CBSE Class 10 Hindi Kritika Chapter 2: जॉर्ज पंचम की नाक NCERT Solutions

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This chapter, 'जॉर्ज पंचम की नाक' (The Nose of King George V), from CBSE Class 10 Hindi Kritika, delves into a satirical commentary on the Indian government's bureaucratic approach and its lingering colonial mindset. The NCERT Solutions provided here break down the story's core themes, focusing on the absurd obsession with installing a statue's nose during a critical period. The solutions analyze the characters' anxieties, the media's role, and the underlying message about national pride and self-respect. Students will find detailed explanations for each question, helping them grasp the nuances of the narrative, understand the critique of administrative inefficiency, and appreciate the story's subtle humor. These solutions are designed to aid students in their exam preparation by offering clear, concise, and insightful answers to all the chapter's exercises, fostering a deeper understanding of the text and its socio-political undertones.

Quick info

BoardCBSE
ClassClass 10
SubjectHindi Kritika
Session2026
LanguageHindi
TypeNCERT Solutions
ChapterChapter 2

Chapter summary

Chapter 2 of CBSE Class 10 Hindi Kritika, 'जॉर्ज पंचम की नाक', critically examines the bureaucratic absurdity and colonial hangover prevalent in post-independence India. The NCERT Solutions cover questions related to the government's frantic efforts to procure a nose for King George V's statue, highlighting the misplaced priorities and sycophancy. The solutions also explore the role of media, the anxieties of officials, and the underlying message of national self-reliance and dignity.

Learning outcomes

  • Understand the satirical critique of bureaucracy and colonial mentality in the story.
  • Analyze the significance of the 'nose' as a symbol in the narrative.
  • Evaluate the role and responsibility of the media in shaping public perception.
  • Identify instances of sycophancy and misplaced priorities within the administration.
  • Appreciate the story's commentary on national pride and self-respect.

Topics covered

Paper topics

  • Satire on bureaucracy
  • Colonial mentality
  • National pride and self-respect
  • Role of media in journalism
  • Symbolism of the nose
  • Government inefficiency
  • Post-independence India's challenges
  • Critique of sycophancy
  • Public administration
  • Cultural values

Important topics

  • Satire on bureaucracy and colonial mentality
  • Symbolism of the nose
  • Critique of media practices
  • National pride and self-reliance

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Questions and Solutions

Class 10 हिंदी

Kritika II – Chapter 2: जॉर्ज पंचम की नाक

प्रश्न अभ्यास

  1. सरकारी तंत्र में जॉर्ज पंचम की नाक लगाने को लेकर जो चिंता या बदहवासी दिखाई देती है वह उनकी किस मानसिकता को दर्शाती है।

उत्तर

सरकारी तंत्र में जॉर्ज पंचम की नाक लगाने को लेकर जो चिंता या बदहवासी दिखाई देती है, वह उनकी गुलाम और औपनिवेशिक मानसिकता को प्रकट करती है। सरकारी लोग उस जॉर्ज पंचम के नाम से चिंतित है जिसने न जाने कितने ही कहर ढहाए। उसके अत्याचारों को याद न कर उसके सम्मान में जुट जाते हैं। सरकारी तंत्र अपनी अयोग्यता,अदूरदर्शिता, मूर्खता और चाटुकारिता को दर्शाता है।

  1. रानी एलिजाबेथ के दरज़ी की परेशानी का क्या कारण था? उसकी परेशानी को आप किस तरह तर्कसंगत ठहराएँगे?

उत्तर

रानी एलिज़ाबेथ के दरजी की परेशानी का कारण रानी की वेशभूषा थी। दरजी यह सोच कर परेशान हो रहा था की भारत-पाकिस्तान और नेपाल यात्रा के समय रानी किस अवसर पर क्या पहनेंगी।

दरजी की परेशानी तर्कसंगत थी। यह इसलिए क्योंकि रानी इस यात्रा पर अपने देश का प्रतिनिधित्व कर रहीं थी। अर्थात उनके कपड़ों का उनकी मर्यादा के अनुकूल होना जरूरी था। रानी की वेशभूषा तैयार करने में यदि उससे कोई चूक हो जाती, तो उसे रानी के क्रोध का सामना करना पड़ता।

  1. ‘और देखते ही देखते नयी दिल्ली का काया पलट होने लगा’ – नयी दिल्ली के काया पलट के लिए क्या-क्या प्रयत्न किए गए होंगे ?

