? वह रूप कैसा है?
Solution: मीरा कृष्ण की आराधना एक अनन्य भक्त के रूप में करती हैं, जहाँ वे कृष्ण को अपने स्वामी और पति के समान मानती हैं, और स्वयं को उनकी दासी के रूप में समर्पित करती हैं। कृष्ण के जिस रूप का मीरा वर्णन करती हैं, वह अत्यंत मनमोहक और अलौकिक है। वे कृष्ण को उस रूप में देखती हैं जिन्होंने गोवर्धन पर्वत को अपनी उंगली पर धारण किया था और जिनके सिर पर सदैव एक सुंदर मोर-मुकुट सुशोभित रहता है। यह रूप उनकी शक्ति, लीला और सौंदर्य का प्रतीक है।

प्रश्न 2

भाव व शिल्प सौंदर्य स्पष्ट कीजिए -

(क) अंस्वन जल सींचि-सींची, प्रेम-बेलि बोयी अब त बेलि फैलि गई, आणंद-फल होयी

(ख) दूध की मथनियाँ बड़े प्रेम से विलोयी

दिध मिथ घृत काढि लियो, डारि दयी छोयी

Solution:

(क) भाव-सौन्दर्य: इस पंक्ति में मीरा की भक्ति अपने चरम पर दिखाई देती है। उन्होंने कृष्ण के प्रति अपने प्रेम को एक बेल के रूप में चित्रित किया है, जिसे उन्होंने अपने आंसुओं (अंस्वन जल) से सींचा है। यह दर्शाता है कि उनकी भक्ति केवल बाहरी आडंबर नहीं, बल्कि गहन भावनात्मक समर्पण का परिणाम है। अब यह प्रेम-बेलि (भक्ति) पूरी तरह से फैल चुकी है और इससे 'आनंद-फल' प्राप्त हो रहे हैं, जिसका अर्थ है कि मीरा को अपनी भक्ति के माध्यम से परमानंद और आध्यात्मिक सुख की प्राप्ति हो रही है।

शिल्प-सौन्दर्य: इस पद की भाषा अत्यंत मधुर और संगीतमय है, जिसमें राजस्थानी प्रभाव स्पष्ट झलकता है। "सींची-सींची" शब्द के प्रयोग से पुनरुक्ति अलंकार की छटा बिखरी है, जो क्रिया की निरंतरता और तीव्रता को दर्शाता है। "प्रेम-बेलि" और "आनंद-फल" जैसे वाक्यांशों में रूपक अलंकार का सुंदर प्रयोग किया गया है, जहाँ प्रेम को बेल और आध्यात्मिक सुख को फल के रूप में प्रस्तुत किया गया है।

(ख) भाव-सौन्दर्य: इस पंक्ति में मीरा भक्ति की प्रक्रिया और उसके सार को समझाती हैं। वे कहती हैं कि उन्होंने दूध की मथनी को बड़े प्रेम से मथा है, ठीक उसी तरह जैसे वे अपनी भक्ति में लीन रहती हैं। इस मथने की क्रिया से उन्होंने मक्खन (घी) निकाल लिया है और छाछ को छोड़ दिया है। इसका प्रतीकात्मक अर्थ यह है कि मीरा ने संसार के सार तत्व (भक्ति और ईश्वर प्रेम) को ग्रहण कर लिया है और व्यर्थ की सांसारिक बातों या मोह-माया को त्याग दिया है। यह उनकी विवेकपूर्ण भक्ति को दर्शाता है।

Common mistakes

  • Confusing the different forms of devotion.
  • Overlooking the symbolic meaning of poetic imagery.
  • Misinterpreting the emotional tone of the verses.
  • Failing to identify literary devices like metaphors and alliteration.

Revision tips

  • Focus on understanding Meerabai's personal relationship with Krishna as depicted in the verses.
  • Pay close attention to the specific descriptions of Krishna's form.
  • Analyze the meaning of key phrases like "प्रेम-बेलि" and "आनंद-फल".
  • Identify examples of "पुनरुक्ति" (alliteration) and "रूपक" (metaphor) in the text.
  • Practice explaining the भाव (emotional essence) and शिल्प (poetic technique) for each verse.

Practice MCQs

Q1. मीरा कृष्ण की उपासना किस रूप में करती हैं?

Q2. कृष्ण के जिस रूप की मीरा आराधना करती हैं, वह कैसा है?

Q3. मीरा ने कृष्ण रूपी बेल को किससे सींचा है?

Q4. कविता में "प्रेम-बेलि" के बोने का क्या परिणाम हुआ?

Q5. शिल्प-सौन्दर्य की दृष्टि से "सींची-सींची" में कौन सा अलंकार है?

Q6. इस कविता में भक्ति को किसके समान माना गया है?

Frequently asked questions

यह NCERT समाधान किस कक्षा और विषय के लिए हैं?

यह NCERT समाधान CBSE कक्षा 11 के हिंदी ऐच्छिक (Aroh Bhag-I) विषय के लिए हैं, विशेष रूप से अध्याय 12: मीरा के पद पर केंद्रित हैं।

मीरा कृष्ण की उपासना किस रूप में करती हैं?

मीरा कृष्ण की उपासना एक पति के रूप में करती हैं और स्वयं को उनकी दासी मानती हैं। वे कृष्ण के मनमोहक रूप की आराधना करती हैं, जो पर्वत धारण किए हुए हैं और सिर पर मोर-मुकुट सुशोभित किए हुए हैं।

कविता में "प्रेम-बेलि" और "आनंद-फल" का क्या अर्थ है?

मीरा ने अपने आंसुओं से कृष्ण रूपी 'प्रेम-बेलि' को सींचा है। अब यह बेल फैल गई है और 'आनंद-फल' दे रही है, जिसका अर्थ है कि उनकी भक्ति परिपक्व हो गई है और उन्हें आध्यात्मिक आनंद की अनुभूति हो रही है।

मीरा के पदों में भाव और शिल्प सौंदर्य का विश्लेषण कैसे किया गया है?

समाधानों में मीरा की भक्ति की गहराई (भाव सौंदर्य) और उनकी भाषा की मधुरता, संगीतात्मकता, तथा अलंकारों (जैसे पुनरुक्ति और रूपक) के प्रयोग (शिल्प सौंदर्य) का विश्लेषण किया गया है।

यह समाधान छात्रों की परीक्षा तैयारी में कैसे मदद करेंगे?

ये समाधान छात्रों को मीरा के पदों के अर्थ, उनकी भक्ति भावना, और काव्य शिल्प को गहराई से समझने में मदद करते हैं, जिससे वे परीक्षा में पूछे जाने वाले प्रश्नों का सटीक उत्तर दे सकें।

Content reviewed by the NCERT Help team. Editorial Team and update policy

NCERT Solutions PDF PDF on NCERT Help. URL unchanged for search indexing.