उत्तर

दिल्ली की काया पलटने के लिए पर्यटक स्थलों का उद्धार किया गया होगा। दिल्ली की खस्ता हो चुकी सड़कों का पुर्नउद्धार किया गया होगा, पूरे दिल्ली शहर में साफ सफाई के लिए विशेष योजनाएँ तैयार की गई होगी। उन दिनों पानी या बिजली की समस्याएँ ना उत्पन्न हो उसके लिए कारगर कार्य किए गए होंगे। आंतकवादी घटनाएँ या फिर इंग्लैंड विरोधी कार्यवाही या धरने न हो उसके लिए सुरक्षा के पूरे इंतजाम किए गए होंगे।

  1. आज की पत्रकारिता में चर्चित हस्तियों के पहनावे और खान-पान संबंधी आदतों आदि के वर्णन का दौर चल पड़ा है –
  • (क) इस प्रकार की पत्रकारिता के बारे में आपके क्या विचार हैं?

उत्तर

आज की पत्रकारिता में चर्चित हस्तियों के पहनावे और खान-पान सम्बंधि आदतों आदि के वर्णन का दौर चल पड़ा है वह न केवल अनावश्यक है, बल्की समाज की उन्नति के लिए बाधक भी है। यह एक निम्न स्तर की भटकी हुई पत्रकारिता है। पत्रकारिता लोकतंत्र का वह मुख्य स्तम्भ है, जो समाज के अधिकारों के प्रहरी के रूप में समाज तथा राष्ट्र दोनों के विकास मैं महत्वपूर्ण भूमिका अदा करती है। किन्तु इस प्रकार की पत्रकारिता जिससे सामान्य ज्ञान नहीं बढ़ता, न ही इससे आम आदमी के जीवन में कोइ लेना-देना है, समाज को सिर्फ हानि पहुँचाती है। यह व्यक्ति- विशेष की निजी जीवन में अनुचित ताक-झाँक है जो हमारी सभ्यता व संस्कृति के विपरीत है।

  • (ख) इस तरह की पत्रकारिता आम जनता विशेषकर युवा पीढ़ी पर क्या प्रभाव डालती है ?

उत्तर

इस प्रकार की पत्रकारिता आम जनता विशेषकर युवा पीढ़ी पर अत्यंत नकारात्मक और हानिकारक प्रभाव डालती है। यह युवा पीढ़ी के चारों ओर चर्चित हस्तियों की जीवन-शैली का ऐसा भ्रम-जाल बुन देती है, जिसमें उलझकर युवा पीढ़ी और आम जनता अपने लक्ष्यों और कर्तव्यों से भटककर अपराध के दल-दल में फँस जाती है। राष्ट्र को सही दिशा में चलाने के लिए यह आवश्यक है कि पत्रकारिता का प्रत्येक विषय समस्त नागरिकों के हित में हो न की लोगों को पथ भ्रष्ट करने के लिए हो।

  1. जॉर्ज पंचम की लाट की नाक को पुन: लगाने के लिए मूर्तिकार ने क्या-क्या यत्न किए?

उत्तर

जॉर्ज पंचम की लाट की नाक को पुनः लगाने के लिए मूर्तिकार ने सर्वप्रथम जॉर्ज पंचम की नाक के निर्माण में प्रयुक्त पत्थर को खोजने का प्रयास किया। इसके लिए उसने देश भर में जा- जाकर खोज की, पर असफल रहा। वह पत्थर विदेशी था। उसने देश भर में घूम-घूमकर शहीद नेताओं की मूर्तियों की नाक का नाप लिया, ताकि उन मूर्तियों में से किसी की नाक को जॉर्ज पंचम की लाट पर लगाया जा सके, किंतु सभी नाकें आकार में बड़ी निकलीं। इसके पश्चात् उसने 1942 में बिहार सेक्रेटरिएट के सामने शहीद बच्चों की मूर्ती की नाक का नाप लिया, किंतु वे भी बड़ी निकलीं। अंत में उसने जिंदा नाक लगाने का निर्णय किया।

  1. प्रस्तुत कहानी में जगह-जगह कुछ ऐसे कथन आए हैं जो मौजूदा व्यवस्था पर करारी चोट

करते हैं। उदाहरण के लिए ‘फाईलें सब कुछ हज़म कर चुकी हैं।’ ‘सब हुक्कामों ने एक दूसरे की तरफ़ ताका।’ पाठ में आए ऐसे अन्य कथन छाँटकर लिखिए।

उत्तर

मौजूदा व्यवस्था पर चोट करने वाले कथन निम्नलिखित हैं-

  1. संभापति ने तैश में आकर कहा, "लानत है आपकी अकल पर। विदेशों की सारी चीज़ें हम

Common mistakes

  • Confusing the satire with a literal interpretation of events.
  • Underestimating the symbolic importance of the nose.
  • Failing to connect the bureaucratic actions to the colonial past.
  • Overlooking the critique of media sensationalism.

Revision tips

  • Reread the story, paying close attention to the dialogues and the officials' reactions.
  • Focus on the symbolic meaning of the nose and its connection to national identity.
  • Analyze the author's use of satire to criticize the government's actions.
  • Discuss the role of the media and its portrayal in the story.
  • Summarize the main themes in your own words to check understanding.

Practice MCQs

Q1. सरकारी तंत्र में जॉर्ज पंचम की नाक लगाने को लेकर चिंता किस मानसिकता को दर्शाती है?

Q2. रानी एलिजाबेथ के दरजी की मुख्य परेशानी क्या थी?

Q3. नयी दिल्ली का काया पलट करने के लिए क्या-क्या प्रयत्न किए गए होंगे?

Q4. चर्चित हस्तियों के पहनावे और खान-पान संबंधी पत्रकारिता के बारे में लेखक के क्या विचार हैं?

Q5. जॉर्ज पंचम की लाट की नाक को पुनः लगाने के लिए मूर्तिकार ने क्या-क्या यत्न किए?

Frequently asked questions

यह NCERT समाधान किस कक्षा और विषय के लिए हैं?

यह NCERT समाधान CBSE कक्षा 10 की हिंदी कृतििका पुस्तक के अध्याय 2, 'जॉर्ज पंचम की नाक' के लिए हैं।

अध्याय 2 'जॉर्ज पंचम की नाक' का मुख्य विषय क्या है?

अध्याय 2 का मुख्य विषय सरकारी तंत्र की निरर्थक चिंता, औपनिवेशिक मानसिकता पर व्यंग्य और राष्ट्रीय स्वाभिमान का प्रश्न है।

कहानी में जॉर्ज पंचम की नाक को लेकर सरकारी तंत्र की क्या मानसिकता दिखाई देती है?

सरकारी तंत्र की चिंता उनकी गुलाम और औपनिवेशिक मानसिकता को दर्शाती है, जो विदेशी शासकों के प्रति चाटुकारिता और अपनी अयोग्यता को छिपाने का प्रयास करती है।

रानी एलिजाबेथ के दरजी की परेशानी का क्या कारण था?

दरजी की परेशानी यह थी कि रानी की भारत यात्रा के दौरान उन्हें किस अवसर पर कौन सी वेशभूषा पहननी चाहिए, इसकी चिंता उसे सता रही थी।

इस कहानी से हमें क्या सीख मिलती है?

यह कहानी हमें सिखाती है कि हमें अपनी राष्ट्रीय पहचान और स्वाभिमान को महत्व देना चाहिए और सरकारी तंत्र को जनता की वास्तविक समस्याओं पर ध्यान केंद्रित करना चाहिए, न कि व्यर्थ की बातों पर।

क्या ये समाधान परीक्षा की तैयारी में मदद करेंगे?

हाँ, ये समाधान प्रत्येक प्रश्न के विस्तृत और स्पष्ट उत्तर प्रदान करते हैं, जिससे छात्रों को अध्याय की गहरी समझ विकसित करने और परीक्षा में अच्छे अंक प्राप्त करने में मदद मिलेगी।

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